Delhi विधानसभा में हंगामा: शीतकालीन सत्र के दौरान चार आप विधायक निलंबित
इस सर्दी Delhi विधानसभा जंग का मैदान बन गई। सदन के भीतर शोर-शराबा गूंज उठा और आम आदमी पार्टी (आप) के चार विधायकों को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया। यह टकराव राजधानी की राजनीति में गहरी दरारों को उजागर करता है। सवाल उठता है—कानून बनाने की जगह पर ऐसी अराजकता कैसे पैदा हो जाती है?
तनाव एक अहम बहस के दौरान भड़का। विपक्ष ने बजट और फंड से जुड़े मुद्दों पर तीखा विरोध किया। अब सदन में निष्पक्षता और मर्यादा को लेकर बहस छिड़ गई है।
राजधानी में राजनीतिक तूफ़ान
तात्कालिक घटना और विवाद
15 दिसंबर 2025 को Delhi विधानसभा के शीतकालीन सत्र में अफरा-तफरी मच गई। चार आप विधायकों ने स्पीकर के आसन तक पहुंचकर विरोध जताया। उनका आरोप था कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े फंड में देरी हो रही है। स्पीकर ने कई बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन जब वे नहीं माने, तो तत्काल निलंबन का फैसला लिया गया।
यह घटना सत्र के दूसरे सप्ताह के बीच हुई। शीतकालीन सत्र 5 दिसंबर से शुरू हुआ था, जिसका मकसद कई अहम विधेयकों को पारित करना था। हंगामे के चलते वायु गुणवत्ता सुधार पर चर्चा रुक गई। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि आप कठिन सवालों से बचने के लिए नाटक कर रही है।
आप और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव महीनों से जारी है। दिल्ली में सत्ता आप के पास है, जबकि केंद्र में भाजपा। हालिया एमसीडी चुनावों की खींचतान ने आग में घी का काम किया। यह निलंबन उसी टकराव की एक कड़ी माना जा रहा है।
विधायी प्रक्रिया में निलंबन का महत्व
किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को निलंबित करना मामूली बात नहीं है। इससे उसकी आवाज़ अस्थायी रूप से सदन से बाहर हो जाती है। Delhi की राजनीति में यह इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर सवाल उठाता है—क्या मतदाताओं की आवाज़ को यूं दबाया जाना चाहिए?

आलोचकों का कहना है कि ऐसे कदम असहमति को दबाने का ज़रिया बन सकते हैं। आप ने इसे भाजपा की चाल बताया, जबकि सत्तापक्ष का तर्क है कि सदन की गरिमा बनाए रखना ज़रूरी है। यही बहस इस पूरे विवाद के केंद्र में है—विरोध और अव्यवस्था के बीच की रेखा कहाँ खींची जाए?
पृष्ठभूमि: सत्र में हंगामे की वजह बने मुद्दे
शीतकालीन सत्र का मुख्य एजेंडा
इस सत्र में Delhi से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी—
एमसीडी सुधार
कचरा प्रबंधन और सफ़ाई के लिए फंड
प्रदूषण नियंत्रण उपाय, जैसे इलेक्ट्रिक बसें और हरित योजनाएं
नवंबर में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन हंगामे के कारण कई अहम चर्चाएं टल गईं। प्रमुख प्रस्तावों पर मतदान दो दिन आगे बढ़ाना पड़ा, जिससे आम लोगों से जुड़े फैसले देर से हो पाए।
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच पहले से मौजूद टकराव
2025 में आप के विज्ञापन खर्च को लेकर जांच और आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल पहले ही गरम कर दिया था। सड़क पर हुए विरोध-प्रदर्शनों और रैलियों ने भी तनाव बढ़ाया। यही तनाव विधानसभा में फूट पड़ा।
विधानसभा आचरण के नियम
Delhi विधानसभा के नियमों के अनुसार, गंभीर अनुशासनहीनता की स्थिति में स्पीकर को सदस्यों को निलंबित करने का अधिकार है। पहले चेतावनी दी जाती है, फिर मतदान होता है। हालांकि आप का कहना है कि इन नियमों का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया गया।
निलंबन की घटना: क्या हुआ और क्यों
घटनाक्रम
प्रश्नकाल के दौरान प्रदूषण फंड पर सवाल उठे। बहस तेज़ हुई, आवाज़ें ऊंची होने लगीं। चार आप विधायक खड़े होकर स्पीकर के आसन की ओर बढ़े और नारेबाज़ी शुरू कर दी। स्पीकर ने घंटी बजाई और शांति की अपील की, लेकिन स्थिति नहीं संभली। करीब 20 मिनट के हंगामे के बाद उन्हें नाम लेकर निलंबित किया गया। मतदान हुआ और निलंबन तुरंत लागू हो गया।
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आधिकारिक कारण
स्पीकर की ओर से “गंभीर अनुशासनहीनता” का हवाला दिया गया। आरोपों में आदेशों की अवहेलना और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाना शामिल था। सत्तापक्ष ने इसे सदन के सुचारु संचालन के लिए ज़रूरी कदम बताया।
निलंबित विधायक
निलंबित किए गए चारों विधायक अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं और आप की मुखर शैली के लिए जाने जाते हैं। उनके निलंबन ने इस राजनीतिक टकराव को और व्यक्तिगत बना दिया।
प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक असर
आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया
आप नेताओं ने इसे “लोकतंत्र का गला घोंटना” बताया। पार्टी का कहना है कि विधायकों ने जनता से जुड़े असली मुद्दे उठाए थे, जिन्हें दबाया गया। विरोध प्रदर्शन और आगे की रणनीति की घोषणा भी की गई।
भाजपा का पक्ष
भाजपा ने निलंबन का समर्थन करते हुए कहा कि सदन में अनुशासन सर्वोपरि है। उनका तर्क है कि हंगामे से विकास कार्य प्रभावित होते हैं और जनता को नुकसान होता है।
विधायी कामकाज पर असर
चार विधायकों के बाहर होने से बहसों की धार बदली। तकनीकी रूप से कामकाज चलता रहा, लेकिन कई चर्चाएं कमजोर पड़ गईं। सत्र के बचे दिनों में काम निपटाने का दबाव बढ़ गया।
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व्यापक असर: शासन और लोकतंत्र पर सवाल
यह घटना विधायी मर्यादा और जवाबदेही पर बहस छेड़ती है। विरोध का अधिकार और सदन की गरिमा—दोनों के बीच संतुलन कैसे बने, यही असली सवाल है।
भारत की अन्य विधानसभाओं और संसद में भी ऐसे निलंबन होते रहे हैं। ये उदाहरण दिखाते हैं कि अनुशासन जरूरी है, लेकिन उसका इस्तेमाल संतुलित होना चाहिए।
मीडिया और जनता की राय बंटी हुई है। कई लोग इस राजनीतिक ड्रामे से थक चुके हैं और चाहते हैं कि नेता असली समस्याओं पर ध्यान दें।
आगे का रास्ता
चार आप विधायकों का निलंबन प्रदूषण जैसे अहम मुद्दों पर बहस के बीच हुआ और उसने Delhi की राजनीति में तनाव को उजागर कर दिया। इससे सबक यह मिलता है कि संवाद और संयम के बिना लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर पड़ती हैं।
आगे क्या होगा? निलंबन खत्म होने के बाद टकराव बढ़ भी सकता है या बातचीत से माहौल शांत भी हो सकता है। जिम्मेदारी सत्तापक्ष और विपक्ष—दोनों की है कि वे दिल्ली के हितों को प्राथमिकता दें।
एक नागरिक के तौर पर आप भी बेहतर राजनीति की मांग कर सकते हैं—अपने विधायक से सवाल पूछिए, मुद्दों पर आवाज़ उठाइए। शांत और प्रभावी विधानसभा ही स्वच्छ हवा, बेहतर सड़कें और मजबूत लोकतंत्र दे सकती है।

