ऑपरेशन ब्लू स्टार
“ऑपरेशन ब्लू स्टार” (Operation Blue Star) भारत के आधुनिक इतिहास का एक अत्यंत विवादित अध्याय है। जून 1984 में पंजाब, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर (Golden Temple complex) में भारतीय सेना ने कार्रवाही की थी, ताकि वहाँ छिपे उग्रवादियों और सिख कट्टरपंथियों को बाहर निकाला जा सके। इस फैसले ने देश में सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक स्तर पर गहरा प्रभाव छोड़ा, जिसमें सिख समुदाय में असंतोष, हिंसात्मक प्रतिक्रियाएँ, Indira गांधी की हत्या आदि शामिल हैं। इसके बाद कई वर्षों से लोग इसके निर्णय‑प्रक्रिया, रणनीति एवं परिणामों पर बहस कर रहे हैं।
हाल ही में, 12 अक्टूबर 2025 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने इस ऑपरेशन के बारे में कहा कि यह “गलत रास्ता” था, और इंदिरा गांधी ने इस फैसले की कीमत अपनी जान देकर चुकाई। को विस्तार से देखेंगे।
ऑपरेशन ब्लू स्टार: पृष्ठभूमि एवं घटनाएँ
पहले थोड़ा इतिहास जान लेना ज़रूरी है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या था, क्यों हुआ और क्या घटित हुआ।
कब, कहाँ, किसने: जून 1984 में, अमृतसर, पंजाब में भारतीय सेना द्वारा स्वर्ण मंदिर परिसर में प्रवेश किया गया। उद्देश्य था कि वहाँ छिपे उग्रवादी, विशेषकर जर्नेल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थक, जिन्हें सरकार ने आतंकवाद के रूप में देखा, उन्हें हटाया जाए।
कार्रवाई की प्रकृति: यह एक सैन्य ऑपरेशन था जिसमें भारी हथियारों, टैंकों, बम ग्रेनेड्स आदि का उपयोग किया गया। स्वर्ण मंदिर परिसर सहित कई हिस्सों को क्षति हुई। सिविलियन और सिख भक्तों की भी मौत हुई।
परिणाम: उग्रवादी भिंडरावाले मारा गया; लेकिन इस कार्रवाई के बाद सिख समुदाय में बड़ा आक्रोश हुआ। Indira गांधी की सुरक्षा पर असर पड़ा, और कुछ महीनों बाद उनकी हत्या कर दी गई। देश में सिखों और सरकार के बीच तनाव गहरा गया।
पी. चिदंबरम का बयान: क्या कहा उन्होंने?
पी. चिदंबरम ने कसौली (हिमाचल प्रदेश) में ख़ुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव में वक्तव्य देते समय journalist हरिंदर बावेजा की किताब “They Will Shoot You, Madam” पर चर्चा करते हुए यह कहा:
उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार को एक गलत तरीका (wrong way) बताया जिस तरह से स्वर्ण मंदिर से मिलिटेंटों को भगाने के लिए सेना भेजी गई।
चिदंबरम ने कहा किIndira गांधी ने इस निर्णय की कीमत अपनी जान देकर चुकाई।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला सिर्फ Indira गांधी का नहीं था; इसमें सेना, पुलिस, इंटेलिजेंस एजेंसियाँ और सिविल सेवा विभाग सभी शामिल थे। दोष केवल एक व्यक्ति पर नहीं थोपना चाहिए।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बाद में ऐसी कार्रवाई हुई कि बिना सेना के, पार्टी या शांतिपूर्ण तरीके से स्वर्ण मंदिर को “सही रास्ते से” पुनः प्राप्त किया जाए।

विश्लेषण: क्यों कहा जा सकता है कि यह एक गलती थी?
चिदंबरम ने “गलती” क्यों कहा, इसके पीछे कई तर्क हो सकते हैं जो इतिहासकारों व विश्लेषकों ने भी प्रस्तुत किए हैं। नीचे कुछ दृष्टिकोण हैं:
धार्मिक और भावनात्मक संवेदनाएँ
स्वर्ण मंदिर विचाराधीन सिखों के लिए अत्यंत पवित्र स्थान है। किसी सैन्य ऑपरेशन के दौरान वहाँ भारी क्षति हुई, धार्मिक ग्रंथों, पवित्र क्षेत्रों को आंशिक रूप से नुक़सान पहुँचा। इससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएँ ठेस पहुँची।
ऑपरेशन के समय भक्तों की उपस्थिति और तीर्थयात्रियों की संख्या को पूरी तरह से नहीं भाँपा गया।
राजनीतिक और सामाजिक असर
इस ऑपरेशन के बाद सिखों में सरकार के प्रति विश्वास कम हुआ, और कट्टरपंथी एवं अलगाववादी विचारों को बढ़ावा मिला।
Indira गांधी की हत्या हुई, जिसके बाद सिख विरोधी दंगे हुए, विशेषकर अक्टूबर‑नवंबर 1984 में, जिसमें हजारों सिखों की मौत हुई और बड़ी जनसंख्या विस्थापित हुई।
यह कार्रवाई भारतीय राजनीति में एक ऐसा ‘ब्लैकमार्क’ बन गयी जो वर्षों तक पाकिस्तान की बात हो या भारत के भीतर अल्पसंख्यक‑महत्व की बात हो, उसके लिए एक संदर्भ बनी।
रणनीतिक एवं सैन्य चुनौतियाँ
ऑपरेशन ब्लू स्टार की योजना, समय और कार्यान्वयन (execution) पर आलोचनाएँ हुई हैं कि वह अच्छी तरह से तैयार नहीं थी में‑मध्य स्थितियों और स्थानीय संवेदनाओं को कम आंका गया था।
कार्रवाई के लिए उपयुक्त खुफिया जानकारी की कमी, जनता के इकट्ठा होने की स्थिति, और मंदिर परिसर की संरचना की जटिलता को ध्यान में न लेने की बात कही जाती है।
देर रात या त्योहारों के समय ये फैसले और भी संवेदनशील होते हैं।
विकल्पों की संभावना
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि शक्ति‑प्रदर्शन, वार्ता, सामाजिक एवं प्रशासनिक दबाव, पुलिस द्वारा स्थानीय नियंत्रण बढ़ाने, ग़ैरसैन्य समाधानों की संभावनाएँ हो सकती थीं।
बाद में “ऑपरेशन ब्लैक थंडर” (Operation Black Thunder) जैसे मॉडल हुए, जहाँ संतुलन और संवेदनशीलता दिखाते हुए उपयुक्त तरीकों से हल निकाला गया।
परिणामों की भारी कीमत
Indira गांधी की हत्या उसी साल 1984 में उनके सिख सुरक्षाकर्मियों द्वारा हुई थी, जो कि प्रतिवाद की प्रतिक्रिया थी। इसका सीधा संबंध ऑपरेशन ब्लू स्टार के निर्णय एवं उसके प्रभाव से जोड़ा जाता है। चिदंबरम ने भी यही कहा कि इंदिरा गांधी ने इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाई।
सामाजिक विभाजन, सिख समुदाय की अपेक्षाएँ, धार्मिक भावनाएँ — इन सभी में खलल पड़ा।

आलोचनाएँ और प्रतिवाद
हर फैसले की तरह, ऑपरेशन ब्लू स्टार की आलोचना के साथ कुछ समर्थक तर्क भी हैं जो कहते हैं कि उस स्थिति में कार्रवाई ज़रूरी थी। ये तर्क इस प्रकार हैं:
उग्रवाद और कानून व्यवस्था की चुनौती
भिंडरावाले और समूहों द्वारा कुछ समय से हिंसात्मक गतिविधियाँ और हालात बिगड़ रहे थे। सरकार के अनुसार, आतंकवादी गतिविधियों को रोकना, राज्य की संप्रभुता और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ज़रूरी था।
चेतावनियाँ भी थीं कि स्थिति अगर हाथ से निकल गयी तो और ज्यादा हिंसा होगी। धार्मिक स्थानों का इस्तेमाल हथियारों के ठिकाने के रूप में हो रहा था।
राजकीय दायित्व
प्रधानमंत्री और सरकार की जिम्मेदारी होती है कि देश में कानून व्यवस्था बनाए रखें, और किसी भी प्रकार के आतंकवाद या उग्रवाद को अनुमति न दें।
सरकार के प्रतिनिधियों का तर्क है कि वार्ता या बातचीत के माध्यम से समाधान संभव नहीं था क्योंकि उग्रवादी सेना के उपयोग कर रहे थे और उनकी मांगें अस्थिर थी।
समय और कार्यक्रम की जटिलताएँ
आरोप है कि सरकार को विकल्प मिल सकते थे, लेकिन समय के दबाव, स्थिति की जल्दी बिगड़ने की आशंका, और राजनीतिक दबाव ने निर्णय को तीव्र बनाया।
यह भी कहा जाता है कि सरकार को उपयुक्त सूचना मिली थी कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है, इसलिए सक्रिय उपाय करना ज़रूरी था।
पुनःप्राप्ति के बाद के मॉडल्स
बाद में हुए ऑपरेशन ब्लैक थंडर (1991‑92) ने दिखाया कि सेना का उपयोग कम किया जाए, दबाव, घेराव, संवाद आदि के माध्यम से समाधान संभव है। यह एक तरह से सुझाता है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के विवादों से सीखा जा सकता था।
चिदंबरम के बयान का वर्तमान संदर्भ
चिदंबरम का बयान सिर्फ इतिहास की समीक्षा नहीं है, बल्कि वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
राजनीति में पुनर्मूल्यांकन: ऐसे बयान यह संकेत देते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इतिहास के उन फैसलों की समीक्षा कर रहे हैं जो पार्टी और देश के लिए विवादस्पद रहे। यह राजनीतिक आत्मावलोकन (introspection) की प्रक्रिया हो सकती है।
सिख समुदाय के प्रति संवेदनशीलता: सिख समुदाय में ऑपरेशन ब्लू स्टार से जुड़ी भावनाएँ अभी भी ताज़ा हैं। एसे वक्तव्य समुदाय के विश्वास को पुनः बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
राष्ट्रीय संवाद: ऐसे बयान देश को इतिहास, विभाजन, प्रजा‑प्रधानता, धर्म और सुरक्षा के बीच संतुलन के बारे में संवाद करने का अवसर देते हैं।
संभावित परिणाम और प्रभाव
चिदंबरम के इस बयान से कुछ संभावित असर हो सकते हैं:
पार्टी विवाद और प्रतिक्रिया
बीजेपी या अन्य राजनीतिक दल इस बयान का इस्तेमाल राजनीतिक निशाना साधने में कर सकते हैं और कांग्रेस को “राजनीतिक नफे‑नुकसान” के बारे में सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
सिख संगठनों या पंजाब की राजनीतिक पार्टियों में प्रतिक्रियाएँ होंगी — कुछ स्वागत करेंगी, कुछ विरोध।
सम्बोधन और सुलह की उम्मीद
इस तरह से खुली आलोचना और स्वीकारोक्ति से भविष्य में सिख समुदाय के साथ बेहतर संवाद और संवेदनशील नीतियां बन सकती हैं। मुद्दों के जायज संतुलन की संभावना बढ़ती है।

इतिहास और शैक्षणिक विमर्श
इतिहासकार, शोधकर्ता इस मामले पर पुनः शोध कर सकते हैं, नए दस्तावेज़ उद्घाटित हो सकते हैं।
शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और सार्वजनिक विमर्श में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाएगा, जिसमें रणनीति, चेतावनियाँ, मानवीय असर आदि।
राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर असर
भविष्य में ऐसे संवेदनशील मामलों में सैन्य कार्रवाई के विकल्पों (वार्ता, घेराव, पुलिस उपाय) की समीक्षा ज़्यादा होगी।
सरकार को निर्णय लेने से पहले खुफिया जानकारी, स्थानीय संवेदनाएँ, धार्मिक एवं सामाजिक प्रभावों की पूरी जानकारी लेना होगा।
“ऑपरेशन ब्लू स्टार गलत था” — यह एक बयान है जो व्यापक रूप से इतिहास, राजनीति और संवेदनशील धार्मिक भावनाओं को छूता है। पी. चिदंबरम ने इसे “गलती”करार देते हुए कहा कि इंदिरा गांधी ने इसकी “कीमत अपनी जान देकर चुकाई।” यह बयान कई मायनों में सच प्रतीत होता है:
रणनीतिक निर्णयों, समय और तरीके की दृष्टि से यह कार्रवाई विवादास्पद थी;
राजनीति, समाज और सिख समुदाय पर इसके गहरे, लंबे‑असर वाले नकारात्मक प्रभाव पड़े;
और अंततः, जीवन की कीमत—Indira गांधी की हत्या—इस फैसले से जुड़ी एक बड़ी घटना है।
लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि हर बड़ा राष्ट्रीय निर्णय एकल व्यक्ति का नहीं होता, विभिन्न विभागों, सलाहकारों और परिस्थितियों से प्रभावित होता है। चिदंबरम ने भी यही कहा कि ये फैसले सामूहिक थे।
Ayodhya में शक्तिशाली विस्फोट में 5 लोगों की मौत
Follow us on Facebook
India Savdhan News | Noida | Facebook

