‘teachers कुत्ते गिन रहे हैं’ टिप्पणी पर विवाद: दिल्ली सरकार ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ FIR दर्ज करने की तैयारी की
सोचिए, जब किसी शहर का मुख्यमंत्री यह कह दे कि स्कूलों के teachers बच्चों को पढ़ाने के बजाय आवारा कुत्ते गिन रहे हैं—तो क्या होगा? दिल्ली में यही टिप्पणी अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद का कारण बन गई है। दिल्ली सरकार ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कथित “teachers कुत्ते गिन रहे हैं” बयान को लेकर FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोप है कि इस टिप्पणी से शिक्षकों का अपमान हुआ और जनता को गुमराह किया गया।
यह मामला दिखाता है कि नेताओं के शब्द कितनी तेजी से भरोसे, राजनीति और प्रशासन को हिला सकते हैं।
विवादित बयान: संदर्भ और आरोप
‘teachers कुत्ते गिन रहे हैं’ टिप्पणी की पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार, 15 जनवरी 2026 को दिल्ली स्थित आम आदमी पार्टी (AAP) मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान अरविंद केजरीवाल ने स्कूल सुधार और बजट पर बात करते हुए कथित तौर पर यह टिप्पणी की। कहा गया कि उन्होंने मज़ाकिया लहजे में कहा कि कुछ teachers स्कूलों में पढ़ाने के बजाय “कुत्ते गिनने” में समय बिता रहे हैं।
यह बात सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई। समर्थकों ने इसे हल्का-फुल्का व्यंग्य बताया, लेकिन teachers और विरोधियों ने इसे अपमानजनक करार दिया। हालांकि, अब तक बयान का कोई आधिकारिक वीडियो सामने नहीं आया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में इसे उद्धृत किया गया।
कानूनी कार्रवाई का आधार
दिल्ली सरकार का कहना है कि यह टिप्पणी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि) के तहत आती है। इसके अलावा धारा 505 का हवाला भी दिया गया है, जो ऐसे बयानों पर लागू होती है जो समाज में भ्रम या अशांति फैला सकते हैं।
शिक्षा विभाग का आरोप है कि इस बयान से सरकारी teachers की छवि को नुकसान पहुंचा है और उनके काम को गलत तरीके से पेश किया गया है। FIR का उद्देश्य शिक्षकों का मनोबल बनाए रखना और गलत धारणाओं पर रोक लगाना बताया गया है।

teachers संगठनों और यूनियनों की प्रतिक्रिया
दिल्ली के teachers संगठनों ने इस बयान पर कड़ा विरोध जताया।
एमसीडी टीचर्स एसोसिएशन ने इसे “अपमानजनक और निराधार” बताया।
5,000 से अधिक teachers ने माफी की मांग करते हुए याचिका पर हस्ताक्षर किए।
दिल्ली सरकारी स्कूल शिक्षक संघ ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया।
teachers का कहना है कि वे पहले ही सीमित संसाधनों और भारी जिम्मेदारियों के बीच काम कर रहे हैं। अभिभावक संगठनों ने भी चिंता जताई कि ऐसे बयानों से स्कूलों पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है।
राजनीतिक असर: टकराव और आरोप-प्रत्यारोप
भाजपा की प्रतिक्रिया और इस्तीफे की मांग
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को हाथोंहाथ लिया। 17 जनवरी को भाजपा नेताओं ने अरविंद केजरीवाल से इस्तीफे की मांग की। पार्टी का कहना है कि यह बयान उनकी “शिक्षा विरोधी सोच” को दर्शाता है।
भाजपा नेताओं ने उपराज्यपाल से भी मुलाकात कर पूरे मामले की जांच की मांग की और इसे आगामी चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।
दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर असर
दिल्ली सरकार अब तक अपनी शिक्षा नीति और स्कूल मॉडल को लेकर प्रशंसा पाती रही है। लेकिन इस विवाद से सुधारों की चर्चा पीछे छूट गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे:
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शिक्षकों का मनोबल गिर सकता है
यूनियन विरोध और हड़तालें बढ़ सकती हैं
आगामी शैक्षणिक परियोजनाओं में देरी हो सकती है
कानूनी प्रक्रिया: FIR कैसे दर्ज होती है?
मुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज करना एक विशेष प्रक्रिया से गुजरता है। शिकायत शिक्षा विभाग की ओर से पुलिस को दी जाती है। दिल्ली पुलिस (जो केंद्र के अधीन है) FIR दर्ज कर जांच शुरू करती है।
संभावित सज़ा:
मानहानि में अधिकतम 2 साल की सजा या जुर्माना
यदि बयान से सार्वजनिक अशांति फैली हो, तो अतिरिक्त धाराएं
अक्सर ऐसे मामलों में अदालत पहले नोटिस जारी करती है। माफी या सफाई से मामला शांत भी हो सकता है।
बचाव पक्ष की रणनीति
AAP का कहना है कि बयान को संदर्भ से बाहर निकालकर पेश किया गया है और यह पूरी तरह राजनीतिक साजिश है। पार्टी कानूनी तौर पर FIR को चुनौती देने और इसे रद्द कराने की कोशिश करेगी। केजरीवाल के समर्थक दावा कर रहे हैं कि सरकार के शिक्षा सुधारों का समर्थन शिक्षक खुद करते रहे हैं।
जन प्रतिक्रिया और मीडिया की भूमिका
सोशल मीडिया पर बहस
सोशल मीडिया पर #KejriwalInsultsTeachers और #DogCountingFIR जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं, तो कई इसे एक मुख्यमंत्री के लिए गैर-जिम्मेदाराना भाषा मान रहे हैं।
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मीडिया कवरेज
स्थानीय अखबारों ने शिक्षकों के पक्ष और प्रशासनिक पहलुओं पर ध्यान दिया।
राष्ट्रीय मीडिया ने इसे AAP और BJP के बीच सियासी जंग के रूप में दिखाया।
टीवी डिबेट्स में बयानबाजी और टकराव ने मुद्दे को और गरमाया।
आगे क्या?
“teachers कुत्ते गिन रहे हैं” टिप्पणी ने एक हल्के कथन को बड़े राजनीतिक और कानूनी संकट में बदल दिया है। यह मामला नेताओं की भाषा, जिम्मेदारी और सार्वजनिक भरोसे पर सवाल खड़ा करता है।
मुख्य बातें संक्षेप में:
कथित बयान पर मानहानि का मामला
teachers संगठनों में नाराज़गी
भाजपा का तीखा हमला
लंबी कानूनी प्रक्रिया की संभावना
अब सबकी नजर अदालत और अगले राजनीतिक कदमों पर है। सवाल यही है—क्या एक मज़ाक पर FIR जायज़ है, या यह राजनीति का नया मोर्चा? आने वाले दिनों में जवाब मिलेंगे।
Mallikarjun खर्गे का कहना है कि मोदी सरकार न तो स्वच्छ पानी दे सकी और न ही स्वच्छ हवा, जिससे जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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