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वाशिंगटन/नई दिल्ली, 22 अप्रैल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर
पर ऊभरती नई चुनौतियों को देखते हुए, विश्व अर्थव्यवस्था के वृद्धि दर में कुछ गिरावट आ सकती है लेकिन

प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की आर्थिक वृद्धि की दर सबसे तेज रहेगी। वित्त सीतारमण यहां अंतरराष्ट्रीय मुद्रा
कोष की वित्त समिति की पूर्ण बैठक को संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने ऊभरती चुनौतियों की पृष्ठभूमि में कहा कि
वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में कुछ गिरावाट आ सकती है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 2022-23 में भारत की वृद्धि 8.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया
गया है जो कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ऊंची वृद्धि दर है। उन्होंने कहा कि भारत ने महत्वपूर्ण

बुनियादी सुधार कार्यक्रम जारी रखे हुए हैं। इनका उद्देश्य उत्पादकता और रोजगार को प्रोत्साहित करना है।
गौरतलब है कि मुद्रा कोष ने इसी सप्ताह विश्व अर्थव्यवस्था के परिदृश्य के विषय में जारी अपनी ताजा वर्ल्ड

आउटलुक रिपोर्ट में भारत की वृद्धि दर के अनुमान को जनवरी के अपने 9 प्रतिशत के अनुमान की तुलना में
घटाकर 8.2 प्रतिशत कर दिया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा में वित्तीय कार्यवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के
वैश्विक नेटवर्क की भूमिका की सराहना की और धनशोधन तथा आतंक के वित्त पोषण के खिलाफ लड़ाई में भारत

की राजनीतिक प्रतिबद्धता दोहराई। सीतारमण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वसंत बैठकों, 2022 से
इतर यहां आयोजित एफएटीएफ की मंत्री स्तरीय बैठक में शामिल हुईं। एफएटीएफ एक अंतर-सरकार संस्था है

जिसकी स्थापना 1989 में धनशोधन, आतंक के वित्त पोषण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिए
जो खतरे हैं उनसे निपटने के लिए की गई थी। वित्त मंत्री ने बृहस्पतिवार को रणनीतिक प्राथमिकताओं के प्रति

समर्थन व्यक्त किया और एफएटीएफ के प्रति समर्थन जताने और आवश्यक संसाधन मुहैया करवाने के लिए भारत
की प्रतिबद्धता दोहराई। वित्त मंत्रालय ने ट्वीट किया,

;वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने धनशोधन, आतंक के वित्त
पोषण और वित्तीय प्रसार से निपटने के लिए भारत की राजनीतिक प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि की।