भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की यमन में फांसी की सजा और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
केरल की रहने वाली 38 वर्षीय नर्स निमिषा प्रिया यमन में हत्या के आरोप में फांसी की सजा का सामना कर रही हैं। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि मानवीय और राजनयिक दृष्टिकोण से भी बेहद संवेदनशील बन गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
- निमिषा प्रिया वर्ष 2008 में नर्स के रूप में काम करने यमन गई थीं।
- Yemen के कानून के अनुसार, विदेशी नागरिक को स्थानीय साझेदार के साथ ही क्लिनिक खोलने की अनुमति होती है।
- उन्होंने यमनी नागरिक तलाल अब्दो मेहदी को अपना साझेदार बनाया।
- आरोप है कि मेहदी ने निमिषा के साथ धोखाधड़ी की, उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया और उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया।
- 2017 में निमिषा ने मेहदी को बेहोश करने की कोशिश की ताकि वह अपना पासपोर्ट वापस ले सकें, लेकिन ओवरडोज से उसकी मौत हो गई।
- शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े कर पानी की टंकी में फेंक दिया गया।

Yemen में कानूनी कार्यवाही
- निमिषा को 2020 में Yemen की अदालत ने मौत की सजा सुनाई।
- 2023 में Yemen की सर्वोच्च अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी।
- उन्होंने Yemen के राष्ट्रपति से दया याचिका भी दायर की, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।
- Yemen में शरिया कानून लागू है, जिसके तहत मृतक के परिवार की सहमति से ब्लड मनी देकर क्षमा प्राप्त की जा सकती है।
ब्लड मनी का प्रयास
- निमिषा के परिवार और सामाजिक संगठनों ने मृतक के परिवार को ₹8.5 करोड़ ($1 मिलियन) की ब्लड मनी देने की पेशकश की है।
- कई सामाजिक कार्यकर्ता, नेता और कारोबारी जैसे बॉबी चेम्मनुर ने धन जुटाने में योगदान दिया है।
- लेकिन मृतक के परिवार ने ब्लड मनी लेने से इनकार कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
- 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई जिसमें केंद्र सरकार से राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की गई।
- जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई की।
- भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि Yemen की संवेदनशील स्थिति के कारण भारत सरकार की भूमिका सीमित है।
- सरकार ने Yemen सरकार से फांसी की तारीख स्थगित करने का अनुरोध किया है।

राजनयिक चुनौतियाँ
- Yemen में चल रहे गृहयुद्ध और हूथी विद्रोहियों के नियंत्रण के कारण भारत के राजनयिक प्रयास बाधित हो रहे हैं।
- भारत का हूथी प्रशासन से कोई औपचारिक संबंध नहीं है, जिससे बातचीत मुश्किल हो गई है।
- अब उम्मीद इस बात पर टिकी है कि कोई स्थानीय धार्मिक या राजनीतिक नेता मृतक के परिवार को ब्लड मनी स्वीकार करने के लिए मना सके।
जन समर्थन और अपीलें
- केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
- विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी केंद्र सरकार से कार्रवाई की अपील की है।
- Save Nimisha Priya Action Council नामक संगठन इस मुहिम में सक्रिय है।
क्या बच पाएंगी निमिषा?
- फांसी की तारीख 16 जुलाई तय की गई है।
- यदि ब्लड मनी स्वीकार नहीं की जाती और Yemen सरकार फांसी स्थगित नहीं करती, तो निमिषा को बचाना बेहद कठिन होगा।
- सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और भारत सरकार के प्रयासों से अंतिम क्षणों में कोई चमत्कार ही उन्हें बचा सकता है।
यह मामला न केवल एक भारतीय नागरिक की जान बचाने का है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और राजनयिक संवेदनशीलता की परीक्षा भी है।
अगर आप चाहें, तो मैं इस विषय पर एक भावनात्मक अपील या जन समर्थन अभियान का ड्राफ्ट भी तैयार कर सकता हूँ।
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