मुख्य आरोप: Humayun कबीर क्या कह रहे हैं?
Humayun Kabir का कहना है कि यह साजिश उस समय शुरू हुई जब उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़ दी। उनके अनुसार, अक्टूबर 2025 में मुर्शिदाबाद में एक रैली के दौरान उन पर हमला करने की योजना बनाई गई थी।
कबीर के आरोपों के मुख्य बिंदु:
देर रात धमकी भरे फोन कॉल
संदिग्ध लोगों द्वारा गाड़ी का पीछा किया जाना
घर के पास कथित हमलावरों की मौजूदगी
पार्टी के दो स्थानीय नेताओं की संलिप्तता का आरोप
कबीर का दावा है कि उन्हें पड़ोसी की सूचना के कारण हमले से बचने का मौका मिला। उन्होंने इसे “सुनियोजित राजनीतिक साजिश” बताया है।
सबूत और सार्वजनिक बयान
28 जनवरी 2026 को कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कबीर ने फोन रिकॉर्ड और एक कथित संदिग्ध की धुंधली तस्वीर दिखाते हुए आरोप दोहराए। उन्होंने पुलिस में FIR भी दर्ज कराई है।
हालांकि, अब तक कोई ठोस सार्वजनिक सबूत सामने नहीं आया है। ऑडियो क्लिप की स्पष्टता पर सवाल उठ रहे हैं और कोई स्वतंत्र गवाह खुलकर सामने नहीं आया है। मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि: तनाव की जड़
Humayun कबीर कभी TMC के प्रमुख चेहरों में से थे। उन्होंने 2016 और 2021 में चुनाव जीते। लेकिन 2023 के बाद से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ने लगे।
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मतभेद के कारण:
कथित फंड गड़बड़ी पर आरोप
बाढ़ राहत में अनियमितताओं को लेकर विवाद
पार्टी नेतृत्व पर सार्वजनिक आलोचना
2025 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया, जिसके बाद राजनीतिक दूरी और बढ़ गई। उनके समर्थकों का कहना है कि इसी के बाद से उन्हें निशाना बनाया जाने लगा।
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थिति
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का इतिहास रहा है। 2021 के चुनाव बाद की हिंसा और कई स्थानीय टकराव इस बात की याद दिलाते हैं कि यहां राजनीति अक्सर तीखी हो जाती है। ऐसे माहौल में इस तरह के आरोप गंभीर माने जा रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, पिछले वर्ष राज्य में 200 से अधिक राजनीतिक हमलों की शिकायतें दर्ज हुईं। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्रोतों में भिन्न है।
राज्य सरकार और TMC की प्रतिक्रिया
TMC नेताओं ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता Firhad Hakim ने इसे “राजनीतिक नाटक” बताया। उनका कहना है कि Humayun कबीर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर टिप्पणी नहीं की, लेकिन पार्टी की आधिकारिक लाइन स्पष्ट है—यह आरोप बेबुनियाद हैं और चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश है।
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कानूनी स्थिति और आगे की राह
Humayun कबीर द्वारा दर्ज FIR पर अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। राज्य पुलिस ने जांच का आश्वासन दिया है। कबीर केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग कर सकते हैं।
यदि मामला अदालत तक जाता है, तो संभावित धाराएँ:
आपराधिक साजिश (IPC 120B)
हत्या की साजिश से संबंधित धाराएँ
हालांकि, अदालत में टिकने के लिए ठोस और प्रमाणित सबूत जरूरी होंगे।
जनमत और मीडिया कवरेज
मीडिया में इस मुद्दे को व्यापक कवरेज मिल रहा है। सोशल मीडिया पर #SaveHumayun और #PoliticalDrama जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
जनता की राय बंटी हुई है:
कुछ लोग कबीर को भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला नेता मानते हैं।
अन्य इसे चुनावी स्टंट बता रहे हैं।
सच या सियासी संघर्ष?
यह मामला एक व्यक्ति के गंभीर आरोप बनाम सत्ता पक्ष के इनकार का है। अभी तक ठोस प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
सवाल यह है—क्या यह वास्तविक साजिश है या चुनावी रणनीति?
आने वाले हफ्तों में जांच और अदालत की कार्यवाही इस कहानी की दिशा तय करेगी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह प्रकरण लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है।

