भारत की अडिग उन्नति: तेज़ शासन सुधारों पर PM मोदी के विज़न का विश्लेषण
आज भारत वैश्विक मंच पर मज़बूती से खड़ा है। निवेशकों से लेकर विश्व नेताओं तक, सभी की नज़र भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। हाल ही में PM नरेंद्र मोदी ने साफ़ कहा कि आने वाले महीनों में शासन और सुधारों की रफ्तार और तेज़ होगी।
उनके नेतृत्व में पहले ही कई बड़े सुधार लागू हो चुके हैं—
वस्तु एवं सेवा कर (GST) जिसने कर व्यवस्था को एकीकृत किया, और
दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) जिसने खराब कर्ज़ की समस्या से निपटने में मदद की।
इन सुधारों ने भरोसा बढ़ाया, लालफीताशाही घटाई और भारत को निवेश के लिए आकर्षक बनाया।
यह लेख PM मोदी के उस विज़न को सरल शब्दों में समझाता है—कि सुधारों की गति क्यों बढ़ेगी, किन क्षेत्रों पर फोकस होगा, तकनीक की क्या भूमिका है और रास्ते में कौन-सी चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
सुधारों की रफ्तार क्यों तेज़ होगी?
PM का भरोसा ठोस आर्थिक आधार पर टिका है।
2025 के अंत तक महंगाई करीब 5% के आसपास स्थिर रही
निर्यात में साल-दर-साल लगभग 15% की बढ़ोतरी
पिछले वित्त वर्ष में FDI करीब 85 अरब डॉलर, जो अब तक का रिकॉर्ड है
चुनावों के बाद स्पष्ट जनादेश मिलने से सरकार को बड़े और साहसिक फैसले लेने की राजनीतिक स्थिरता भी मिली है।
वैश्विक बदलावों से भारत को मौका
दुनिया भर की कंपनियाँ “China+1 Strategy” के तहत भारत की ओर देख रही हैं।
Apple, Samsung जैसी कंपनियाँ भारत में उत्पादन बढ़ा रही हैं
अमेरिका और यूरोप के साथ रणनीतिक और व्यापारिक रिश्ते मज़बूत हो रहे हैं
इन मौकों का पूरा फायदा उठाने के लिए भारत को व्यवसाय सुगमता (Ease of Doing Business) में और सुधार करने होंगे—और यही सुधारों की अगली लहर का आधार है।
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भविष्य के सुधारों के प्रमुख स्तंभ
1. श्रम कानूनों में सुधार
पुराने श्रम कानून उद्योगों के लिए जटिल थे। अब:
29 कानूनों को 4 श्रम संहिताओं में बदला गया
औपचारिक रोज़गार बढ़ाने का लक्ष्य
उद्योगों को लचीलापन, श्रमिकों को बुनियादी सुरक्षा
इससे मैन्युफैक्चरिंग और रोज़गार दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
2. वित्तीय क्षेत्र को और मज़बूत करना
बैंकों का NPA 2018 के 11% से घटकर 2025 में करीब 3.9%
सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण की दिशा में कदम
पूंजी बाज़ार में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ा
इसका फायदा MSME और स्टार्टअप्स को सस्ते कर्ज़ के रूप में मिलेगा।
3. इंफ्रास्ट्रक्चर में तेज़ी (गति शक्ति योजना)
PM Gati Shakti Masterplan के तहत:
सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स को जोड़ा गया
परियोजनाओं में देरी 40% तक घटी
2025–26 तक करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर का निवेश प्रस्तावित
तेज़ और सस्ता लॉजिस्टिक्स भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाता है।
तकनीक: सुधारों की असली ताक़त
भारत में सुधार सिर्फ़ काग़ज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए ज़मीन पर उतर रहे हैं।
India Stack की भूमिका
आधार: 140 करोड़ से ज़्यादा लोगों की डिजिटल पहचान
UPI: हर महीने 13 अरब से अधिक लेनदेन
DigiLocker: दस्तावेज़ ऑनलाइन, दफ़्तरों के चक्कर खत्म
इससे सब्सिडी सीधे खातों में जाती है और भ्रष्टाचार घटता है।
ई-गवर्नेंस और पारदर्शिता
सिंगल विंडो क्लियरेंस
ऑनलाइन प्रोजेक्ट ट्रैकिंग
मानवीय हस्तक्षेप कम, भरोसा ज़्यादा
निजी क्षेत्र और निवेश को बढ़ावा
PLI योजना (Production Linked Incentive)
2020 से अब तक 12 अरब डॉलर से ज़्यादा निवेश
मोबाइल, फार्मा, EV, सोलर जैसे क्षेत्रों में तेज़ बढ़त
उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय इज़ाफा
स्टार्टअप इकोसिस्टम
2025 तक 1 लाख से ज़्यादा स्टार्टअप्स
110 से अधिक यूनिकॉर्न
टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी नवाचार
रास्ते की चुनौतियाँ
राज्यों के बीच सुधारों की गति में अंतर
वैश्विक महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव
सरकारी कंपनियों के विनिवेश में बाज़ार जोखिम
सरकार का फोकस संतुलन पर है—तेज़ सुधार, लेकिन सोच-समझकर।
भारत की तेज़ होती उड़ान
PM मोदी का विज़न साफ़ है—
मज़बूत अर्थव्यवस्था + तेज़ सुधार + तकनीक + निजी भागीदारी = वैश्विक भारत
चुनौतियाँ हैं, लेकिन दिशा स्पष्ट है।
2026 और उसके बाद भारत के लिए सुधारों की रफ्तार और तेज़ होने वाली है।
BJP के अनुसार, राहुल गांधी कांग्रेस, सहयोगी दलों और यहां तक कि परिवार के भीतर भी अपना समर्थन खो रहे हैं।
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