Delhi

Delhi प्रदूषण नियंत्रण समिति की सख्त कार्रवाई: 411 उद्योग बंद

पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई की गहराई से पड़ताल

Delhi की जहरीली हवा और गंदे होते जलस्रोतों के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने 411 उद्योगों को बंद करने का आदेश दिया है। ये सभी इकाइयाँ हवा और पानी से जुड़े बुनियादी पर्यावरणीय मानकों का पालन करने में विफल पाई गईं। यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण पर लगाम लगाने की दिशा में एक कड़ा संदेश है।

Delhi की हवा कई बार इतनी खराब हो जाती है कि AQI 400 के पार चला जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी हवा में सांस लेना रोज़ाना सिगरेट पीने जैसा असर डालता है। अदालतों और पर्यावरण समूहों के लगातार दबाव के बाद अब DPCC ने सीधी और सख्त कार्रवाई की है। यह सिर्फ नोटिस नहीं, बल्कि उद्योगों के लिए एक चेतावनी है।

कार्रवाई का दायरा और तत्काल असर

किन उद्योगों पर गिरी गाज और क्यों?

DPCC ने अचानक निरीक्षण के बाद ये आदेश जारी किए।

  • मयापुरी, वज़ीरपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित छोटी-मझोली फैक्ट्रियाँ मुख्य निशाने पर रहीं

  • बिना फिल्टर धुआँ छोड़ना

  • बिना शोधन के गंदा पानी नालों में बहाना

कपड़ा रंगाई, धातु चढ़ाने (मेटल प्लेटिंग) और वर्कशॉप जैसी इकाइयाँ उत्सर्जन मानकों से कई गुना ज्यादा प्रदूषण फैला रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार, 200 से अधिक इकाइयाँ बिना किसी ट्रीटमेंट के रासायनिक कचरा यमुना नदी में छोड़ रही थीं।

सर्दियों में स्मॉग और फैक्ट्री धुएँ का मिश्रण हालात और भी जानलेवा बना देता है, इसी कारण यह कार्रवाई अब की गई। आदेश के बाद इन इकाइयों की गतिविधियाँ तुरंत रोक दी गईं, जिससे उत्पादन ठप और हज़ारों मज़दूर प्रभावित हुए।

Delhi govt. begins drive against polluting units; orders closure of 411  polluting industries - The Hindu

सबसे आम उल्लंघन क्या थे?

निरीक्षण में सामने आईं गंभीर कमियाँ:

  • बिना एयर फिल्टर के धुआँ, सुरक्षित सीमा से 5 गुना अधिक PM उत्सर्जन

  • बिना ट्रीटमेंट के रासायनिक और भारी धातुओं वाला पानी बाहर छोड़ना

  • फर्जी रिपोर्ट और अधूरे रिकॉर्ड

  • वर्षों से जारी चेतावनियों की अनदेखी

लगभग 150 रंगाई इकाइयाँ रंगीन कीचड़ (स्लज) फेंकने के कारण बंद की गईं। मेटल वर्कशॉप्स से निकला तेल-युक्त पानी नालों और नदियों को ज़हरीला बना रहा था।

कानूनी आधार: DPCC को इतनी सख्त शक्ति कैसे मिली?

  • वायु (प्रदूषण निवारण) अधिनियम, 1981 की धारा 31A

  • जल (प्रदूषण निवारण) अधिनियम, 1974

इन कानूनों के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह अधिकार है कि वह बिना अदालत की अनुमति तत्काल उद्योग बंद कर सके, यदि जनस्वास्थ्य खतरे में हो।

2024 के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने NCR में प्रदूषण पर “शून्य सहनशीलता” की नीति अपनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद DPCC को मौके पर ही फैक्ट्री सील करने की शक्ति मिली।

दंड और डर: नियम न मानने वालों का क्या होगा?

  • प्रति उल्लंघन ₹10 लाख तक जुर्माना

  • दोहराए गए अपराध पर आपराधिक मुकदमा और जेल

  • “Polluter Pays” सिद्धांत के तहत सफाई का पूरा खर्च उद्योग पर

उदाहरण के तौर पर, रंगाई इकाइयों को यमुना की सफाई का खर्च भी उठाना पड़ सकता है, जो करोड़ों में हो सकता है।

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उद्योगों की प्रतिक्रिया और आर्थिक असर

411 उद्योगों के बंद होने से:

  • रोज़ाना लाखों का नुकसान

  • 10,000 से ज्यादा मजदूर प्रभावित

  • सप्लाई चेन बाधित, खासकर कपड़ा उद्योग

उद्योग संगठनों का कहना है कि यह “अचानक झटका” है और छोटे उद्योगों को सुधार का समय मिलना चाहिए। लेकिन सच्चाई यह भी है कि प्रदूषण से पहले ही अर्थव्यवस्था को अरबों का नुकसान हो रहा है—बीमारियाँ, छुट्टियाँ और इलाज का खर्च।

दोबारा खोलने का रास्ता क्या है?

उद्योग तभी खुल सकते हैं जब:

  1. प्रमाणित ऑडिट कराया जाए

  2. Effluent Treatment Plant (ETP) लगाया जाए

  3. एयर फिल्टर, स्क्रबर, बैग फिल्टर लगाए जाएँ

  4. लैब रिपोर्ट DPCC को सौंपी जाए

  5. जुर्माना भरा जाए

छोटी इकाइयों के लिए ETP की लागत लगभग ₹50 लाख से कम हो सकती है। आमतौर पर 30–60 दिनों में सुधार संभव है।

सिर्फ सख्ती नहीं, सिस्टम में बदलाव जरूरी

रियल-टाइम निगरानी और पारदर्शिता

  • Continuous Emission Monitoring System (CEMS)

  • 24×7 डेटा ट्रैकिंग

  • 2026 तक बड़े उद्योगों के लिए अनिवार्य योजना

  • सार्वजनिक डैशबोर्ड से निगरानी

गुजरात में CEMS से उल्लंघन 40% तक घटे हैं।

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ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा

  • ETP पर 50% तक सब्सिडी

  • ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए तेज़ मंज़ूरी

  • प्रदूषणकारी उद्योगों को बाहरी ज़ोन में शिफ्ट करना

  • कम पानी और सौर ऊर्जा आधारित तकनीक पर टैक्स छूट

पुराने बॉयलर की जगह सोलर सिस्टम लगाने से लंबे समय में लागत भी घटती है।

पर्यावरणीय जवाबदेही की ओर जरूरी कदम

411 उद्योगों को बंद करना एक कठोर लेकिन जरूरी फैसला है। यह दिल्ली के लाखों लोगों को जहरीली हवा और पानी से बचाने की दिशा में बड़ा संकेत है कि अब लापरवाही नहीं चलेगी।

नियम, दंड और समाधान—तीनों साफ हैं। अब ज़रूरत है लगातार निगरानी और सही प्रोत्साहन की।
आप भी भूमिका निभा सकते हैं—स्वच्छ प्रयासों का समर्थन करें और साफ हवा की मांग करें।

एक-एक फैक्ट्री के सुधरने से दिल्ली की सांसें हल्की होंगी।

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