गाजियाबाद, 17 जून करीब ढाई माह पूर्व ऑटो में अगवा कर युवती के साथ गैंगरेप की घटना के
मामले में लापरवाही साबित होने पर एसएसपी मुनिराज जी ने कविनगर थाने के एसएचओ आनंद प्रकाश मिश्र और
दरोगा इच्छाराम को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि कविनगर पुलिस एक मामले में पीडि़ता के भाई और मां को
पकडक़र लाई थी।
उन्हें छुड़ाने पहुंची युवती को पुलिस ने देर रात को घर से दस्तावेज लाने के लिए कहा था।
युवती जब देर रात को दस्तावेज लेकर घर से लौट रही थी तो रास्ते में ऑटो चालक ने उसे अगवा कर लिया और
दादरी ले जाकर अपने दो साथियों के साथ उसके संग दरिंदगी की। इस मामले में पीडि़ता ने मेरठ जोन के एडीजी
से शिकायत की थी।
एडीजी ने मामले की जांच हापुड़ पुलिस से कराई। जिसमें एसएचओ और दरोगा के दोषी पाए
जाने पर उन्हें पुलिस कप्तान द्वारा सस्पेंड कर दिया गया।
कविनगर पुलिस ने 31 मार्च को धोखाधड़ी के एक मामले में लालकुआं क्षेत्र निवासी युवक व उसकी मां को हिरासत
में लिया था।
थाने पहुंची युवक की 22 वर्षीय बहन ने मामले को गलत बताते हुए पुलिस से अपने भाई व मां को
छोडऩे की गुहार लगाई थी।
आरोप है कि एसएचओ और दरोगा ने देर रात करीब 1 बजे दोनों को छोडऩे की एवज
में युवती से उसके भाई व मां के आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज लाने को कहा। युवती ने दस्तावेज सुबह लेकर
आने की बात कही, लेकिन पुलिस ने दस्तावेज न लाने पर दोनों को सुबह जेल भेजने की धमकी दे दी थी।
बताया गया है
कि मां व भाई को छुड़वाने के लिए युवती देर रात में ही अपने घर पहुंची और वहां से दस्तावेज
लेकर कविनगर थाने के लिए चल दी। रास्ते में उसने एक ऑटो पकड़ा। देर रात करीब डेढ़ बजे युवती को अकेला
देख चालक उसे कविनगर थाने की बजाए दादरी की तरफ ले गया। वहां उसने अपने दो दोस्तों को भी फन कर
बुला लिया।
जिसके बाद तीनों आरोपियों ने दो दिन तक युवती को बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। युवती
के मोबाइल की लोकेशन मिलने पर पुलिस ने न सिर्फ उसे बरामद किया
बल्कि ऑटो चालक रोहित गुर्जर व उसके
साथियों भूपेन्द्र व शिवम को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा।
दरिंदगी: एक माह अस्पताल में तो ढाई माह से बिस्तर पर है पीडि़ता
पीडि़त परिजनों का कहना था
कि आरोपियों ने उनकी बेटी के साथ वहशियाना अंदाज में दरिंदगी की। आरोपियों ने
पहले तो सुनसान इलाके में उसके साथ गैंगरेप किया और फि र एक आरोपी की बहन के घर ले जाकर भी उसके
साथ दरिंदगी की। दरिंदगी का आलम यह हुआ कि पीडि़ता के मूत्र और शौच का रास्ता एक हो गया। इस कारण
उसे करीब एक माह तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
परिजनों ने पुलिस को बताया कि पीडि़ता की हालत में
सुधार लाने के लिए डाक्टरों को बारी
.बारी से कई ऑपरेशन करने पड़े। बावजूद इसके पीडि़ता ढाई महीने बाद भी घर
में बिस्तर पर पड़ी हुई है।
न्याय के लिए एडीजी के दरबार में पहुंचे थे परिजन
पीडि़त परिजनों ने कविनगर पुलिस को घटना का जिम्मेदार बताते हुए
जिले के पुलिस अधिकारियों से शिकायत की
थी, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई का भरोसा देने के अलावा कुछ नहीं किया गया।
जिले के अधिकारियों से न्याय
न मिलता देख परिजनों ने एडीजी मेरठ से न्याय की गुहार लगाई। परिजनों ने कहा कि अगर कविनगर पुलिस
उनकी बेटी को देर रात में 1 बजे दस्तावेज लाने के लिए मजबूर न करती तो वह दरिंदगी का शिकार न होती।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीजी ने हापुड़ पुलिस को जांच सौंपी थी।
हापुड़ पुलिस की जांच में कविनगर
एसएचओ आनंद प्रकाश मिश्र और दरोगा इच्छाराम दोषी पाए गए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी मुनिराज
जी ने दोनों को सस्पेंड कर दिया।
एसएसपी मुनिराज जी का कहना है कि गैंगरेप के मामले में कविनगर पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगा
था। एडीजी ने आरोपों की जांच हापुड़ पुलिस को सौंपी थी।
जांच में दोषी पाए जाने पर कविनगर एसएचओ तथा
दरोगा को सस्पेंड किया गया है। साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं।

