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Bihar में राज्यसभा चुनाव: एआईएमआईएम ने विपक्ष की उम्मीदों में डाला पेंच

Bihar की राजनीति एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर है। राज्यसभा की छह सीटों के लिए चुनावी गणित बन रहा है, लेकिन इसी बीच All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) की भूमिका ने विपक्षी खेमे की रणनीति को उलझा दिया है। महागठबंधन जहां अधिकतम सीटें जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ताकत दिखाना चाहता है, वहीं AIMIM के तीन विधायकों का रुख पूरे समीकरण को बदल सकता है।

राज्यसभा चुनाव का गणित: आंकड़ों का खेल

Bihar विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 41 वोटों की जरूरत होती है।

  • एनडीए के पास लगभग 128 विधायक हैं (जिसमें भाजपा, जदयू और सहयोगी शामिल)।

  • महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वाम दल) के पास करीब 110 विधायक हैं।

  • AIMIM के पास 3 विधायक हैं, जो सीमांचल क्षेत्र से जीते थे।

संख्या के लिहाज से एनडीए चार सीटें आसानी से निकाल सकता है। विपक्ष दो सीटों की उम्मीद करता है, लेकिन यदि AIMIM समर्थन न दे या तटस्थ रहे, तो विपक्ष की स्थिति कमजोर हो सकती है।

AIMIM की वास्तविक ताकत

हालांकि AIMIM के पास सिर्फ तीन विधायक हैं, लेकिन करीबी मुकाबले में ये तीन वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं। पार्टी सीमांचल में अपने प्रभाव के कारण अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ रखती है।

पिछले चुनावों में AIMIM ने स्वतंत्र रुख अपनाया है। वह अक्सर बड़े गठबंधनों से दूरी बनाकर अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश करती रही है।

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महागठबंधन के भीतर खींचतान-Bihar

महागठबंधन में Tejashwi Yadav के नेतृत्व में Rashtriya Janata Dal (राजद) सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस भी राज्यसभा सीट में हिस्सेदारी चाहती है। सीट बंटवारे को लेकर अंदरूनी चर्चा और तनाव की खबरें सामने आती रही हैं।

यदि AIMIM समर्थन से दूरी बनाती है, तो विपक्ष के लिए तीसरी सीट का सपना अधूरा रह सकता है। इससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े होंगे।

AIMIM की रणनीति: ‘स्पॉइलर’ या ‘किंगमेकर’?

AIMIM खुद को सिर्फ समर्थन देने वाली पार्टी के रूप में नहीं देखना चाहती। वह Bihar में तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश में है।

संभावित कारण:

  • महागठबंधन से वैचारिक मतभेद

  • अल्पसंख्यक मुद्दों पर अलग पहचान

  • भविष्य के चुनावों में सौदेबाजी की मजबूत स्थिति

यदि AIMIM एनडीए को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाती है, तो विपक्ष के लिए यह बड़ा झटका होगा।

एनडीए पर प्रभाव

एनडीए पहले से मजबूत स्थिति में है। AIMIM के तटस्थ या समर्थन देने की स्थिति में एनडीए की राह और आसान हो जाएगी। हालांकि, यदि विपक्ष क्रॉस-वोटिंग कराने में सफल होता है, तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

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राजनीतिक असर और भविष्य की दिशा

यदि विपक्ष अपेक्षा से कम सीटें जीतता है, तो उसकी एकजुटता पर सवाल उठेंगे। यह 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले मनोबल पर असर डाल सकता है।

दूसरी ओर, AIMIM ने यह दिखा दिया है कि छोटी पार्टियां भी बड़े चुनावी समीकरण बदल सकती हैं। भविष्य में अन्य राज्यों में भी छोटे दल इसी रणनीति को अपनाकर अपनी सौदेबाजी की ताकत बढ़ा सकते हैं।

Bihar का यह राज्यसभा चुनाव केवल छह सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि गठबंधन राजनीति की परीक्षा है। AIMIM ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कम संख्या के बावजूद उसकी भूमिका अहम हो सकती है।

अब सवाल यह है—क्या महागठबंधन अपने मतभेद सुलझाकर मजबूती दिखा पाएगा, या AIMIM का यह कदम विपक्ष के लिए लंबी चुनौती बन जाएगा?

आपकी राय में, क्या AIMIM की यह रणनीति उसे भविष्य में ज्यादा राजनीतिक ताकत दिलाएगी? अपनी सोच साझा करें।

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