Delhi मेट्रो टेक्नीशियन, पत्नी और 9 वर्षीय बेटी की DMRC क्वार्टर में आग लगने से दर्दनाक मौत: पूरी घटना का विवरण
कल्पना कीजिए—रात के सन्नाटे में अचानक चीख-पुकार सुनाई दे और कुछ ही देर में पता चले कि पास के घर में रहने वाला पूरा परिवार आग में जलकर खत्म हो गया। ऐसा ही दिल दहला देने वाला हादसा द्वारका सेक्टर-3 स्थित दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के आवासीय क्वार्टर में हुआ, जहां एक मेट्रो कर्मचारी, उनकी पत्नी और 9 साल की मासूम बेटी की आग लगने से मौत हो गई।
यह हादसा न सिर्फ स्थानीय समुदाय बल्कि पूरे DMRC परिवार के लिए गहरा सदमा है। घनी आबादी वाले सरकारी आवासों में आग तेजी से फैलती है और अक्सर लोगों को बचने का मौका तक नहीं मिल पाता।
घटना का क्रम और शुरुआती राहत कार्य
आग कैसे लगी और कैसे फैली
आग देर रात करीब 2 बजे परिवार के दूसरे माले के फ्लैट में लगी। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि रसोई में बिजली के शॉर्ट सर्किट से चिंगारी निकली, जिसने पास में लगे पर्दों और घरेलू सामान को अपनी चपेट में ले लिया।
कुछ ही मिनटों में पूरा फ्लैट धुएं से भर गया। बंद खिड़कियों और संकरे रास्तों के कारण गर्मी और जहरीला धुआं बाहर नहीं निकल सका। आग इतनी तेजी से फैली कि परिवार को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।
पड़ोसियों ने पहले जलने की आवाज़ें सुनीं और फिर लपटें दिखीं। एक निवासी के अनुसार, “आग इतनी तेज थी कि पूरा ब्लॉक रोशन हो गया।”
दमकल और पुलिस की कार्रवाई
रात 2:15 बजे Delhi फायर सर्विस को सूचना मिली। दमकल की गाड़ियां करीब 20 मिनट में मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक फ्लैट पूरी तरह आग की चपेट में आ चुका था।
दमकल कर्मियों ने सीढ़ियों की मदद से ऊपरी मंजिलों तक पहुंच बनाई और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पुलिस ने इलाके को घेर लिया और बाकी निवासियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
दमकल के पहुंचने से पहले सुरक्षा गार्ड और पड़ोसियों ने लोगों को जगाने की कोशिश की। एक गार्ड ने खिड़की तोड़कर अंदर झांकने की कोशिश की, लेकिन घना धुआं उसे पीछे हटने पर मजबूर कर गया। उनकी तत्परता से आसपास के कई परिवार सुरक्षित निकल सके।

मृतकों की पहचान: DMRC का एक पूरा परिवार खत्म
मेट्रो कर्मचारी का परिचय
मृतक की पहचान 35 वर्षीय राजेश कुमार के रूप में हुई है, जो DMRC में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। वह पिछले आठ वर्षों से दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन में सिग्नलिंग सिस्टम से जुड़े थे।
सहकर्मियों के अनुसार, राजेश मेहनती और मददगार स्वभाव के थे। कई बार वह ड्यूटी के बाद भी क्वार्टर में छोटी-मोटी तकनीकी समस्याएं ठीक कर देते थे।
उनकी असमय मौत ने DMRC के कार्यस्थल पर एक खालीपन छोड़ दिया है।
परिवार पर असर
राजेश की पत्नी प्रिया (32) गृहिणी थीं और अपनी बेटी की देखभाल के साथ-साथ स्थानीय सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहती थीं। वह मंदिर और सामुदायिक कार्यक्रमों में स्वेच्छा से सहयोग करती थीं।
उनकी बेटी अनन्या, उम्र 9 वर्ष, पास के सरकारी स्कूल में पढ़ती थी। उसे चित्र बनाना बहुत पसंद था और वह डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। स्कूल के बच्चों और शिक्षकों ने उसे एक हंसमुख और होशियार बच्ची बताया।
पड़ोसियों का कहना है कि परिवार बेहद मिलनसार था और त्योहारों पर सबका स्वागत करता था। एक साथ तीन जिंदगियों का जाना पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो गया है।
जांच जारी: आग के कारण और सुरक्षा में चूक की पड़ताल
दमकल विभाग और पुलिस की जांच
पुलिस ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 174 के तहत मामला दर्ज किया है। दिल्ली फायर सर्विस और फॉरेंसिक टीम आग के कारणों की गहन जांच कर रही है।
बिजली के तारों, घरेलू उपकरणों और वायरिंग की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आग ओवरलोड, खराब रखरखाव या किसी अन्य कारण से लगी।

DMRC क्वार्टर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
DMRC आवासीय परिसर में कॉमन एरिया में फायर अलार्म और हाइड्रेंट मौजूद हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि संबंधित फ्लैट में अलार्म समय पर सक्रिय नहीं हुआ।
हालांकि आपातकालीन रास्ते खुले थे, लेकिन धुएं के कारण उनका उपयोग संभव नहीं हो सका। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुराने भवनों में नियमित इलेक्ट्रिकल ऑडिट और फायर सेफ्टी जांच हो रही थी या नहीं।
जरूरी सुरक्षा सुझाव (आपके लिए उपयोगी)
हर महीने स्मोक डिटेक्टर जांचें, साल में दो बार बैटरी बदलें
परिवार के साथ कम से कम दो एस्केप रूट तय करें और अभ्यास करें
बिजली के सॉकेट के पास ज्वलनशील सामान न रखें
पुरानी वायरिंग की समय-समय पर प्रोफेशनल जांच कराएं
सामुदायिक और संस्थागत प्रतिक्रिया
DMRC प्रबंधन की संवेदनाएं
DMRC प्रबंधन ने तड़के ही शोक संदेश जारी कर इस घटना को “अत्यंत दुखद” बताया। मृतक परिवार के परिजनों को हर संभव सहायता देने और आर्थिक मदद के लिए एक विशेष फंड बनाने की घोषणा की गई।
कर्मचारियों के लिए काउंसलिंग और फायर सेफ्टी वर्कशॉप आयोजित करने की भी योजना है।

द्वारका समुदाय पर असर
घटना के बाद द्वारका सेक्टर-3 में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि दी। अनन्या के स्कूल के बच्चों ने उसके लिए चित्र बनाए।
इलाके में डर और चिंता का माहौल है—कई लोग कह रहे हैं, “यह हमारे साथ भी हो सकता था।” सोशल मीडिया पर घटना को लेकर कई पोस्ट सामने आईं, हालांकि प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की है।
पीड़ितों की याद और आग से बचाव का संदेश
DMRC क्वार्टर की इस आग ने तीन जिंदगियां छीन लीं और पूरे समुदाय को झकझोर दिया। राजेश, प्रिया और अनन्या की मौत यह याद दिलाती है कि घरों में आग का खतरा कितना वास्तविक है।
जांच जारी है और उम्मीद है कि इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
मुख्य सीख:
स्मोक अलार्म जान बचा सकते हैं—इन्हें नजरअंदाज न करें
अपने भवन की सुरक्षा व्यवस्था को जानें और खामियों की रिपोर्ट करें
परिवार के साथ नियमित फायर ड्रिल करें
पुराने अपार्टमेंट में इलेक्ट्रिकल जांच बेहद जरूरी है
इस दुखद घटना से सबक लें और अपने घर को सुरक्षित बनाएं। आज की सावधानी ही कल की सुरक्षा है।
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