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Iran के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते: अमेरिका ने यूएनएससी सत्र में तेहरान के खिलाफ ‘निर्णायक कार्रवाई’ का बचाव किया

हाल के दिनों में पूरी दुनिया में Iran के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता बढ़ गई है। हर रोज़ नए मसले और बहसें सामने आ रही हैं, खासकर जब से ईरान परमाणु एजेंसी और संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षणकर्ताओं ने जानकारी देना बंद कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि यह सब खतरे का संकेत हैं, और वह चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जल्दी से कदम उठाए। यूएन सुरक्षा परिषद में हुई हाल की बैठक में इस मुद्दे पर बहस हुई, जिसमें अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का समर्थन किया।

Iran का परमाणु कार्यक्रम: संदर्भ और वर्तमान स्थिति

Iran के परमाणु कार्यक्रम का इतिहास

Iran का परमाणु कार्यक्रम करीब तीन दशकों से चल रहा है। यह देश परमाणु शक्ति बनाने की अपनी कोशिशें कर रहा है। परमाणु समझौते (JCPOA) इसी उद्देश्य से मंजूर किया गया था, जिससे Iran की मात्रा को सीमित किया गया। लेकिन इन समझौतों का उल्लंघन भी हुआ है। अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणकर्ताओं ने कई बार पाया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में झूठ बोल रहा है।

Iran वर्तमान स्थिति और संयुक्त राष्ट्र का रोल

आखिरी रिपोर्ट में आईएईए (IAEA) ने कहा है कि ईरान अपनी परमाणु क्षमता को बढ़ा रहा है। यह बात चिंता का कारण है, क्योंकि इससे विश्व सुरक्षा खतरे में पड़ने लगी है। वहीं, प्रतिबंधों ने ईरान की आर्थिक और वैज्ञानिक प्रगति पर असर डाला है। दुनिया के कई देश इस मामले में हैरान और चिंतित हैं। परमाणु हथियार मिलने का खतरा बढ़ता दिख रहा है, खासकर क्षेत्र में स्थिरता के लिए।

वैश्विक सुरक्षा पर ईरान का खतरा

अगर Iran ने परमाणु हथियार बना लिए तो क्षेत्रीय स्थिरता पूरी तरह खतरे में पड़ जाएगी। मिसाइल तकनीक के साथ मिलकर, ईरान अपनी क्षमता बढ़ा सकता है। इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए खतरा और भी बढ़ जाएगा। यदि ईरान हथियार बना लेता है, तो पड़ोसी देश भी जवाबी कदम उठा सकते हैं। इससे संपूर्ण मध्य पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।

US Ambassador to the UN Dorothy Shea looks on during a United Nations Security Council emergency meeting in New York. Pic: AFP)

अमेरिका का तर्क: क्यों Iran के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते

अमेरिका का तर्क: Iran का खतरा बढ़ाना

अमेरिका का मानना है कि Iran का परमाणु कार्यक्रम दुनिया में बड़ा खतरा है। यह क्षेत्र में हथियार प्रचलन को बढ़ावा दे सकता है। यदि Iran ने परमाणु हथियार बना लिया, तो उस का दबदबा हर किसी पर आ जाएगा। इससे युद्ध और अनिश्चितता बढ़ेगी। अमेरिका को डर है कि ईरान वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

अमेरिकी अधिकारियों और विशेषज्ञों की राय

अमेरिकी सरकार और सैन्य अधिकारी मानते हैं कि ईरान की परमाणु क्षमता खतरनाक है। उन्होंने बार-बार कहा है कि यह हथियार किसी भी समय बन सकते हैं। कई सुरक्षा विशेषज्ञ भी इसे बढ़ते खतरे के रूप में देखते हैं। अमेरिका का मकसद है कि ईरान को रोक दिया जाए, इससे पहले कि वह नतीजे पर पहुंच जाए।

‘निर्णायक कार्रवाई’ का महत्व

अमेरिका का मानना है कि अब समय है कि दुनिया गंभीर कदम उठाए। वह संयुक्त राष्ट्र में दबाव बना रहा है ताकि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका जा सके। इस प्रयास में आर्थिक प्रतिबंध और कूटनीतिक बातचीत दोनों शामिल हैं। अमेरिका का लक्ष्य है कि तेहरान पर दबाव डालकर परमाणु हथियार से बाहर निकाला जाए।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

यूरोपीय संघ और अन्य देशों का रुख

यूरोप में कुछ देश परमाणु समझौते का समर्थन कर रहे हैं। वे कहते हैं कि बात-चीत से समस्या सुलझानी चाहिए। वे चाहते हैं कि तनाव कम हो और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से ही हल निकले। कई देश संयम दिखाने में ही भलाई समझते हैं।

रूस और चीन की भूमिका

रूस और चीन ने कहा है कि स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। वे अमेरिकी प्रयासों का समर्थन नहीं कर रहे हैं। दोनों देश चाहते हैं कि समस्या शांतिपूर्ण ढंग से हल हो। उनका मानना है कि सैन्य कार्रवाई ना हो, बल्कि चर्चा से मसला हल किया जाए।

संयुक्त राष्ट्र का निर्णय

संयुक्त राष्ट्र ने कई प्रस्ताव पास किए हैं, जिनमें ईरान पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। यह प्रतिबंध उन्हें परमाणु कार्यक्रम से रोकने का प्रयास है। लेकिन अभी तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है। भविष्य में कोई बड़ा कदम उठाने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञ राय और विश्लेषण

सुरक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण

विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान का परमाणु हथियार बनाने की योजना दुनिया के लिए गंभीर खतरा है। इससे क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ सकती है। वे कहते हैं कि सवाल है, कैसे रोकें इस खतरे को? सबसे अच्छा तरीका है कूटनीति और निगरानी में गंभीरता।

कदम और रणनीतियाँ

सिर्फ चेतावनी देना पर्याप्त नहीं है। दुनिया को मिलकर नए कदम उठाने होंगे। उदाहरण के लिए, ज्यादा निरीक्षण और दबाव बढ़ाना जरूरी है। यदि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका नहीं गया, तो खतरा और बढ़ता जाएगा।

अगर हम मूल बात पर आएं, तो स्पष्ट है कि ईरान के परमाणु हथियार बनने का खतरा अभी टला नहीं है। अमेरिका का दृढ़ संकल्प है कि इसे रोकना जरूरी है, और उसके पास सही विकल्प हैं। वैश्विक समुदाय को मिलकर ऐसे कदम उठाने होंगे, ताकि परमाणु हथियार का खतरा खत्म हो सके। संवाद और सहयोग ही समझदारी है। भविष्य का रास्ता है बातचीत का या फिर सख्त कदम उठाने का? यह फैसला हमें करना है।

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