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Is नीतीश कुमार की पकड़ ढीली पड़ रही है? बिहार के गृह विभाग पर BJP के कब्जे की असली कहानी

बिहार की हलचल भरी राजनीति में एक बड़ा बदलाव अचानक सुर्खियों में आ गया। नीतीश कुमार की जेडीयू सरकार में शीर्ष नेतृत्व वही है, लेकिन उन्होंने राज्य के सबसे अहम गृह विभाग को BJP को सौंप दिया है। यह विभाग कानून-व्यवस्था, पुलिस नियुक्तियों और बड़े प्रशासनिक फैसलों की कमान संभालता है। यानी राज्य के “मुख्य दरवाज़े की चाबी” बीजेपी के हाथ में चली गई।
तो सवाल उठता है—नीतीश ने ऐसा क्यों किया? क्या उनकी पकड़ कमज़ोर पड़ रही है?

नई NDA टीम “स्थिरता” की बात करती है, लेकिन ज़रा गहराई से देखें तो कई संकेत बदलती समीकरणों की ओर इशारा करते हैं। गठबंधन बदलने के बाद BJP ने बातचीत में कड़ा रुख अपनाया। नीतीश ने एक बार फिर पाले बदले और पुरानी साझेदारी छोड़कर नया समीकरण बनाया। अब जब गृह जैसे अहम विभाग पर जेडीयू का नियंत्रण खत्म हो गया है, तो चर्चा तेज़ है—क्या यह सिर्फ गठबंधन की चाल है, या वास्तव में नीतीश कुमार की पकड़ ढीली पड़ रही है?
आइए इसे क्रमवार समझते हैं।

सेक्शन 1: बिहार की राजनीति में गृह विभाग की रणनीतिक अहमियत

क्यों गृह मंत्रालय राज्य राजनीति का सबसे प्रभावी विभाग है

गृह विभाग बिहार की सुरक्षा प्रणाली चलाता है। यह पुलिस बल, इंटेलिजेंस, और डीजीपी जैसे प्रमुख पदों की नियुक्ति को नियंत्रित करता है। दंगों, चुनावों या किसी बड़े संकट में असली कमान गृह विभाग के पास होती है।

बिहार में जहाँ अपराध दर लगभग 200 घटनाएँ प्रति लाख की बताई जाती हैं, वहाँ इसका प्रभाव और बढ़ जाता है। बजट, तकनीकी सुधार, और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय—सभी इसी विभाग से तय होते हैं। इस पर नियंत्रण खोना, जैसे अपनी तिजोरी की चाबी सौंप देना।

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ऐतिहासिक संदर्भ: नीतीश का वर्षों से गृह पर नियंत्रण

2005 में सत्ता में आने के बाद नीतीश कुमार ने गृह को हमेशा अपने पास रखा। इसी के सहारे उन्होंने पुलिस सुधार और महिला सुरक्षा जैसी पहलों पर जोर दिया। उनके भरोसेमंद लोग इस विभाग को संभालते थे।

2017 में गठबंधन बदलने के बाद भी उन्होंने तत्काल फिर से गृह विभाग अपने हाथ में ले लिया था। इसलिए इस बार इसे छोड़ देना बड़ा संकेत माना जा रहा है।

सेक्शन 2: विभाग हस्तांतरण की राजनीति—किसका दबाव भारी पड़ा

पोस्ट-कोएलिशन समीकरण: BJP की “नॉन-नेगोशिएबल” शर्तें

2020 चुनाव के बाद BJP के पास 243 में से 74 सीटें हैं, जबकि जेडीयू के पास 43। यह गणित BJP को गठबंधन में भारी बनाता है। देर रात की बैठकों में BJP ने गृह विभाग की मांग पर अडिग रुख अपनाया।
नीतीश को मुख्यमंत्री बने रहने के लिए यह शर्त माननी पड़ी।
बताया जाता है कि 2025 तक कुर्सी सुरक्षित करने के बदले उन्हें गृह सौंपना पड़ा।

नए गृह मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी की भूमिका

अब बीजेपी के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गृह विभाग संभालते हैं। उनका राजनीतिक सफर आक्रामक शैली वाला माना जाता है। वे पुलिस सुधारों और कड़े रवैये की बात करते हैं।

क्या वे जेडीयू के प्रभाव को किनारे करेंगे? शुरुआती संकेत ऐसा ही दिखाते हैं।

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सेक्शन 3: गृह विभाग से आगे—कहाँ-कहाँ दिख रहा है सत्ता का झुकाव

अधिकारियों की नियुक्ति और तबादलों से संकेत

नई व्यवस्था के बाद कई अहम विभागों में तबादले हुए।

  • वित्त विभाग में BJP समर्थित अधिकारी को महत्वपूर्ण भूमिका मिली।

  • सामान्य प्रशासन विभाग में जेडीयू से जुड़े तीन अफसर हटाए गए।

  • दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों, जो CM के क़रीबी माने जाते थे, को कम प्रभावी पद दिए गए।

ये कदम BJP के बढ़ते प्रभाव का संकेत देते हैं।

केंद्रीय योजनाओं और समन्वय पर असर

गृह विभाग की कमान BJP के पास होने से केंद्र प्रायोजित योजनाओं में उनकी भूमिका बढ़ गई है।
बताया गया है कि हाल ही में कुछ बैठकों में फाइलों और अनुमोदनों में देरी देखी गई, जिससे समन्वय प्रभावित हुआ।

सेक्शन 4: जन धारणा और ज़मीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था का असर

नए कमान ढांचे के तहत शुरुआती अपराध रुझान

हैंडओवर के बाद अपराध आँकड़ों में हल्की बढ़ोतरी की बात सामने आई—मार्च 2024 में चोरी के मामलों में 15% वृद्धि की रिपोर्ट आई।
कुछ इलाकों, खासकर BJP गढ़ों में, गश्त बढ़ाई गई है, जबकि तटस्थ इलाकों में कमी की चर्चा है।

यह असमानता लोगों में सवाल पैदा करती है।

पुलिस और प्रशासन का माहौल

पुलिस महकमे में चर्चा गर्म है। कुछ अधिकारी नए आदेशों की शैली को अलग बताते हैं।
IAS और IPS अधिकारियों के बीच भी सावधानी का माहौल है—खासकर जेडीयू से जुड़े अफसरों में।

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सेक्शन 5: नीतीश कुमार की रणनीति—यह अस्थायी झुकाव या स्थायी समझौता?

लॉन्ग गेम: रणनीतिक पीछे हटना या स्थायी त्याग?

नीतीश कुमार राजनीति में “लंबी चाल” चलने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने गृह विभाग छोड़कर अपनी कुर्सी सुरक्षित रखी है, लेकिन यह हमेशा के लिए होगा—यह स्पष्ट नहीं।
2025 के चुनाव के समय वह फिर समीकरण बदल सकते हैं।

जेडीयू की काउंटर-रणनीति

जेडीयू ने वित्त, ग्रामीण विकास, और शिक्षा जैसे प्रभावी विभाग अपने पास रखे हैं।

  • वित्त—फंड नियंत्रण से प्रभाव

  • ग्रामीण विकास—गाँवों में पैठ

  • शिक्षा—युवा वोटर्स तक पहुंच

इन विभागों के ज़रिये जेडीयू अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत रखने की कोशिश कर रही है।

बिहार की सत्ता-संरचना का नया संतुलन

गृह विभाग का BJP को मिलना, NDA में शक्ति संतुलन के बड़े बदलाव का संकेत है।
नीतीश कुमार की पकड़ पहले जैसी मज़बूत नहीं दिखती।
कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक निर्णय और तबादलों के संकेत बताते हैं कि सत्ता का वजन BJP की ओर झुक रहा है।

आने वाले जून में होने वाले बड़े तबादलों का दौर इस तस्वीर को और साफ करेगा—
क्या नीतीश वापसी की चाल चलेंगे या BJP अपना प्रभाव और बढ़ाएगी?

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