उसका ऑक्सीजन लेवल 60 रह गया था!
नाक से खून बहने लगा था और उसे आंखों के आगे धुंधला धुंधला दिख कर बेहोशी आ गई थी!
सामने मृत्यु नृत्य कर रही थी और वो लड़का श्रीराम जय राम जय जय राम का जप मन ही मन करता जा रहा था जब ये सब घटित हो रहा था।
अगर उस दिन राम जी नही बचाते तो वो 26 साल का युवा उसी पर्वत पर अपनी अंतिम श्वास लेता।
ये इसी महीने की 10 तारीख की सत्य घटना है जो लद्दाख में पैंगोंग झील पर घटित हुई है।
मित्रों इंदौर में मेरे एक अनन्य मित्र है मनोज व्यास, पुस्तकों का अच्छा कारोबार है। सबसे बड़ी बात की इनका युवा अवस्था में भी ईश्वर की भक्ति में मन लगता है और यही एकमात्र कारण इन्हे मेरे बहुत अधिक निकट का बनाता है।
डेढ़ साल पहले की बात है जब कारोबार के कुछ तनावों में आकर मनोज व्यथित था और दुखी होकर उसने मुझसे पूछा:
“भैया ऐसा मैं क्या करूं की मन शांत रहे मेरा?”
“भाई बस हर आती जाती श्वास के साथ में श्रीराम जय राम जय जय राम ये जप करना, मन तुरंत शांत हो जाएगा तुम्हारा।”
तब उस दिन मैंने ये सबसे सरल और अचूक नापजप विधि मनोज को बताई थी।
फिर इसका विवाह हुआ, नया कारखाना खोला और जीवन–व्यवसाय में इतना व्यस्त हो गया की नामजप वाली बात भूल गया और मुझसे मिलना भी बहुत कम हो गया।
इसी साल संयोग से श्रीराम मंदिर प्रतिष्ठा वाले उत्सव में इसका आना हुआ और करीब पन्द्रह मिनट तक इस उत्सव में श्रीराम जय राम जय जय राम जप का संकीर्तन होता रहा जिसमे मनोज भी सम्मिलित रहा।
(बड़े भैया के साथ मनोज है और इसी उत्सव वाले दिन का चित्र है।)
इसी दिन से मनोज का एकादशी व्रत और नापजाप नियमित शुरू हो गया।
मुझसे क्योंकि जीवन की हर छोटी बड़ी बात बताता है तो मैं जानता हूं की बड़े बड़े तनावों और संकटों के समय में भी इसने नियमित पूजा और भगवान का नाम जपना नही छोड़ा है और इसी कारण ये संकटों में पड़ कर भी उनसे बच निकलता रहा है।
अब घटना पर आता हूं जो इसके विवाह की सालगिरह वाले दिन की है…
सालगिरह के अवसर पर इसने इंदौर से तीन दिन का लद्दाख टूर बुक करवाया और प्लेन से सीधे पर्वतों पर पहुंचा।
अब शायद ऐसा है की आप लद्दाख या और ऊंची जगहों पर जाते है तो ऑक्सीजन कम होने से आपके शरीर में कई तरह के बदलाव होते है:
जैसे आपका सर दर्द करने लगेगा!
जैसे आपको उल्टी आने लगेगी, चक्कर आने लगेंगे!
जैसे सांस लेने में दिक्कत होने लगेगी, बुखार जैसा लगेगा!
इन्ही सब से बचने के लिए पर्वतों पर एक दो दिन आपको वहां की हवा के प्रति अभ्यस्त करने के लिए कुछ दवाइयां दी जाती है और एक दो दिन ही बस कुछ ना करके वहां एक कमरे में आराम करने की सलाह दी जाती है, जब शरीर वहां की हवा के अनुसार ढल जाता है तब सैर सपाटा शुरू किया जाता है।
क्योंकि मनोज के पास टाइम नही था और वो बिना कोई दवाई लिए या दो दिन माहौल में ढले बिना सीधे लद्दाख पहुंचा तो उसे जाते बराबर सर दर्द, चक्कर और सांस लेने में दिक्कत होने लगी।
नाममात्र को नींद नहीं आई इसको रात में।
अब अगले दिन शादी की सालगिरह थी तो इसने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया और 10 तारीख के दिन तैयार होकर धर्मपत्नी के साथ पैंगोंग झील पहुंच गया।
अब इसने वहां से आकर जो मुझे इस दिन का घटनाक्रम बताया था वो इसी की भाषा में मैं आपलोगों के सामने रख रहा हूं:
“भैया! पैंगोंग झील पर मुझे ऐसा लगा की अगले सेकंड प्राण निकलने वाले है! जितनी कोशिश करूं सांस आ ही नही रही थी! आंख के सामने धुंधला दिखाई देने लगा था और नाक से खून निकलने लगा था!”
“मुझे लगा की बस अब जीवन यही तक का है शायद तो मैं मन मन में श्रीराम जय राम जय जय राम बोलने लगा क्योंकि मुंह से तो आवाज निकल नही रही थी, और इसके बाद आंख के आगे अंधेरा आ गया और मैं बेहोश हो गया।”
“इतने में मेरी वाइफ ने वहां से जा रही सेना की एम्बुलेंस को बड़ी दिक्कतों के बाद रुकवाया और मुझे उस एम्बुलेंस में लिटाकर सीपीआर दिया गया, रामजी की दया से उस एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर भी था जिसके कारण मैं नीचे कोई सरकारी अस्पताल तक का सफर तय कर पाया बिना मरे।”
“शायद डेढ़ दिन बाद होश आया तो मैं आईसीयू में था और नाक में नली लगी हुई थी, शरीर में छेद करके फेफड़ों में जो पानी भर गया था वो निकाला जा रहा था।”
“शादी की सालगिरह के दिन पुण्यतिथि मन रही थी अपनी पर श्रीराम नाम ने हलक में से निकल आए प्राण वापस लौटा दिए!”
ये कहकर उसने मुझे कुछ चित्र दिखाए जो आईसीयू के थे, वो मैं यहां नही जोड़ रहा हूं क्योंकि एक तो निजता और दूसरा नकारात्मक चित्र देखने से आपका भी मन दुखी हो जाएगा अस्तु….
पर बच्चे के प्राण श्रीराम नाम ने बचा लिए ये चमत्कार या ऐसे कहे की जो अटूट राम नाम की सिद्धि चली आ रही है अनन्त काल से वो एक बार पुनः से सत्य सिद्ध हुई।

