Nirmala Sitharaman के दावे का विश्लेषण: ऊँची टैक्स वसूली बनाम मध्यम वर्ग पर बोझ
भारत की कर व्यवस्था इन दिनों रिकॉर्ड स्तर पर राजस्व जुटा रही है। वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह हाल के महीनों में 1.8 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया। वहीं प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) संग्रह में भी लगभग 20% साल-दर-साल वृद्धि दर्ज हुई है। RajyaSabha में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कहा कि आयकर की ऊँची वसूली का मतलब यह नहीं है कि मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त बोझ डाला गया है। उनके अनुसार, यह बढ़ोतरी अधिक लोगों के टैक्स नेट में आने और बेहतर अनुपालन (compliance) का परिणाम है, न कि टैक्स दरों में बढ़ोतरी का।
फिर भी, आम लोगों में यह धारणा बनी हुई है कि महंगाई और स्थिर वेतन के कारण उन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। यही अंतर सरकारी आंकड़ों और जनता की भावनाओं के बीच बहस का केंद्र है।
प्रत्यक्ष कर संग्रह में उछाल का विश्लेषण
वित्त वर्ष 2024-25 में प्रत्यक्ष कर संग्रह 21 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इसमें व्यक्तिगत आयकर (PIT) और कॉर्पोरेट टैक्स दोनों का योगदान है।
व्यक्तिगत आयकर बनाम कॉर्पोरेट टैक्स
व्यक्तिगत आयकर का हिस्सा अब लगभग 45% हो गया है (पहले 35% था)।
कॉर्पोरेट टैक्स लगभग 55% के आसपास स्थिर है।
उच्च आय वर्ग (50 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले) का योगदान तेज़ी से बढ़ा है।
1 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले लगभग 2 लाख करदाता कुल PIT का 40% देते हैं।
30 लाख रुपये से कम आय वाले वेतनभोगी करदाताओं की संख्या 70% से अधिक है, लेकिन उनकी प्रभावी कर दर कम रहती है।
इससे स्पष्ट है कि संग्रह में वृद्धि मुख्य रूप से उच्च आय वर्ग और बेहतर अनुपालन के कारण है।

अर्थव्यवस्था का औपचारिककरण और डिजिटल ट्रैकिंग-RajyaSabha
वेतन अब अधिकतर बैंक खातों में आता है।
UPI और डिजिटल लेनदेन से आय का रिकॉर्ड पारदर्शी हुआ है।
ई-इनवॉइसिंग और डेटा एनालिटिक्स से छिपी आय पकड़ना आसान हुआ है।
2020 से अब तक लगभग 1.5 करोड़ नए करदाता जुड़े हैं।
इसका मतलब है कि टैक्स दरें बढ़ाए बिना भी राजस्व बढ़ा है।
मध्यम वर्ग पर टैक्स बोझ: हकीकत क्या है?
1. टैक्स दरों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं-RajyaSabha
2019 के बाद से प्रत्यक्ष कर दरों में व्यापक वृद्धि नहीं हुई है।
2. नए और पुराने टैक्स सिस्टम का विकल्प
नया टैक्स रेजीम: कम दरें, लेकिन कम छूट।
पुराना टैक्स रेजीम: अधिक छूट (होम लोन, बीमा आदि)।
उदाहरण के लिए:
10 लाख रुपये आय पर नया रेजीम लगभग 5% प्रभावी टैक्स दिखा सकता है, जबकि पुराने में छूट के साथ यह 3% तक जा सकता है।

3. महंगाई का प्रभाव
खाद्य और ईंधन कीमतों में लगभग 8% वृद्धि।
वेतन वृद्धि लगभग 6%।
यानी वास्तविक आय (Real Income) पर दबाव है, जिससे टैक्स बोझ अधिक महसूस होता है, भले ही दरें न बढ़ी हों।
GST की भूमिका
GST संग्रह 2025 में औसतन 1.7 लाख करोड़ रुपये मासिक रहा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुएं लगभग 30% योगदान देती हैं।
खाद्य और वस्त्र क्षेत्र लगभग 25% योगदान देते हैं।
बेहतर निगरानी और एंटी-इवेज़न कार्रवाई से बिना दर बढ़ाए राजस्व बढ़ा है।
सरकार की रणनीति: दर नहीं, आधार बढ़ाना
AI आधारित निगरानी से गलत रिटर्न पकड़े जा रहे हैं।
फेसलेस असेसमेंट से पारदर्शिता बढ़ी है।
2025 के बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये किया गया, जिससे मध्यम वर्ग को राहत मिली।
सरकार का फोकस टैक्स दर बढ़ाने के बजाय अधिक लोगों को टैक्स नेट में लाना है।
करदाताओं के लिए उपयोगी सुझाव-RajyaSabha
1. हर साल दोनों टैक्स रेजीम की तुलना करें
अपनी आय और निवेश के आधार पर सही विकल्प चुनें।

2. समय पर रिटर्न फाइल करें
31 जुलाई से पहले ITR भरें। देर से फाइल करने पर 5,000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है।
3. दस्तावेज़ व्यवस्थित रखें
Form 16, बैंक स्टेटमेंट और निवेश प्रमाण सुरक्षित रखें।
ऊँचा आयकर संग्रह भारत की अर्थव्यवस्था के औपचारिक और डिजिटल होने का संकेत है। वित्त मंत्री का तर्क है कि संग्रह में वृद्धि का मतलब मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त बोझ नहीं है।
हालांकि, महंगाई और वास्तविक आय में कमी के कारण मध्यम वर्ग दबाव महसूस कर रहा है।
आगे बढ़ते हुए संतुलन जरूरी है—राजस्व भी बढ़े और आम करदाता को राहत भी मिले।
मुख्य बिंदु:
ऊँचा टैक्स संग्रह = बेहतर अनुपालन और उच्च आय वर्ग का योगदान
मध्यम वर्ग की परेशानी = महंगाई और खर्च में बढ़ोतरी
सरकार का फोकस = टैक्स आधार बढ़ाना, दर नहीं
अब समय है कि आप अपने टैक्स प्लान की समीक्षा करें और सही विकल्प चुनें।

