इंडिया सावधान न्यूज़
उत्तर प्रदेश लखनऊ, तत्कालीन मायावती सरकार ने कांशीराम आवास योजना के अंतर्गत प्रदेश भर में वर्ष-2008-09 में आवासों के निर्माण का काम शुरू किया था।
निर्माण पूरा हो जाने के बाद उसके आवंटन प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो गई थी। आवंटन प्रक्रिया के तहत राजस्व कर्मियों ने भी पात्रों के चयन में अहम भूमिका निभाई थी।
उस वक्त की परिस्थितियों पर गौर करें तो आवंटन प्रक्रिया के दौरान ही आवासों से वंचित लोगों ने खुद को पात्रता की श्रेणी में शामिल न बताकर अफसरों से शिकायतें की थीं। यहां तक कि राजनीतिक हस्तक्षेप के मामले भी सामने आए।
उसके बाद प्रदेश में सपा की सरकार का गढ़न हुआ और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने लोहिया आवास योजना का सुभारंभ कर दिया
फिर वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार आई तो कांशीराम आवास और लोहिया आवासीय योजनाओं की जगह प्रधानमंत्री आवास योजना लागू कर दी गई। परिणाम स्वरूप कांशीराम आवास फिर आवंटित नहीं हो पाए। अब कांशीराम आवासीय
कॉलोनी के भवन जर्जर होने लगे हैं, जबकि तमाम गरीब परिवार किराए के घर या सड़क पर झुग्गी झोंपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं। कांशीराम आवासों में जुआरी दिन में आकर जुआ खेलते हैं। रात में यहां असामाजिक तत्व शरण लेते हैं।
बसपा की सरकार क्या गई, अफसरों ने कांशीराम आवास आवंटन प्रक्रिया से स्वयं को दूर कर लिया। जबकि यही अफसर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के दौरे की भनक लगते ही कांशीराम कॉलोनी की तरफ दौड़ने लगते थे।
इन आवासों का आवंटन बसपा सरकार में नहीं हो पाया लिहाजा, कांशीराम कॉलोनी में
गरीबों के रहने के लिए बसपा सरकार ने कांशीराम आवास योजना के तहत लाखों की संख्या में कांशी राम आवास बनाए
थे और इन आवासों का आवंटन का नंबर ही नहीं आ सका, प्रदेश भर के सम्बन्धित अधिकारी इन आवासों को लेकर बे फिक्र और शिथिल हो गए जिस से अरबों रुपए की इस योजना के परवान चढ़ने से पहले ही दम तोड़ती हुई नजर आने
लगी वहीं प्रदेश भर में बने कांशीराम आवासों को जिस तरह मायावती सरकार में बनाए जाने की तीव्रता देखने मिलती थी आज उसी तरह इनका पुरसाने हाल कोई नहीं दिखता ,कांशी राम आवासों के निर्माण से के समय मंडलायुक्त से लेकर
जिलाधिकारी उपजिलाधिकारी लेखापाल आदि रातों में जा जाकर कार्य पूर्ण कार्य जाने को लेकर चिंतित रहते थे ,कांशी राम आवास तो मायावती ने गरीबों और बे सहारा लोगों के लिए बनाए थे मगर आज की दशा देखकर तो ऐसा लगता है कि
मायावती की बसपा सरकार जाने के बाद से तो शायद यह आवास सरकारी योजना के अंतर्गत नहीं बल्कि किसी माफिया गुंडों की योजना के अंतर्गत बनाए गए हों आवासों की हालत जर्जर होती जा रही है
कहीं पानी है तो कहीं रोशनी नहीं कहीं रोशनी है तो पानी नहीं पानी के नल खराब खड़े हैं सफाई के नाम पर कर्मचारी कभी जाता है तो कभी नहीं रंगाई पुताई भी जब से बने हैं शायद ही कभी हुई हो,
आज इन आवासों की दुर्दशा भयावह नज़र आ रही है जितने आवास बसपा सरकार में आनन फानन में बनाकर पात्र व्यक्तियों के आवंटन के लिए ढूंढने से लेकर इसके आबंटन तक इतनी जल्दबाजी दिखाई थी कि सारे नियमों को ताक में
रखकर इनके आवंटन की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया था,जेसे बदायूं जनपद की तहसील सहसवान में 587 आवासों का निर्माण हुआ और 336 आवासों का आवंटन हुआ था जिसमें कुछ तो पात्र व्यक्तियों को आवंटन किया गया और बाकी के
लेखपाल की मिली भगत के कारण शेष बचे आवासों में ज़बरदस्ती कब्जा कर लिया गया, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कब्जा किए हुए आवासों को माफियाओं द्वारा किराए पर चढ़ा कर आराम से किराया वसूल रहे है उनका यहीं
मामला नहीं रुकता वहां जुआ से लेकर नशा और सारे गंदे काम इन आवासों में हो रहे हैं।
इसी तरह नगर पंचायत इस्लामनगर क्षेत्र में 216 कांशी राम आवासों का निर्माण हुआ है जिसमें वहां किसी भी आवास का आज तक आवंटन नहीं हो पाया है यह जानकारी दूरभाष पर नगर पंचायत इस्लामनगर में बड़े बाबू के पद पर तैनात श्री
फय्याज ने देते हुए बताया की जब से इन आवासों का निर्माण हुआ है तब से आज तक उक्त आवास नगर पंचायत को हैंड ओवर नहीं किए गए हैं जिसकी वजह से किसी का भी आवंटन नहीं हो पाया है
और मौके पर जाकर देखा गया तब उसमें कोई भी आवास खाली नहीं नजर आता इस संबंध में जानकारी की गई तब स्थानीय लोगों ने बताया कि योगेश शर्मा नामक लेखपाल जिसको चाहता है उसको इन कमरों में घुसा देता है और उसके
एवज में उनसे प्रत्येक माह किराया वसूली करता है,सूत्री से मिली जानकारी के अनुसार और तो और यहां के आवासों में खुलकर जुआ और शराब की तस्करी भी बड़े पैमाने के साथ होती हुई देखी जा सकती है ।
यह आवास तो बनाए गए थे गरीबों के लिए मगर इन आवासों पर कब्जा माफियाओं और गुंडों का है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है की अरबों रुपए की योजना को सपा सरकार में नजर अंदाज किया गया वहीं दूसरी बार बनी प्रदेश में बाबा योगी जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार में भी इस योजना का पूरी तरह नज़र अंदाज किया जा रहा है
जबकि आवास विहीन तमाम परिवार दशकों से किराए के भवनों में रहने को मजबूर हैं और झुग्गी झोंपड़ियों में रह रहे हैं,मगर सरकारों को इसकी सुध लेने की फुरसत ही नहीं है।


