नई दिल्ली, 15 मार्च प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों
में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों के बेटे-बेटियों को टिकट ना दिए जाने का फैसला सोच समझकर लिया
गया था क्योंकि वंशवाद की राजनीति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और पार्टी इसके खिलाफ है।
प्रधानमंत्री ने यह
बात भाजपा संसदीय दल की बैठक में कही और यह जानकारी सूत्रों ने दी।
बैठक में चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी करने पर प्रधानमंत्री मोदी और
भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा का जोरदार अभिनंदन भी किया गया।
हाल में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा
चुनावों में भाजपा ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा की सत्ता में फिर से वापसी की।
इस जीत की पृष्टभूमि में हुए संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने पांच राज्यों के सांसदों को एक
काम भी सौंपा और कहा कि उन्हें अपने संसदीय क्षेत्रों की कम से कम 100 बूथ की पहचान करनी चाहिए जहां
भाजपा के पक्ष में अपेक्षाकृत कम मत पड़े हैं और वे इसके कारणों की भी पड़ताल करें।
सूत्रों ने बताया कि मोदी ने बैठक में सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि वंशवाद की राजनीति लोकतंत्र के लिए
खतरनाक है, इसलिए पार्टी के सांसदों को वंशवाद की राजनीति के खिलाफ लड़ना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी
राजनीति पर अंकुश लगाने के लिए भाजपा ने अपने संगठन के भीतर ही एक कोशिश आरंभ की है।
सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने कहा कि यदि विधानसभा चुनावों में किसी सांसद के बेटे या बेटी को टिकट नहीं मिला,
तो यह उनकी ही वजह से है। भाजपा के कई सांसद अपने बेटे व बेटियों के लिए टिकट चाहते थे।
बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत में यह संसदीय दल की पहली बैठक थी। इसका आयोजन जनपथ स्थिति
आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में हुई।
बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि मोदी ने कहा कि
देश में वंशवाद की राजनीति के खिलाफ एक माहौल है
और इसका सम्मान करते हुए भाजपा ने अपने नेताओं के
परिवार के सदस्यों को टिकट ना देने का फैसला किया था।
जोशी के मुताबिक मोदी ने कहा कि पार्टी के नेताओं ने इस फैसले को शिरोधार्य किया और इसकी सराहना की।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यूक्रेन से भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकाले जाने के अभियान पर मोदी ने कहा कि जब
सरकार अपने लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयासों में लगी थी
तब कुछ नेता इस मामले का राजनीतिकरण कर
रहे थे और बगैर सही जानकारी और आंकड़ों के बयानबाजी कर रहे

