Ganga माँ मेरे द्वार पर
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बाढ़ की विभीषिका के बीच एक पुलिस अधिकारी की भक्ति और सकारात्मकता ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। सब-इंस्पेक्टर चंद्रदीप निषाद, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट में निजी सुरक्षा अधिकारी के रूप में तैनात हैं, ने अपने घर में घुसे बाढ़ के पानी को “मां Ganga का आगमन” मानते हुए पूजा-अर्चना की और सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
घटना का विवरण
- प्रयागराज के दारागंज इलाके में Ganga और यमुना नदियों के जलस्तर में भारी वृद्धि हुई, जिससे कई घर जलमग्न हो गए।
- चंद्रदीप निषाद का घर भी बाढ़ के पानी में डूब गया, लेकिन उन्होंने इसे आपदा नहीं, बल्कि आस्था का अवसर माना।
- उन्होंने वर्दी में ही अपने घर के दरवाजे पर खड़े होकर बाढ़ के पानी में फूल और दूध अर्पित किए और कहा, “जय Ganga मैया की! मैं धन्य हो गया मां, आप मेरे दरवाजे पर दस्तक देने आईं”।

वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
- चंद्रदीप के वीडियो को अब तक करोड़ों बार देखा जा चुका है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर कई वीडियो पोस्ट किए हैं:
- एक वीडियो में वे कमर तक पानी में खड़े होकर पूजा करते दिखते हैं।
- दूसरे वीडियो में वे अपनी पहली मंजिल की खिड़की से पानी में छलांग लगाते हैं।
- तीसरे वीडियो में वे दो युवतियों के साथ बाढ़ के पानी में कूदते हैं और कहते हैं, “हमारी छोरियां छोरो से कम हैं के?”।
- उनके इंस्टाग्राम बायो के अनुसार, वे राष्ट्रीय स्तर के तैराक भी हैं।
श्रद्धा और आपदा का अनोखा संगम
- प्रयागराज को संगम नगरी कहा जाता है, जहां आस्था और प्रकृति का गहरा संबंध है।
- चंद्रदीप निषाद ने बाढ़ को संकट नहीं, बल्कि मां Ganga के साक्षात दर्शन का अवसर माना।
- उन्होंने कहा, “हज़ारों लोग उनके पास जाते हैं, मुझे कहीं जाने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वह मुझे आशीर्वाद देने आईं”।

बहस और चिंताएं
- जहां कई लोग उनकी श्रद्धा और सकारात्मकता की सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं:
- क्या यह घर नदी के प्रवाह क्षेत्र में बना हुआ है?
- क्या प्रशासन को ऐसे निर्माणों पर रोक नहीं लगानी चाहिए?
- कुछ यूज़र्स ने यह भी कहा कि भारत में नदियों का सम्मान जल प्रदूषण फैलाकर मनाया जाता है।
इंटरनेट सनसनी बनने का कारण
- चंद्रदीप निषाद का दृष्टिकोण लोगों को प्रेरित कर रहा है कि विपरीत परिस्थितियों में भी आस्था और सकारात्मकता बनाए रखी जा सकती है।
- उनके वीडियो में भक्ति गीतों का उपयोग, भावनात्मक संवाद और साहसिक तैराकी ने उन्हें एक सोशल मीडिया स्टार बना दिया है।

- यह घटना दर्शाती है कि कैसे एक साधारण व्यक्ति, अपने दृष्टिकोण और कर्मों से लाखों लोगों को प्रभावित कर सकता है।
“मां Ganga मेरे द्वार पर” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और सांस्कृतिक प्रतीक बन गया है। चंद्रदीप निषाद ने यह साबित किया कि जब आपदा आती है, तो डरने की बजाय उसे स्वीकार कर श्रद्धा से देखना भी एक विकल्प हो सकता है। उनकी यह पहल न केवल भक्ति का उदाहरण है, बल्कि सोशल मीडिया पर सकारात्मकता फैलाने का भी एक प्रेरणादायक तरीका बन गई है।
अगर आप चाहें, तो मैं इस विषय पर एक भावनात्मक कविता या भाषण भी तैयार कर सकता हूँ।
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