Delhi विश्वविद्यालय ने राहुल गांधी इंटरव्यू के दावे को बताया फर्जी: पूरा फैक्ट-चेक विश्लेषण
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हुई कि कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने University of Delhi (Delhi विश्वविद्यालय) में छात्रों के साथ एक खास इंटरव्यू दिया है। यह खबर देखते ही देखते लाखों लोगों तक पहुंच गई और कई लोगों ने इसे बिना जांचे-परखे शेयर भी कर दिया।
लेकिन थोड़े ही समय बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस दावे को पूरी तरह फर्जी बताते हुए साफ कर दिया कि ऐसा कोई इंटरव्यू उनके परिसर में हुआ ही नहीं था।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि डिजिटल दौर में अफवाहें कितनी तेजी से फैल सकती हैं और तथ्य जांचना क्यों जरूरी है।
अफवाह की शुरुआत और तेजी से वायरल होना
यह दावा सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आया, जहाँ एक वीडियो क्लिप पोस्ट की गई। पोस्ट करने वाले ने कहा कि यह क्लिप Rahul Gandhi और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच हुई बातचीत का हिस्सा है।
कुछ छोटे ब्लॉग और वेबसाइटों ने इस पोस्ट को बिना सत्यापन के साझा कर दिया। इसके बाद यह वीडियो फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया।
थोड़े ही समय में #RahulAtDU जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे और लाखों लोग इस पर चर्चा करने लगे।

कथित इंटरव्यू में क्या दिखाया गया
वीडियो क्लिप में दिखाया गया कि राहुल गांधी युवाओं के रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर बात कर रहे हैं।
कथित तौर पर उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय देश के भविष्य के नेताओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही उन्होंने सरकार की कुछ शिक्षा नीतियों की आलोचना भी की।
वीडियो में ऐसा भी दिखाया गया कि छात्र उनसे सवाल पूछ रहे हैं और वे जवाब दे रहे हैं। इसी वजह से कई लोगों को यह इंटरव्यू असली लगा।
शुरुआती संदेह और संकेत
हालांकि कुछ लोगों ने शुरुआत में ही वीडियो पर सवाल उठाए।
संदेह के मुख्य कारण थे:
वीडियो की गुणवत्ता और ऑडियो में गड़बड़ी
Delhi विश्वविद्यालय के किसी आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर इसका जिक्र नहीं
राहुल गांधी की टीम की ओर से कोई पुष्टि नहीं
वीडियो का स्थान विश्वविद्यालय के किसी पहचान योग्य हॉल से मेल नहीं खाता
इन संकेतों ने कई फैक्ट-चेकर्स को जांच करने के लिए प्रेरित किया।

Delhi विश्वविद्यालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया
जब यह मामला ज्यादा वायरल हो गया तो University of Delhi ने आधिकारिक बयान जारी किया।
विश्वविद्यालय ने सोशल मीडिया और अपनी वेबसाइट के माध्यम से स्पष्ट किया कि:
राहुल गांधी का उस समय विश्वविद्यालय में कोई दौरा नहीं हुआ था
सुरक्षा रिकॉर्ड में उनके आने का कोई विवरण नहीं है
वीडियो में दिखाया गया स्थान विश्वविद्यालय परिसर का हिस्सा नहीं है
विश्वविद्यालय ने लोगों से अपील की कि बिना जांचे किसी भी जानकारी को साझा न करें।गलत जानकारी फैलाने के तरीके
इस मामले से यह भी समझ आता है कि गलत जानकारी कैसे फैलती है।
कुछ सामान्य तरीके:
एडिटेड या संदर्भ से हटाए गए वीडियो
फर्जी लोकेशन या बैकग्राउंड का इस्तेमाल
वायरल हैशटैग के जरिए तेजी से प्रचार
ऐसे मामलों में सत्यापन के लिए कुछ सरल कदम उठाए जा सकते हैं:
आधिकारिक स्रोतों की जांच करें
विश्वसनीय समाचार वेबसाइट देखें
वीडियो या फोटो की रिवर्स सर्च करें

राजनीतिक असर
इस घटना का असर राजनीति और मीडिया दोनों पर पड़ा।
कुछ विरोधी नेताओं ने इसे लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए, जबकि कई मीडिया संस्थानों ने बाद में खबर को सुधारते हुए कहा कि इंटरव्यू का दावा गलत था।
हालांकि इस विवाद के बाद Rahul Gandhi ने अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों और भाषणों पर ध्यान केंद्रित किया।
Delhi विश्वविद्यालय द्वारा जारी बयान ने साफ कर दिया कि राहुल गांधी के इंटरव्यू का दावा पूरी तरह फर्जी था।
यह घटना एक महत्वपूर्ण सबक देती है—
आज के डिजिटल युग में कोई भी खबर मिनटों में वायरल हो सकती है, लेकिन सत्य जानने के लिए फैक्ट-चेक और आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना बेहद जरूरी है।
वित्त वर्ष 2026 के लिए 2.01 लाख करोड़ रुपये के पूरक व्यय को मंजूरी देने के बाद LokSabha ने दिनभर के लिए सत्र स्थगित कर दिया।
Follow us on Facebook
India Savdhan News | Noida | Facebook

