सेवा तीर्थ का उद्घाटन: सेवा और संस्कार का संगम-President
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा तट के पास लगभग 50 एकड़ में फैला सेवा तीर्थ परिसर फरवरी 2026 की शुरुआत में जनता के लिए खोला गया। उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने इसे “समर्पण का मंदिर” बताया।
यह परिसर देश में सेवा भावना को संस्थागत रूप देने का प्रयास है। यहां सामाजिक कार्यों, स्वतंत्रता संग्राम और जनसेवा से जुड़े महान व्यक्तित्वों पर आधारित प्रदर्शनी, कार्यशालाएं और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सेवा तीर्थ की मुख्य विशेषताएं
इंटरैक्टिव प्रदर्शनी – सामाजिक सुधार और जनसेवा से जुड़े प्रेरक प्रसंग
विशाल पुस्तकालय – सामुदायिक विकास पर 10,000 से अधिक पुस्तकें
कार्यशाला क्षेत्र – प्राथमिक चिकित्सा, शिक्षा सहयोग और ग्रामीण विकास जैसे प्रशिक्षण
सौर ऊर्जा प्रणाली – पर्यावरण-अनुकूल संचालन
सुगम पहुंच (Accessibility) – रैंप और ब्रेल संकेतों की व्यवस्था
यह परिसर केवल एक इमारत नहीं, बल्कि नागरिक कर्तव्य और राष्ट्रनिर्माण का जीवंत पाठशाला बनने की दिशा में कदम है।
पूर्व President कोविंद की उपस्थिति का प्रतीकात्मक महत्व
पूर्व President राम नाथ कोविंद की मौजूदगी ने इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। 2017 से 2022 तक देश के राष्ट्रपति रहे कोविंद का यह दौरा लोकतांत्रिक संस्थाओं की निरंतरता और आपसी सम्मान का संदेश देता है।

संस्थागत निरंतरता और परंपरा
भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती इस बात में भी निहित है कि पद बदलने के बाद भी नेताओं के बीच संवाद और सहयोग बना रहता है। कोविंद का यह कदम दर्शाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है।
यह दृश्य मानो दो युगों के बीच एक सेतु जैसा था—एक ओर पूर्व राष्ट्रपति का अनुभव, दूसरी ओर वर्तमान नेतृत्व की सक्रिय नीति-निर्माण प्रक्रिया।
कोविंद और सेवा-आधारित एजेंडा
अपने कार्यकाल के दौरान कोविंद ने ग्रामीण भारत, दलित समुदायों और शिक्षा के मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया। सेवा तीर्थ की अवधारणा—जनसेवा को जीवन का केंद्र बनाना—उनके सार्वजनिक जीवन की प्राथमिकताओं से मेल खाती है।
इसलिए उनका दौरा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि वैचारिक सामंजस्य का संकेत भी है।
प्रधानमंत्री मोदी और कोविंद की वार्ता: संभावित विषय
दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं हुए, लेकिन संदर्भ के आधार पर कुछ संभावित विषय सामने आते हैं:
1. राष्ट्रीय विकास की दिशा
ग्रामीण विकास, डिजिटल सशक्तिकरण और सामाजिक योजनाओं की प्रगति पर चर्चा।
2. भविष्य की नीतियां
युवा आबादी (जो देश की लगभग 65% है) के लिए कौशल विकास, रोजगार और शिक्षा पर विचार।

3. सामाजिक समरसता
विविधता भरे भारत में एकता और सहयोग की भावना को सुदृढ़ करने की रणनीति।
दोनों के बीच की आत्मीयता तस्वीरों में भी झलकी—यह केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि आपसी विश्वास का प्रदर्शन था।
व्यापक प्रभाव: जनविश्वास और राष्ट्रीय संदेश
ऐसी मुलाकातें जनता के मन में संस्थाओं के प्रति विश्वास को मजबूत करती हैं। जब शीर्ष नेतृत्व सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाता है, तो यह संदेश जाता है कि लोकतंत्र केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि निरंतर सहयोग की प्रक्रिया है।
राष्ट्रीय एकता का संदेश
राजनीतिक मतभेदों से ऊपर राष्ट्रहित
लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान
पूर्व और वर्तमान नेतृत्व का समन्वय
यह दृश्य एक टीम मीटिंग जैसा प्रतीत हुआ, जहां लक्ष्य स्पष्ट है—राष्ट्र की प्रगति।
सेवा और भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्षण
सेवा तीर्थ में हुई यह मुलाकात केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी। यह सेवा, समर्पण और लोकतांत्रिक निरंतरता का संगम थी।
पूर्व President राम नाथ कोविंद की उपस्थिति ने इस पहल को ऐतिहासिक संदर्भ दिया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि ने इसे भविष्य की ओर अग्रसर किया।
सेवा तीर्थ अब केवल एक परिसर नहीं, बल्कि एक विचार है—कि राष्ट्रनिर्माण केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
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