Kerala

भारत में दवा सुरक्षा और गुणवत्ता

भारत में दवा सुरक्षा और गुणवत्ता एक संवेदनशील मुद्दा है। हाल ही में मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से जुड़े शिशु मृत्यु मामलों ने देशभर में तहलका मचा दिया। इसी पृष्ठभूमि में Kerala की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज (Veena George) ने घोषणा की कि राज्य में “Coldrif” कफ सिरप की बिक्री और वितरण पर निलंबन / प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया गया है।

यह कदम चिकित्सा सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जोखिम प्रबंधन के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। इस लेख में हम इस निर्णय की पृष्टभूमि, कानूनी-नियमकीय पहलू, चुनौतियाँ, संभावित प्रभाव और भविष्य की राह की समीक्षा करेंगे।

पृष्ठभूमि: कफ सिरप विवाद और मृत्यु के मामले

मध्य प्रदेश और राजस्थान के घटनाक्रम

  • सितंबर 2025 में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कुछ बच्चों में अचानक गुर्दे की विफलता (Acute Kidney Injury) की शिकायत आई। प्रारंभिक रिपोर्टों में यह कड़ी आशंका व्यक्त की गई कि ये मामले कफ सिरप के सेवन से संबंधित हो सकते हैं।

  • मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि कफ सिरप में “ब्रेक ऑयल सॉल्वेंट” (ब्रेक ऑयल घोल) या Diethylene Glycol (DEG) या Ethylene Glycol (EG) जैसे विषकारक रसायन मिलाए गए हैं, जो गुर्दे पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं।

  • राजस्थान में भी कुछ बच्चों की मृत्यु का मामला सामने आया। कुल मिलाकर 11 बच्चों की मौत की खबरें जारी रहीं।

  • इन मामलों के बाद राष्ट्रीय और राज्यस्तर पर दवा सुरक्षा एवं नियंत्रण एजेंसियों की जांच तेज हो गई।

“Coldrif” ब्रांड पर शक

  • “Coldrif” नामक कफ सिरप को इन्हीं विवादों से जोड़ा गया। यह विशिष्ट रूप से SR‑13 बैच पर सबसे अधिक प्रश्नचिन्ह उठा।

  • हालांकि केरल में प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि उक्त SR‑13 बैच राज्य में वितरित नहीं हुआ था।

  • बावजूद इसके, स्वास्थ्य मंत्री और राज्य ड्रग्स नियंत्रण विभाग ने इसे एक एहतियात का निर्णय माना और पूरी बिक्री पर रोक लगाने की कार्रवाई की।

इन घटनाओं ने राज्य सरकारों को अलर्ट किया कि दवा की गुणवत्ता, निगरानी तंत्र और वितरण प्रणाली में संभावित कमियों की समीक्षा करना आवश्यक है।

मध्य प्रदेश और तमिलनाडु के बाद इस राज्य में भी कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री  पर बैन, जांच के लिए भेजे सैंपल - kerala suspends sale distribution Coldrif  cough syrup samples ...

Kerala सरकार की कार्रवाई: स्वास्थ्य मंत्री का बयान एवं प्रतिबंध

मंत्री वीणा जॉर्ज का बयान

  • Kerala की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कहा कि राज्य ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने Coldrif कफ सिरप की बिक्री और वितरण को निलंबित किया है।

  • उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच में यह तय हुआ है कि विवादित बैच राज्य में नहीं फेला था। बावजूद इसके, सुरक्षा कारणों से पूरी बिक्री रोक दी गई है।

  • मंत्री ने कहा कि राज्य के आठ वितरकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तुरंत Coldrif की आपूर्ति बंद करें।

  • मेडिकल स्टोर्स को भी आदेश दिए गए कि वे इस सिरप को बेचने से रोकें।

  • उन्होंने यह भी बताया कि राज्य भर में निरीक्षण बढ़ाए गए हैं, और Coldrif के साथ-साथ अन्य कफ सिरपों के नमूने परीक्षण के लिए एकत्र किए गए हैं।

  • उन्होंने केंद्रीय DGHS (Directorate General of Health Services) की गाइडलाइनों की याद दिलाई — जिनमें कहा गया है कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दी जानी चाहिए

  • मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई प्रिस्क्रिप्शन मिले, तब भी मेडिकल स्टोर्स को उसे बच्चों पर देने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

विस्तृत प्रतिबंध और अन्य निर्देश

– राज्य सरकार ने यह आदेश जारी किया कि बच्चों को 12 वर्ष से कम की आयु में कोई दवा बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के नहीं दी जाए। 
– पुराने प्रिस्क्रिप्शन का उपयोग करके दवा देना स्वीकार नहीं किया जाएगा। 
– यह निर्देश दिया गया है कि दवाएँ बच्चों को उनके वजन के अनुसार ही दी जानी चाहिए — इसलिए एक बच्चे को दी गई दवा दूसरे को नहीं दी जाए। 
– राज्य ने एक तीन-सदस्य विशेषज्ञ समिति गठित की है, जिसका काम बच्चों में कफ दवाओं के उपयोग को अध्ययन करना और नई गाइडलाइन्स तैयार करना है। इस समिति में राज्य ड्रग्स कंट्रोलर, चाइल्ड हेल्थ नोडल अधिकारी और भारतीय बाल रोग अकादमी (IAP) का राज्य अध्यक्ष शामिल हैं। 
– यह भी कहा गया है कि केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (KMSCL) सरकार द्वारा दवाओं की आपूर्ति संस्था, Coldrif को सरकारी अस्पतालों में नहीं भेजेगा।
– राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम, डॉक्टरों और फार्मासिस्टों के प्रशिक्षण आदि को तेज करने के निर्देश दिए हैं।

इस प्रकार, प्रतिबंध सिर्फ एक विभागीय आदेश नहीं है, बल्कि एक समेकित नीति‑प्रतिक्रिया के रूप में तैयार किया गया है।

Kerala Ban Coldrif Cough Syrup,Coldrif Syrup Ban: केरल सरकार का बड़ा फैसला,  मध्य प्रदेश-राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद इस कफ सिरप की बिक्री पर  लगाई रोक - kerala govt

कानूनी और नियंत्रण-नियमात्मक पक्ष

केंद्र और राज्य का अधिकार

  • भारत में दवाओं की सुरक्षा, उत्पादन और वितरण का नियंत्रण ड्रग्स और कॉस्मेटिक एक्ट, 1940नियंत्रण अधिनियम, 2019 (Drug Rules, 2019, New Drugs & Clinical Trials Rules, etc.) के अंतर्गत आता है।

  • केंद्रीय एजेंसियाँ जैसे Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO), Drugs Controller General of India (DCGI), राज्य स्तर पर State Drug Controllers / Drugs Control Departments ही नियंत्रण एवं निगरानी करती हैं।

  • राज्य सरकारों को ऐसी शक्ति होती है कि वे किसी विशिष्ट ब्रांड, बायोटेक या बैच पर अस्थायी निलंबन (suspension) या प्रतिबंध (ban / stop sale & distribution) आदेश दे सकें, खासकर जब सार्वजनिक स्वास्थ्य को संभावित ख़तरा हो।

  • इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह निर्णय एक एहतियात पूर्ण कार्रवाई है — यद्यपि विवादित बैच राज्य में नहीं पाया गया।

परीक्षण, निरीक्षण और जवाबदेही

  • राज्य ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने परीक्षण हेतु नमूने एकत्र किए हैं—Coldrif के अलावा अन्य कफ सिरप भी शामिल हैं।

  • निरीक्षण तेजी से बढ़ाए गए हैं—दवाखानों, मेडिकल स्टोर्स और वितरण केन्द्रों पर सख्त निगरानी।

  • यदि किसी मेडिकल स्टोर या वितरक ने प्रतिबंध उल्लंघन किया, तो उन पर वैधानिक कार्रवाई की संभावना है—ड्रग कंट्रोल अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

  • राज्य सरकार चाहता है कि समिति अपनी रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करे और इसके आधार पर आगे की गाइडलाइन्स जारी हों।

चुनौतियाँ और कानूनी सवाल

  • यदि किसी दवा कंपनी या वितरक पर कार्रवाई की जाती है, तो उन्हें न्यायिक समीक्षा का अधिकार होगा।

  • दवा उद्योग ही विधायिक दबाव, लाइसेंस विवाद और कानूनी विवाद खड़ा कर सकते हैं।

  • यह सुनिश्चित करना कि प्रतिबंध नियम रूप से लागू हों—कई मेडिकल स्टोर्स और निजी वितरण चैनल ऐसे हो सकते हैं, जो आदेशों से बचने के लिए काम करें।

  • इस निर्णय के प्रभाव को मापना—क्या ये निर्णय वास्तव में स्वास्थ्य जोखिम को कम करेगा या दवाओं की उपलब्धता में समस्या लाएगा।

  • कानूनी चुनौती यह हो सकती है कि क्या राज्य सरकार के पास संपूर्ण राज्य में एक ब्रांड को बंद करने का अधिकार है या केवल उस पर आरोप सिद्ध होने पर ऐसा करना चाहिए।

इन कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियों को सामना करना राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है।

संभावित प्रभाव और लाभ

मरीजों और स्वास्थ्य सुरक्षा पर प्रभाव

  • यदि प्रतिबंध सफलतापूर्वक लागू हो जाए, तो विषाक्त या संदिग्ध कफ सिरप द्वारा होने वाली संभावित हानि कम हो सकती है।

  • डॉक्टर, फार्मासिस्ट और जनता अधिक सतर्क होंगे—प्रिस्क्रिप्शन दवा उपयोग और दवा गुणवत्ता पर ध्यान बढ़ेगा।

  • यह निर्णय थ्रेशोल्ड जमीनी स्तर पर दवा सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर सकता है।

  • बच्चों के लिए दवा उपयोग पर गाइडलाइन्स अधिसूचित होने से, अनियंत्रित दवा उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को रोका जा सकेगा।

दवा बाजार, वितरण और विश्वास पर प्रभाव

  • Coldrif की ब्रांड छवि को गंभीर क्षति पहुँच सकती है। अन्य दवा कंपनियों पर भी अधिक निगरानी का दबाव बढ़ेगा।

  • मेडिकल स्टोर्स और फार्मासियों को वैकल्पिक ब्रांडों की ओर जाना पड़ेगा—कुछ मामलों में आपूर्ति समस्या हो सकती है।

  • जनता और डॉक्टरों का दवा उद्योग पर विश्वास उठ सकता है—लेकिन यदि जांच और परिणाम पारदर्शी हों तो विश्वास बहाल हो सकता है।

  • इस तरह की कार्रवाई अन्य राज्यों के लिए उदाहरण हो सकती है—बहु राज्यों में समान कार्रवाई शुरू हो सकती है।

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नीति और प्रणाली सुधार

  • समिति की रिपोर्ट और नई गाइडलाइन्स से भविष्य में बच्चों के लिए कफ दवाओं का उपयोग अधिक वैज्ञानिक और सुरक्षित हो सकता है।

  • नियंत्रण और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ किया जा सकता है—दवा गुणवत्ता निरीक्षण, वितरण ट्रेस ट्रैक, लाइसेंस नवीनीकरण आदि।

  • दवाओं की ऑनलाइन बिक्री और वितरण पर भी अधिक नियंत्रण हो सकता है।

  • राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और प्रशासनिक त्वरितता जनता में सकारात्मक संदेश भेज सकती है कि स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोच्च है।

आलोचनाएँ, चुनौतियाँ एवं संभावित प्रश्न

आलोचनाएँ और शंकाएँ

  1. क्या यह निर्णय बहुत जल्दबाज़ी में लिया गया?
    क्योंकि विवादित बैच राज्य में न पाया गया है, कुछ लोग कह सकते हैं कि पूर्ण बिक्री का रुकाव एक अधिक व्यापक कदम हो सकता है।

  2. दवा उपलब्धता पर असर
    यदि Coldrif जैसा लोकप्रिय ब्रांड हट जाए, तो विशेष वर्गों में दवा उपलब्धता में कमी आ सकती है।

  3. नियंत्रण का अनुपालन
    छोटे फार्मेसी या अनधिकृत वितरक आदेशों को अनदेखा कर सकते हैं।

  4. दोष सिद्धि की आवश्यकता
    न्यायसंगतता की दृष्टि से, प्रतिबंध लगाने से पहले दोष सिद्ध किया जाना चाहिए, वरना कानूनी विवाद हो सकते हैं।

  5. वैकल्पिक उपचार या ब्रांडों की निगरानी
    अगर Coldrif बंद किया जाए, तो अन्य ब्रांडों पर भी कड़ी जांच होनी चाहिए, प्रश्न यह उठता है कि क्या सरकार सिर्फ एक ब्रांड पर कार्रवाई कर रही है या व्यापक नीति बना रही है।

संभावित प्रश्न / अनिश्चितताएँ

  • समिति की रिपोर्ट कब आएगी और क्या वह सार्वजनिक होगी?

  • इस प्रतिबंध का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर कब दिखाई देगा?

  • क्या अन्य राज्यों में भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी?

  • दोषी पाए जाने पर कौन निवेशक, कंपनी या अधिकारी जिम्मेदार ठहराए जाएंगे?

  • दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को कैसे और मजबूत किया जाए?

  • क्या सरकार को दवा परीक्षण और निगरानी के लिए और संसाधन जुटाने होंगे?

Kerala की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने “Coldrif” कफ सिरप की बिक्री और वितरण निलंबन का आदेश सुरक्षा‑पहलकदमी के रूप में जारी किया है। हालांकि विवादित बैच राज्य में नहीं फेला है, लेकिन यह कदम संभावित दुष्प्रभावों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह एक साहसिक लेकिन संवेदनशील निर्णय है—जिसमें दवा गुणवत्ता, न्याय, नियंत्रण तंत्र और सार्वजनिक स्वास्थ्य सभी जुड़े हैं। यदि यह कदम सफल रूप से लागू हो, पुलिस और न्यायपालिका की चुनौती न हो, और समिति की रिपोर्ट समय पर आए—तो यह भारत में दवा सुरक्षा पर बेहतर नीति और जागरूकता की दिशा में मील का पत्थर बन सकता है।

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