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कानपुर, 26 जुलाई । ईंट-भट्ठों एवं टाइल्स निर्माताओं की समस्याओं को केन्द्र सरकार के नजर अंदाज
कर रही है।

इससे नाराज कानपुर ब्रिक क्लिन ओनर्स एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि आगामी दो अक्टूबर से
उत्पादन पूरी तरह से बन्द कर देंगे।

एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपी श्रीवास्तव ने मंगलवार को पत्रकारवार्ता में बताया कि लाल ईंटों पर बिना आईटीसी
क्लेम किए एक प्रतिशत से बढ़ा कर छह प्रतिशत तथा आईटीसी क्लेम करने पर पा्ंच प्रतिशत से बढ़ाकर बारह

प्रतिशत एक अप्रैल 2022 से लागू कर दिया, जबकि थ्रेस होल्ड लिमिट 40 लाख से कम करके 20 लाख कर दी
गई। अन्य मैन्यूफैक्चर्स के लिए 40 लाख रुपये दिए हैं।

पर्यावरण के लिए सरकार का कहना है कि जिग-जैग टेक्नोलॉजी लगाओ, इसके लिए सरकार कम से कम तीन
साल का समय दिया जाए। इस नई टेक्नोलॉजी के कुशल कारीगर अभी नहीं उपलब्ध नहीं हो पाएंगे। इसके साथ ही

अन्य भारी परिवर्तन कराना पड़ेगा। सबसे बड़ी समस्या मिट्टी खनन में उत्पन्न होती है। पुलिस मिट्टी खुदाई के

दौरान मनमाने ढंग से उत्पीड़न करती है। अब कोयला भी पहले से महंगा हो गया। पहले 8 से 9 हजार रुपये प्रति
टन मिलता था लेकिन इस वर्ष 18 से 20 हजार प्रति टन मिलेगा।

इस संबंध में डी.एम के माध्यम से मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया था लेकिन अबतक कुछ असर न हुआ
तो आगे की क्या आशा की जाए। सरकार के इस बेरुखी से हड़ताल का रास्ता चुना गया है। सरकारी निर्माण में

सरकार ने फ्लाईऐश से बनाने की अधिसूचना जारी की है, लेकिन इससे दमा, कैंसर, जैसी घातक बीमारी होती है,

जबकि लाल ईंटों से घर का तापमान कम रहता है और न कोई बीमारी ही होती है। इस मौके पर घनश्याम दास
छाबड़ा, विजय बदलानी , राकेश वर्मा,व महेश उत्तम आदि उपस्थित रहे।