Delhi की हवा में सुधार की दिशा में बड़ा कदम: Rekha Gupta ने Indira Gandhi International Airport पर मिस्ट सिस्टम का शुभारंभ किया
Delhi की हवा अक्सर धुंध और प्रदूषण से भरी रहती है। खासकर हवाई अड्डों जैसे व्यस्त स्थानों पर उतरते ही यात्रियों को धूल और धुएँ का असर महसूस होता है। ऐसे में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर उन्नत मिस्ट सिस्टम का शुभारंभ ‘क्लियर एयर, क्लीन दिल्ली’ मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
ये मिस्ट सिस्टम सूक्ष्म जलकणों का छिड़काव करते हैं, जो हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कणों (PM2.5 और PM10) को पकड़कर नीचे गिरा देते हैं। इससे यात्रियों और कर्मचारियों को स्वच्छ हवा मिल सकेगी।
IGI एयरपोर्ट पर मिस्ट तकनीक की रणनीतिक तैनाती
प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान
हवाई अड्डों पर वाहनों की आवाजाही, टैक्सी जोन में खड़ी गाड़ियाँ, रनवे पर विमानों की गतिविधि और आसपास चल रहे निर्माण कार्य प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार IGI के आसपास PM2.5 स्तर कई बार सुरक्षित सीमा से ऊपर दर्ज किए गए हैं।
इन्हीं संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे टर्मिनल 3 के आगमन क्षेत्र, पार्किंग जोन और परिधि दीवारों—में मिस्ट सिस्टम लगाए गए हैं।
तकनीकी विशेषताएँ
हाई-प्रेशर नोजल से अल्ट्रा-फाइन मिस्ट का छिड़काव
रियल-टाइम सेंसर आधारित संचालन
50,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र कवरेज
पुनर्चक्रित (रीसाइकल) जल का उपयोग
ये जलकण प्रदूषक कणों को भारी बनाकर जमीन पर गिरा देते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है।
‘क्लियर एयर, क्लीन दिल्ली’ मिशन को मजबूती
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लॉन्च के दौरान कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक अवसंरचना को प्रदूषण कम करने में भी भूमिका निभानी होगी।
मिशन के प्रमुख स्तंभ
वाहन उत्सर्जन की सख्त जांच
औद्योगिक इकाइयों में स्क्रबर अनिवार्य
निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण
प्रमुख सड़कों पर नियमित सफाई
हरित पट्टियों का विस्तार
मिस्ट सिस्टम इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2028 तक प्रदूषण में 30% की कमी लाना है।
निगरानी और प्रभाव का आकलन
Delhi प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के सहयोग से एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग की जाएगी। ऑन-साइट सेंसर के माध्यम से रियल-टाइम डेटा एकत्र किया जाएगा और तिमाही रिपोर्ट जारी की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य अगले वर्ष PM2.5 स्तर को 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से नीचे लाना है। प्रारंभिक परीक्षणों में पीक ऑवर्स के दौरान 15–20% तक सूक्ष्म धूल में कमी की संभावना जताई गई है।
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विभिन्न एजेंसियों का सहयोग
इस परियोजना को लागू करने में Delhi International Airport Limited (DIAL) की अहम भूमिका रही। पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने तकनीकी और नियामकीय सहयोग दिया।
साझा प्रयासों से यह परियोजना कम समय में लागू हो सकी।
विशेषज्ञों और जनता की प्रतिक्रिया
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि नियंत्रित क्षेत्रों में मिस्ट सिस्टम प्रभावी साबित हो सकते हैं, विशेषकर सूखे और धूल भरे इलाकों में। यात्रियों ने भी टर्मिनल के आसपास कम धूल और हल्की ठंडक का अनुभव साझा किया है।
गर्मियों में यह तकनीक तापमान को भी थोड़ा नियंत्रित करती है, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त राहत मिलती है।
भविष्य की योजनाएँ
यदि IGI एयरपोर्ट पर यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे अन्य सार्वजनिक स्थलों—जैसे प्रमुख चौराहों, रेलवे स्टेशनों और मेट्रो हब—पर भी लागू किया जा सकता है।
राज्य सरकार ने परियोजना के लिए प्रारंभिक बजट आवंटित किया है और दीर्घकालिक रखरखाव की योजना भी तैयार की है। सौर ऊर्जा आधारित संचालन और जल पुनर्चक्रण से इसे टिकाऊ बनाया जाएगा।
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नागरिकों की भूमिका
निजी वाहन की जगह मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें
प्लास्टिक उपयोग कम करें
निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों की सूचना दें
वृक्षारोपण अभियानों में भाग लें
सरकार की पहल तभी सफल होगी जब नागरिक भी सहयोग करें।
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिस्ट सिस्टम की शुरुआत Delhi की वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक ठोस कदम है। यह पहल ‘क्लियर एयर, क्लीन दिल्ली’ मिशन को तकनीकी मजबूती देती है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह कदम दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संतुलन संभव है।
Delhi की हवा साफ करने का सफर लंबा है, लेकिन हर छोटी पहल—चाहे वह मिस्ट की एक बूँद हो या नागरिक का एक निर्णय—इस बदलाव को संभव बना सकती है।
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