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J&K हाई अलर्ट पर: इंटेलिजेंस इनपुट्स के बाद सुरक्षा बलों ने बढ़ाई निगरानी

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हाल के खुफिया इनपुट्स और जंगलों में संदिग्ध आतंकवादी गतिविधियों की रिपोर्ट के बाद सुरक्षा बलों ने जम्मू क्षेत्र के कई इलाकों में तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं। 4 अक्टूबर 2026 को राजौरी और उधमपुर में सुरक्षा बलों ने संदिग्ध आतंकवादी गतिविधियों की सूचना के बाद अलग-अलग इलाकों में सर्च ऑपरेशन शुरू किए।

राजौरी और उधमपुर में विशेष निगरानी

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, जंगल और पहाड़ी इलाकों में संदिग्ध आतंकवादियों की संभावित मौजूदगी को लेकर सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीमें सक्रिय हैं। स्थानीय लोगों से मिली सूचनाओं और खुफिया इनपुट्स के आधार पर कुछ इलाकों में तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का विशेष ध्यान उन जंगलों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर है, जिनका इस्तेमाल आतंकवादी छिपने या एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने के लिए कर सकते हैं। जम्मू क्षेत्र में राजौरी, उधमपुर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।

J&K on high alert after Hashim Musa’s killing as intelligence inputs warn of possible terror strikes

J&K उधमपुर में पहले भी मिला था आतंकियों का मूवमेंट

सितंबर में उधमपुर के माजलता इलाके में सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर एक बड़ा ऑपरेशन चलाया था। 16-17 सितंबर की रात ब्रट्टल सोहन और खुब्बन के जंगलों में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की संयुक्त टीमों ने दो जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादियों को मार गिराया था।

सेना के अनुसार, ऑपरेशन से पहले आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में विशिष्ट खुफिया जानकारी मिली थी। कठिन पहाड़ी इलाकों, खराब मौसम और कम दृश्यता के बावजूद सुरक्षा बलों ने अभियान चलाया। मुठभेड़ के बाद हथियार और अन्य सामग्री बरामद की गई।

इस ऑपरेशन के बाद भी इलाके में तलाशी जारी रही क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि कोई अन्य आतंकवादी जंगलों में छिपा हो सकता है। सितंबर के अंत में पांच जिलों—कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़—में भी निगरानी बढ़ाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।

कश्मीर में भी जारी हैं आतंकवाद विरोधी अभियान

हाई अलर्ट केवल जम्मू क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कश्मीर में भी सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस लगातार संयुक्त अभियान चला रहे हैं। 30 सितंबर को यूसमर के कोराग इलाके में विशिष्ट खुफिया इनपुट के आधार पर संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया था। सुरक्षा बलों के अनुसार, संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने के बाद गोलीबारी हुई, जिसमें एक आतंकवादी मारा गया।

इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियां उन विदेशी आतंकवादियों की तलाश पर भी ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि वे कठिन पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में छिपे हो सकते हैं। हालिया रिपोर्टों में सुरक्षा सूत्रों के हवाले से जम्मू-कश्मीर में करीब 35-40 विदेशी आतंकवादियों के सक्रिय होने का अनुमान बताया गया है। हालांकि यह आंकड़ा आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है और इसे सुरक्षा सूत्रों का आकलन समझना चाहिए।

J&K पिर पंजाल क्षेत्र बना अहम सुरक्षा चुनौती

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जम्मू और कश्मीर को जोड़ने वाला पिर पंजाल क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों के लिए विशेष चुनौती माना जाता है। घने जंगल, ऊंचे पहाड़, प्राकृतिक गुफाएं और कठिन भूगोल आतंकवादियों को लंबे समय तक छिपे रहने में मदद कर सकते हैं।

हाल के अभियानों में सुरक्षा बलों ने ऐसे क्षेत्रों में लंबे समय तक मौजूदगी बनाए रखने के लिए अस्थायी ऑपरेशनल बेस और लगातार निगरानी की रणनीति अपनाई है। इसका उद्देश्य आतंकवादियों को जंगलों में सुरक्षित ठिकाना बनाने या जम्मू और कश्मीर के बीच आवाजाही करने से रोकना है।

सुरक्षा ग्रिड को किया जा रहा मजबूत

जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सितंबर में J&K के पुलिस महानिदेशक ने भी सुरक्षा समीक्षा के दौरान लगातार सतर्कता, सक्रिय पुलिसिंग, आपसी समन्वय और समय पर कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर दिया था।

सुरक्षा एजेंसियां केवल सक्रिय आतंकवादियों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं कर रही हैं, बल्कि उन स्थानीय नेटवर्कों की भी जांच कर रही हैं जो आतंकवादियों को कथित तौर पर ठहरने, आने-जाने या अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध करा सकते हैं।

क्या है मौजूदा खतरे का स्वरूप?

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों से यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा एजेंसियां संभावित आतंकवादी गतिविधियों को लेकर एहतियाती कदम उठा रही हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी बड़े हमले की पुष्टि हो चुकी है। राजौरी और उधमपुर में तलाशी अभियान तथा कश्मीर में जारी आतंकवाद विरोधी अभियानों को व्यापक सुरक्षा निगरानी का हिस्सा माना जा रहा है।

पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग अभियानों में विदेशी आतंकवादियों को निशाना बनाया है। सितंबर में उधमपुर में जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादियों के मारे जाने और यूसमर में एक आतंकवादी के मारे जाने की घटनाओं ने यह दिखाया है कि एजेंसियां जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं।

आगे क्या?

आने वाले दिनों में राजौरी, उधमपुर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में तलाशी और निगरानी जारी रहने की संभावना है। सुरक्षा बलों का ध्यान संभावित घुसपैठ, जंगलों में छिपे आतंकवादियों और उनके स्थानीय सहायता नेटवर्क की पहचान पर रहेगा।

J&K on high alert after Hashim Musa’s killing as intelligence inputs warn of possible terror strikes

फिलहाल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि “संभावित हमले” संबंधी खुफिया चेतावनियों को अंतिम हमले की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए। वर्तमान में उपलब्ध जानकारी मुख्यतः संदिग्ध गतिविधियों और संभावित खतरे के आधार पर बढ़ाई गई सुरक्षा तथा तलाशी अभियानों से संबंधित है।

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