मथुरा, 02 अक्टूबर पराली जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए
मथुरा में गौशालाओं, छुट्टा पशु आश्रय गृहों और अन्य किसी धर्मार्थ संस्था को पराली दान करने
वाले किसानों को सम्मानित किया जाएगा। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने रविवार को यह जानकारी
दी।
उन्होंने बताया कि प्रशासन ने गौशालाओं, आवारा पशु आश्रय गृहों या किसी अन्य धर्मार्थ संस्थान को
अपनी अतिरिक्त पराली दान करने वाले किसानों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है।
खरे ने यह भी कहा कि पराली जलाने वाले किसानों को दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा,
क्योंकि पराली जलाने से न सिर्फ पर्यावरण प्रदूषित होता है,
बल्कि इससे मीथेन, सल्फर डाइऑक्साइड
और अन्य जहरीली गैसें भी निकलती हैं,
जिससे त्वचा रोग, हृदय की समस्या और कैंसर जैसे गंभीर
रोगों का जोखिम भी बढ़ता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि मथुरा में किसानों को पराली के पोषक तत्वों के बारे में बताने के लिए
एक जागरूकता कार्यक्रम 26 सितंबर से शुरू किया गया है।
किसान खुद भी इस बारे में अन्य
किसानों को शिक्षित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पराली की आवाजाही पर पैनी नजर रखने के लिए पंचायत सचिवों और लेखपालों को
किसानों की मदद से अपने क्षेत्र में धान कटाई का कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

