‘विकसित भारत’ का खाका: आत्मनिर्भरता के माध्यम से राष्ट्रीय विकास
एक ऐसे भारत की कल्पना कीजिए जो वैश्विक मंच पर सिर ऊँचा करके खड़ा हो—जो केवल विचारों को अपनाए नहीं, बल्कि स्वयं नए विचार और समाधान गढ़े। PM Narendra Modi ने स्पष्ट किया है कि ‘विकसित भारत’ का सपना तभी साकार होगा जब देश आत्मनिर्भर बने। ‘आत्मनिर्भर भारत’ का अर्थ दरवाजे बंद करना नहीं, बल्कि अपनी ताकत के दम पर दुनिया के लिए नए अवसर खोलना है।
आज आत्मनिर्भरता का मतलब है—भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहे, लेकिन अपने संसाधनों, कौशल और नवाचार के बल पर। यह आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था से नवाचार-आधारित नेतृत्व की ओर परिवर्तन है। आइए समझते हैं कि यह दृष्टि किन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।
स्तंभ 1: आर्थिक आत्मनिर्भरता और विनिर्माण शक्ति-PM
घरेलू उत्पादन को बढ़ावा
सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाओं ने मोबाइल, फार्मा और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को गति दी है। इन योजनाओं के तहत कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने पर प्रोत्साहन दिया जाता है। इससे निवेश, रोजगार और स्थानीय वैल्यू एडिशन में वृद्धि हुई है।
स्वच्छ ऊर्जा उपकरण—जैसे सोलर पैनल—के निर्माण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान बना रहा है।
MSME: आत्मनिर्भर भारत की रीढ़
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) करोड़ों लोगों को रोजगार देते हैं। आसान ऋण, डिजिटल साधनों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए इन इकाइयों को सशक्त किया जा रहा है।

स्थानीय क्लस्टर मॉडल से लागत में कमी
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बाजार तक पहुंच
सरकारी पोर्टल्स के माध्यम से त्वरित भुगतान समाधान
MSME का सशक्तिकरण अर्थव्यवस्था को स्थिर और समावेशी बनाता है।
महत्वपूर्ण आयात पर निर्भरता में कमी
रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवा निर्माण में भारत आयात कम करने की दिशा में अग्रसर है। स्वदेशी रक्षा उपकरणों और ड्रोन तकनीक के विकास से आयात बिल में कमी आई है।
अनुसंधान एवं विकास (R&D) में बढ़ते निवेश से नवाचार को बल मिल रहा है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
स्तंभ 2: तकनीकी संप्रभुता और डिजिटल भारत-PM
स्वदेशी नवाचार की ताकत
भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। Indian Space Research Organisation (ISRO) के मिशनों ने यह साबित किया है कि भारत कम लागत में वैश्विक स्तर की तकनीक विकसित कर सकता है।
सेमीकंडक्टर निर्माण, सौर ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश से तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिल रही है।

डिजिटल अवसंरचना और डेटा सुरक्षा-PM
Unified Payments Interface (UPI) ने डिजिटल भुगतान में क्रांति ला दी है। अरबों लेन-देन भारतीय तकनीक से संभव हो रहे हैं।
Aadhaar ने पहचान सत्यापन को सरल और सुरक्षित बनाया है। डेटा संप्रभुता के लिए स्थानीय सर्वर और साइबर सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है।
स्टार्टअप संस्कृति का विस्तार
भारत विश्व में तीसरे स्थान पर सबसे अधिक स्टार्टअप वाला देश है। ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के तहत युवाओं को वित्तीय और संरचनात्मक सहयोग मिल रहा है।
इनक्यूबेशन केंद्र
कर में छूट
नवाचार के लिए अनुदान
यह उद्यमशीलता भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
स्तंभ 3: कृषि लचीलापन और खाद्य सुरक्षा-PM
आधुनिक कृषि तकनीक
एग्रीटेक ड्रोन, सटीक सिंचाई और बेहतर भंडारण सुविधाओं से कृषि उत्पादन में वृद्धि हो रही है। फसल कटाई के बाद होने वाली बर्बादी में कमी आई है, जिससे किसानों की आय बढ़ रही है।
मूल्य संवर्धन और निर्यात
कच्चे कृषि उत्पादों की बजाय प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात पर जोर दिया जा रहा है। फूड प्रोसेसिंग पार्क और GI टैग जैसी पहलों से भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है।

बीज सुरक्षा और टिकाऊ खेती
स्वदेशी बीज विकास कार्यक्रम और जैविक खेती को बढ़ावा देकर आयातित उर्वरकों पर निर्भरता घटाई जा रही है। यह खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
स्तंभ 4: मानव पूंजी और कौशल विकास-PM
नई शिक्षा नीति और राष्ट्रीय लक्ष्य
National Education Policy 2020 शिक्षा को कौशल और नवाचार से जोड़ती है। व्यावसायिक शिक्षा और लचीले पाठ्यक्रम युवाओं को बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार कर रहे हैं।
अनुसंधान और उच्च शिक्षा
Indian Institute of Science (IISc) और IIT जैसे संस्थान वैश्विक स्तर पर शोध में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उद्योग–अकादमिक साझेदारी से नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
स्किल इंडिया मिशन
कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों युवाओं को एआई, हरित ऊर्जा और आधुनिक विनिर्माण में प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहा है।
आत्मनिर्भरता से वैश्विक नेतृत्व तक-PM
‘विकसित भारत’ का मार्ग आत्मनिर्भरता से होकर गुजरता है। मजबूत अर्थव्यवस्था, तकनीकी संप्रभुता, सुरक्षित कृषि और कुशल मानव संसाधन—ये सभी मिलकर एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण करते हैं।
जब नीति, नवाचार और नागरिक सहभागिता एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी भारत सच्चे अर्थों में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।
अब समय है कि हर नागरिक इस परिवर्तन का हिस्सा बने—कौशल विकसित करे, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दे और नवाचार को अपनाए। यही आत्मनिर्भर भारत की सच्ची पहचान है, और यही विकसित भारत की नींव।
Kerala महिला कांग्रेस की नेता आर रेशमी भाजपा में शामिल हुईं
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