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नई दिल्ली, 11 जून  किसान इस साल अपनी गेहूं की फसल सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य

(एमएसपी) पर बेचने के बजाय अधिक दाम पर इस अनाज की बिक्री निजी व्यापारियों को करके लगभग 5,994
करोड़ रुपये अतिरिक्त धन कमाए होंगे।

एक बयान में, मंत्रालय ने कहा, ‘‘देश भर में किसानों को गेहूं के ऊंचे भाव से लाभ हुआ क्योंकि ज्यादातर किसानों
ने अपनी उपज को एमएसपी पर बेचने के बजाय कहीं अधिक दर पर निजी व्यापारियों को बेचा।’’ मंत्रालय ने कहा

कि किसानों ने कथित तौर पर अपनी उपज 2,150 रुपये प्रति क्विंटल की औसत दर से बेची। एमएसपी मूल्य की
तुलना में खुले बाजार में बेचने से किसानों की अधिक कमाई हुई।

बयान में कहा गया है, ‘‘… 444 लाख टन की अनुमानित खरीद की मात्रा के हिसाब से, किसानों ने औसतन 2,150
रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचकर 95,460 करोड़ रुपये कमाये होंगे। जबकि 2,015 रुपये प्रति क्विन्टल के

एमएसपी पर बेचने से उन्हें सिर्फ 89,466 करोड़ रुपये मिला होता।

इस प्रकार किसानों को एमएसपी की तुलना में
कुल मिलाकर 5,994 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ हुआ होगा।’’

 

मंत्रालय ने कहा, ‘‘सार्वजनिक खरीद में गिरावट का कारण निजी व्यापारियों द्वारा गेहूं की काफी अधिक खरीद है।

इसका कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में मौजूदा वैश्विक स्थितियों की वजह से मांग-आपूर्ति में अंतर के से गेहूं की
कीमत का बढ़ना है।’’