Crackers

Crackers के बिना दिवाली अधूरी लगती है: दिल्ली CM केजरीवाल के बयान से छिड़ी बहस

दिवाली की रातें दीपों की रौशनी से जगमगाती हैं और Crackers की गूंज में खुशी गूंजती है। पटाखों की आवाज़ जैसे देवताओं की हँसी—जो बुराई पर अच्छाई की जीत की कहानी दोहराती है। लेकिन इस बार, वही धमाके विवाद की वजह बन गए।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक सीधी सी बात कह दी:
“Crackers के बिना दिवाली अधूरी लगती है।”
बस फिर क्या था, सोशल मीडिया पर जैसे चिंगारी लग गई। लोग दो खेमों में बंट गए—कुछ ने परंपरा का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे प्रदूषण के मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना बताया। नेताओं से लेकर आम जनता तक, सभी इस बहस में कूद पड़े।

आख़िर क्यों एक ट्वीट इतना बड़ा मुद्दा बन गया? चलिए, समझते हैं।

CM के बयान का संदर्भ और पृष्ठभूमि

अरविंद केजरीवाल का यह बयान दिवाली 2023 से ठीक पहले आया था। उन्होंने ट्वीट कर लोगों से त्यौहार को पूरे जोश के साथ मनाने की बात कही। यह उस समय आया जब दिल्ली में पटाखों पर सख्त प्रतिबंध लागू थे ताकि प्रदूषण पर काबू पाया जा सके।

हर साल सर्दियों में दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है, और दिवाली की रात इसे और खराब कर देती है।

बयान की पूरी जानकारी

केजरीवाल ने ट्वीट किया:
“Crackers के बिना दिवाली अधूरी लगती है। चलिए पूरी ऊर्जा से दिवाली मनाएं, लेकिन नियमों का पालन भी करें।”

उनका मकसद था—परंपरा भी बनी रहे और सुरक्षा भी। लेकिन कई लोगों ने इसे नियमों के खिलाफ एक परोक्ष समर्थन के रूप में देखा।

दिवाली और Crackers की सांस्कृतिक जड़ें

Crackers का संबंध रामायण से जोड़ा जाता है। जब भगवान राम अयोध्या लौटे थे, तो लोगों ने दीप जलाए और Crackers फोड़े—अंधकार और बुराई को भगाने के लिए।

हर साल, परिवार एक साथ मिठाई खाते हैं, कहानियाँ सुनते हैं, और बच्चे “अनार” जलाते हैं। यह केवल शोर नहीं, बल्कि आस्था और परिवार की साझा धड़कन है।

बयान पर शुरुआती प्रतिक्रियाएं

खबरों में यह बयान तेजी से फैल गया। बीजेपी नेताओं ने इसे “गैर-जिम्मेदाराना” कहा, पर्यावरणविदों ने स्वास्थ्य की चिंता जताई। सड़कों पर कुछ लोगों ने इसे सही ठहराया, तो कुछ ने बच्चों की खांसी और धुएँ की बात कही।

संस्कृति बनाम पर्यावरण की चिंता

दिवाली रौशनी भी है और धुआं भी। एक ओर परंपरा है, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य का मुद्दा।
हर साल दिवाली की रात दिल्ली का AQI 400 के पार चला जाता है—यह ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।

धार्मिक दृष्टिकोण से Crackers की भूमिका

Crackers ‘विजय’ का प्रतीक माने जाते हैं—ऐसा कहा जाता है कि इनकी गूंज से राक्षस डर जाते थे। आज भी मंदिरों में आरती के समय पटाखे फोड़े जाते हैं। बच्चों की आँखों में चमक होती है जब वे अनार या चकरी जलाते हैं। यह त्योहार का अहम हिस्सा है।

Diwali 2022: आतिशबाजी के बिना अधूरा है दीप पर्व का रंग, पहले था बम का शोर  अब फुलझड़ी का जोर - Diwali 2022 celebration history and importance of  firecrackers on diwali in gorakhpur

प्रदूषण और स्वास्थ्य पर प्रभाव

Crackers से PM2.5 जैसे खतरनाक कण हवा में फैलते हैं। इससे सांस की बीमारियाँ, आँखों में जलन और अस्थमा बढ़ जाता है।
AIIMS के डॉ. संजय राज कहते हैं—“थोड़ा धमाका, लंबा नुकसान”
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ ‘ग्रीन Crackers’ की इजाज़त दी है, वो भी 2 घंटे के लिए।

राजनीतिक बहस और प्रतिक्रियाएं

इस बयान ने सियासी हवा को भी गर्मा दिया। दिल्ली में चुनाव नज़दीक हैं और हवा की गुणवत्ता एक बड़ा मुद्दा है।

AAP की साफ हवा योजनाओं के बीच यह बयान कुछ असहज सा लगा। विपक्ष ने इस पर हमला बोलते हुए इसे चुनावी ‘गिमिक’ बताया।

विपक्ष की आलोचना

BJP नेता वीरेंद्र सचदेवा ने कहा,
“केजरीवाल खुद ही ‘Odd-Even’ चलाते हैं और अब Crackers का समर्थन कर रहे हैं।”

कांग्रेस ने भी बयान की आलोचना करते हुए सख्त प्रतिबंधों की मांग की।

सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया

ट्विटर पर #DiwaliWithoutCrackers ट्रेंड करने लगा।
कुछ लोगों ने केजरीवाल के मीम्स बनाए—हाथ में फुलझड़ी लिए।
दूसरे लोगों ने दिल्ली की धुंध की तस्वीरें पोस्ट कीं और बदलाव की अपील की।

एक ऑनलाइन पोल में 60% लोग परंपरा के पक्ष में थे, बाक़ी ने साफ हवा को प्राथमिकता दी।

AAP सरकार की स्थिति

AAP लंबे समय से “इको-फ्रेंडली दिवाली” अभियान चला रही है।
बयान के बाद भी सरकार ने स्पष्ट किया—सिर्फ ग्रीन पटाखे और नियमों के अनुसार
पेड़ लगाना और जागरूकता अभियान उनकी नीति का हिस्सा है।

दिवाली बिना Crackers के कैसे मनाएं?

बिना प्रदूषण के दिवाली भी उतनी ही रोशन हो सकती है।
छोटे-छोटे बदलाव त्योहार को नया रंग दे सकते हैं।

Video of crackers bursting in Delhi during diwali viral on social media  दिल्ली में पटाखे फोड़ तोड़े नियम, उल्लंघन का वीडियो साझा करते रहे लोग, Ncr  Hindi News - Hindustan

पर्यावरण के अनुकूल विकल्प

  • ग्रीन Crackers—30% कम प्रदूषण, कम आवाज़ और बारीयम जैसे खतरनाक रसायनों की कमी।

  • LED लाइट्स, लेज़र शो, दीयों की सजावट

  • रंगोली, मिठाई बाँटना, लोक गीतों पर नृत्य

ये सब दिवाली की रौनक को बरकरार रखते हैं—पर हवा को नहीं बिगाड़ते।

घर पर सुरक्षित, स्वच्छ दिवाली के टिप्स

  • सरसों के तेल से मिट्टी के दीये जलाएं

  • फूलों और चावल से रंगोली बनाएं

  • परिवार के साथ लोक संगीत पर डांस करें

  • ई-कार्ड्स या हस्तनिर्मित उपहार दें

  • लक्ष्मी माता के स्वागत में पौधा लगाएं

  • रामायण की कहानियाँ सुनें

  • घर पर मिठाइयाँ बनाएं

इनसे दिवाली की ऊर्जा बनी रहती है—बिना धुएँ के।

India Today investigation: Wrong fireworks in wrong hands threaten to  blacken Delhi skies once again - India Today

प्रेरणादायक कहानियाँ

पुणे में 2022 में “नो Crackers दिवाली” चलाई गई—स्कूलों ने नाटक और लाइट शो किए। AQI नियंत्रित रहा।
बेंगलुरु में संगीत उत्सव हुए—बच्चों को मज़ा आया, माता-पिता ने राहत की सांस ली।

केजरीवाल का बयान परंपरा और पर्यावरण के बीच चिंगारी बना।
दिवाली खुशियों का त्यौहार है, लेकिन जहरीली हवा इन खुशियों को चुरा सकती है।

जरूरत है—परंपराओं को आज के समय के अनुसार ढालने की।
राजनीति बहस ला सकती है, लेकिन समाधान सामूहिक प्रयास से ही आएगा।

इस दिवाली, हरियाली चुनें।

  • दीया जलाइए, पटाखा नहीं।

  • अपनी ग्रीन दिवाली की कहानी साझा कीजिए।

  • त्योहार को प्रदूषण नहीं, प्रेम से रोशन कीजिए।

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