नई दिल्ली, 15 मार्च सरकार ने मंगलवार को कहा कि वह उभरते वैश्विक घटनाक्रमों पर कड़ी नजर
रख रही है तथा आम आदमी के हितों की रक्षा के मकसद से ईंधन की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए
'सुविचारित हस्तक्षेप करेगी।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक
गैस, ईंधन और बिजली उपसमूह का कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सीधा संबंध है।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार यूक्रेन के संकट के कारण ईंधन की कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए
उत्पाद शुल्क में कटौती करेगी, चौधरी ने लिखित उत्तर में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां
(ओएमसी) पेट्रोल और डीजल के अंतरराष्ट्रीय उत्पाद की कीमतों, विनिमय दर, कर संरचना, अंतर्देशीय भाड़ा और
अन्य लागत आदि को ध्यान में रखकर इन इंधनों की कीमतों के बारे में उचित निर्णय लेती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार इन कारकों और विकसित हो रहे वैश्विक घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रख रही है और आम
आदमी के हितों की रक्षा के लिए जब भी जरूरत होगी, सुविचारित हस्तक्षेप करेगी।’’
भारत अपनी तेल आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत पूरा करने के लिए विदेशी खरीद पर निर्भर करता है, जिससे
यह एशिया में तेल की ऊंची कीमतों से प्रभावित होने वाले सबसे कमजोर देशों में गिना जाता है।

