Delhi प्रदूषण: क्यों एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) संकट की असली गंभीरता नहीं दिखाता
कल्पना कीजिए—दिसंबर 2025 की एक सर्द सुबह दिल्ली में। आसमान पर धुंध की मोटी परत, सूरज कहीं गायब। जैसे ही बाहर कदम रखते हैं, हवा गले में चुभती है, आँखों में जलन, दूर कहीं से धुएँ की हल्की जलन। मोहल्ले में खाँसी की आवाज़ें। लेकिन मोबाइल ऐप पर AQI: 350 — “बहुत ख़राब”। महसूस होता है 800 जैसा—दम घोंटने वाला, त्वचा पर चिपकता हुआ धुआँ।
यही वह दूरी है—जो हम महसूस करते हैं vs. जो AQI दिखाता है।
AQI हमें प्रदूषण की एक “सरल भाषा” देता है, लेकिन Delhi की उलझी हुई हवा इसकी पकड़ से बाहर है। कैसे बनाया जाता है, कहाँ मापा जाता है, और क्या-क्या इसमें शामिल नहीं है—ये सब मिलकर असल खतरे को छुपा देते हैं। खासकर सर्दियों में, जब स्मॉग ज़मीन पर बैठ जाता है, यह अंतर और बड़ा हो जाता है।
AQI की सीमाएँ: गणना में क्या छूट जाता है
AQI का ढाँचा: ज़हरीली हवा की अधूरी कहानी
AQI कई प्रदूषकों का एक ही नंबर बनाता है—PM2.5, ओज़ोन, NO₂ आदि। लेकिन यह सादगी Delhi की हवा की जटिलता को अनदेखा कर देती है।
PM2.5 को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह भयानक असर डालता है।
लेकिन ओज़ोन—जो गर्म दिनों और ट्रैफिक के समय बढ़ता है—अक्सर AQI को बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ाता, जबकि यह तेज़ी से सांस की नलियों में जलन पैदा करता है।
धातुएँ जैसे लेड, आर्सेनिक—जो फैक्ट्रियों और पुराने ईंधनों से निकलती हैं—AQI में शामिल भी नहीं या बहुत कम वज़न देती हैं। जबकि ये बच्चों और दिल के लिए बेहद ख़तरनाक हैं।
एवरेजिंग और टाइम-लैग की समस्या
AQI अक्सर 24-घंटे का औसत दिखाता है।
इससे क्या होता है?
अचानक हुए स्पाइक—जैसे पराली जलने से कुछ घंटे में हुए उछाल—औसत में छिप जाते हैं।
दिवाली के पटाखों से 30 मिनट में जो धुआँ दोगुना हो जाता है, वह घंटे बाद दिखता है।
कई बार रियल-टाइम सेंसर AQI 1000+ दिखाते हैं, जबकि सरकारी औसत 500 ही दिखाता है। यानी सबसे ख़राब हवा आप तब साँस में लेते हैं जब ऐप शांत बैठा होता है।

जहरीले तत्वों की जानकारी का अभाव
Delhi की हवा में VOCs, ब्लैक कार्बन, भारी धातुएँ भरपूर हैं।
पर:
सामान्य AQI VOCs शामिल नहीं करता।
ब्लैक कार्बन—जो डीज़ल से आता है और फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित करता है—AQI में नहीं आता।
यह ऐसा है जैसे खाने की रेटिंग सिर्फ कैलोरी बताए, शुगर या एलर्जी की जानकारी न दे।
स्थान-आधारित असंगतियाँ: पूरी दिल्ली एक जैसी नहीं
“औसत” में छिपी सच्चाई
पूरी Delhi के लिए एक AQI नंबर—30 मिलियन लोगों का अनुभव—कभी भी सटीक नहीं हो सकता।
ITO जैसे ट्रैफिक भारी इलाकों में AQI, इंडिया गेट की तुलना में 200 पॉइंट अधिक पाया गया है।
औसत इन फरकों को मिटा देता है, और आपको लगता है कि हवा “इतनी भी बुरी नहीं”।
माइक्रो-लोकेशन का अंतर
कई मॉनिटर छतों पर लगे हैं, जहाँ हवा थोड़ी साफ़ होती है।
नीचे सड़क पर—जहाँ हम चलते हैं—NO₂ और CO कई गुना ज़्यादा है।
जैसे दक्षिण Delhi में AQI 300 हो सकता है, पर पूर्वी दिल्ली की मार्केट में 450।
मॉनिटरिंग स्टेशनों की कमी और गलत लोकेशन
Delhi और NCR में लगभग 40 सरकारी स्टेशन—पर:
कई खुले स्थानों या दूतावासों में हैं जहाँ हवा स्वाभाविक रूप से बेहतर है।
भीड़भाड़, स्लम, इंडस्ट्रियल बेल्ट—यहाँ स्टेशन कम हैं।
2024 की एक ऑडिट में पाया गया कि 20% स्टेशन बहुत ऊँचे होने के कारण हवा कम प्रदूषित दिखाते हैं।

इनडोर एयर क्वालिटी: AQI का अनदेखा मोर्चा
हम 80% समय घर या ऑफिस में बिताते हैं—लेकिन AQI बाहर की हवा दिखाता है।
Delhi में बाहर की स्मॉग घर में घुस आता है।
पुराने मकानों की सीलिंग खराब होती है।
लकड़ी/केरोसिन से खाना बनाने वालों का PM2.5 और बढ़ता है।
कई बार घर की हवा बाहरी हवा से 50% ज्यादा खराब होती है।
लेकिन AQI हमें इसकी कोई चेतावनी नहीं देता।
PM2.5 के परे: रासायनिक संरचना का खतरा
Delhi स्मॉग की केमिस्ट्री
AQI सिर्फ “मास” मापता है, “ज़हर” नहीं।
Delhi की हवा में:
प्राइमरी पार्टिकल (वाहनों से)
सेकेंडरी एरोसोल (सूरज की रोशनी से बनने वाले, और भी खतरनाक)
सर्दियों में ये मिलकर एक ज़हरीला कोहरा बनाते हैं, और AQI सिर्फ नंबर दिखाता है—असर नहीं।
हवा का ठहराव और इन्वर्ज़न
Delhi की भूगोल और सर्दियों की इन्वर्ज़न हवा को ज़मीन से उठने नहीं देती।
इससे:
प्रदूषक जमीन पर अटक जाते हैं
सुबहें सबसे जहरीली होती हैं
AQI इसे समझ नहीं पाता कि “किस समय” हवा सबसे खराब है।

हेल्थ पर असर: महसूस किया दर्द बनाम दिखा हुआ नंबर
सब्जेक्टिव अनुभव क्यों अधिक ख़राब लगता है
महीनों की एक्सपोज़र से शरीर संवेदनशील हो जाता है।
320 AQI भी कभी-कभी 500 जैसा महसूस होता है।
Delhi वासी बदलाव जल्दी पकड़ लेते हैं क्योंकि शरीर पहले से थका हुआ है।
क्रॉनिक एक्सपोज़र से बढ़ी संवेदनशीलता
बच्चे और बुज़ुर्ग AQI 300 से पहले ही बीमार होने लगते हैं।
लंबे समय तक राहत नहीं मिल पाने की वजह से मामूली उछाल भी भारी लगता है।
गंध, जलन और अन्य संकेत
कई ऐसे प्रदूषक—जैसे अमोनिया, VOCs—AQI में नहीं आते लेकिन:
आँखों में जलन
गले में खराश
धुएँ की गंध
तुरंत महसूस होते हैं।
ये शरीर के रियल-टाइम सेंसर हैं।

सिर्फ एक संख्या पर भरोसा मत कीजिए
AQI शुरुआत है, पूरी कहानी नहीं।
उसके एवरेज, सीमित स्थान, और PM2.5 फोकस के कारण Delhi की असली हवा की क्रूरता छिप जाती है।
क्या कर सकते हैं?
घर में HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें
सिर्फ शहर का नहीं, अपने इलाके का AQI देखें
सुबह शुरुआती घंटों में बाहर जाने से बचें—इन्वर्ज़न सबसे ज्यादा तब होता है
हवा तेज़ हो तब वॉक/जॉग करें
बच्चों/बुजुर्गों को स्पाइक के समय बाहर न भेजें
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