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रांची, 23 सितंबर )। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर
दास ने कहा कि झारखंड में पांच लाख नौकरियों के वादे के साथ सत्ता में आयी हेमंत सरकार की

वादाखिलाफी के कारण राज्य के युवाओं में सरकार के खिलाफ आक्रोश है।

श्री दास ने शुक्रवार को यहां भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि

परिवार और अपने नजदीकी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए हेमंत सरकार के संरक्षण में पिछले ढाई

वर्ष में झारखंड के जल-जंगल और जमीन और खनिज संपदा की जमकर लूट हुई है। इसका उदहारण
साहेबगंज जैसा एक पिछड़ा जिला है। इस एक जिले से ही ईडी की जांच में लगभग 1400-1500

करोड़ रुपये के अवैध उत्खनन की बात सामने आयी है। इस उत्खनन में मुख्यमंत्री के विधायक
प्रतिनिधि का नाम सबसे आगे है। हेमंत सरकार के इन कारनामों के कारण झारखंड को लोग सरकार

से काफी नाराज हैं। इसी नाराजगी और आक्रोश को दबाने और लोगों की आंखों में धूल झोंकने के

लिए हेमंत सोरेन जी हर रोज नई-नई लोक लुभावनी घोषणाएं कर रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने 1932
के खतियान और आरक्षण नीति को घोषणा भी की है।

श्री दास ने कहा कि 15 नवंबर 2000 में झारखंड राज्य का गठन हुआ। राज्य गठन के बाद उस
समय सरकार ने अधिसूचना संख्या 3389, दिनांक 29 सितंबर 2001 द्वारा एकीकृत बिहार के

परिपत्र संख्या 806, दिनांक 03 मार्च 1982 को अंगीकृत किया गया, जिसमें जिला के आधार पर
स्थानीय व्यक्ति की पहचान उनके नाम, जमीन, वासगीत, रिकार्ड ऑफ राइट्स के आधार पर की

गयी थी। इसी संदर्भ में माननीय झारखंड उच्च न्यायालय ने दो वाद यथा डब्ल्यूपी (पीआईएल)
4050/02 एवं वाद संख्या डब्ल्यूपी पीआइएल 2019/02 के मामले में 27 नवंबर 2002 को पारित
अपने विस्तृत आदेश के जरिए स्थानीयता को परिभाषित किए जाने संबंधी संकल्प को गलत बताया

था और स्थानीयता को परिभाषित करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए थे। उक्त आदेश के
आलोक में अनेक सरकारें आईं, कमेटियां बनाई गई, लेकिन स्थानीय व्यक्ति को परिभाषित करने

और उसकी पहचान के मापदंड को निर्धारित करने का मामला विचाराधीन था।

श्री दास ने कहा कि जब हमारी भाजपा की सरकार आई तब हमने दिनांक 07 अप्रैल 2015 को
विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ सर्वदलीय बैठक आहूत की, सामाजिक संगठनों से परामर्श लिया

तथा झारखंड के बुद्धिजीवियों के साथ विचार विमर्श किया। झारखंड उच्च न्यायालय के द्वारा दिए
गए सुझाव को ध्यान में रखते हुए 7 अप्रैल 2016 को स्थानीयता को परिभाषित करते हुए, उस नीति

को नियोजन की नीति से जोड़कर भारी संख्या में झारखंड के बच्चे बच्चियों को नियुक्ति दी गई।

हमारी सरकार ने स्थानीय निवासियों की परिभाषा को इस तरह से परिभाषित किया था कि किसी भी
वर्ग को किसी भी प्रकार के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीयता को परिभाषित करने
संबंधी निर्णय लिया है और इनको भी पता है कि इसे लागू करना न्यायालय की अवमानना होगी।

इसलिए इनके द्वारा इस नीति को लागू नहीं किया जाएगा, ऐसी योजना बनाई गई है। स्वयं

मुख्यमंत्री जी 23 मार्च 2022 को इसकी वैधानिकता के बारे में राज्य की सबसे बड़ी पंचायत
विधानसभा में घोषणा कर चुके हैं।

श्री दास ने कहा कि इनके द्वारा यह कहा गया है कि 1932 वाली स्थानीयता की नीति को संविधान
की 9वीं अनुसूची में सम्मिलित होने के उपरांत लागू किया जाएगा, जो कभी भी संभव नहीं हो
पाएगा।