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Noida टेकie मौत मामला: योगी सरकार ने SIT जांच के आदेश दिए – पूरी जानकारी विस्तार से

सोचिए, एक सुबह आप खबर पढ़ते हैं कि Noida के एक फ्लैट में एक युवा टेक कर्मचारी मृत पाया गया। यही खबर पिछले महीने सुर्खियों में छा गई थी, जब 28 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमित शर्मा का शव सेक्टर-62 स्थित उनके अपार्टमेंट में पंखे से लटका मिला। परिवार ने शुरुआत से ही इसे हत्या बताया और काम के दबाव व छिपे दुश्मनों की ओर इशारा किया। मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर आक्रोश फैल गया और हजारों लोगों ने पुलिस से जवाब मांगे।

अब इस मामले में बड़ा मोड़ आया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने विशेष जांच टीम (SIT) के गठन का आदेश दिया है। यह फैसला स्थानीय पुलिस की जांच पर उठे सवालों, विरोध प्रदर्शनों और लगातार बढ़ते दबाव के बाद लिया गया। इससे यह उम्मीद जगी है कि अब अमित की मौत की सच्चाई सामने आएगी।

जांच में तेजी: SIT का दायरा और जिम्मेदारी

Noida टेकie मौत मामले में शुरुआत में पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया। 15 दिसंबर 2025 को अमित का शव उनके फ्लैट में मिला था। पुलिस का दावा था कि मौके से सुसाइड नोट मिला और संघर्ष के कोई निशान नहीं थे।
लेकिन पत्नी और माता-पिता ने इस पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सुसाइड नोट नकली लग रहा है और अमित के फोन से कई अहम मैसेज गायब हैं।

जैसे-जैसे यह बातें सामने आईं, लोगों का भरोसा पुलिस से उठने लगा। दोस्तों ने बताया कि अमित को आईटी कंपनी में एक बड़े प्रोजेक्ट में देरी को लेकर धमकियां मिल रही थीं। कुछ ही दिनों में ऑनलाइन याचिकाओं पर 50 हजार से ज्यादा हस्ताक्षर हो गए। इसी दबाव के चलते राज्य सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा।

क्यों नाकाफी मानी गई स्थानीय पुलिस की जांच

स्थानीय पुलिस ने महज एक हफ्ते में शुरुआती जांच पूरी कर ली। कुछ सहकर्मियों से पूछताछ हुई और घटनास्थल देखा गया, लेकिन अमित के लैपटॉप और डिजिटल डेटा की गहन फॉरेंसिक जांच नहीं हुई।

आलोचकों का कहना है कि इस जल्दबाजी में कई अहम सुराग छूट गए, जैसे—मौत से कुछ दिन पहले किए गए संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन।
Noida और एनसीआर में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां बाद में SIT जांच में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई थी। परिवार को डर था कि कहीं इस मामले में भी प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश न हो।

जब मीडिया में गवाहों के बयानों में विरोधाभास सामने आए, तो गुस्सा और बढ़ गया। लोगों ने Noida पुलिस मुख्यालय के पास प्रदर्शन किए और न्याय की मांग की।

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नई SIT की संरचना और अधिकार

गठित SIT में उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इसका नेतृत्व 20 साल से अधिक अनुभव वाले एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कर रहे हैं। टीम में साइबर क्राइम विशेषज्ञ, फॉरेंसिक एक्सपर्ट और गृह विभाग का प्रतिनिधि भी शामिल है।

SIT को विशेष अधिकार दिए गए हैं। यह टीम पुराने केस रिकॉर्ड जब्त कर सकती है, पहले जांच कर चुके पुलिसकर्मियों से पूछताछ कर सकती है और संदिग्ध कार्यालयों पर छापे भी मार सकती है। यह टीम सीधे डीजीपी को रिपोर्ट करेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर किसी तरह के दबाव की गुंजाइश कम हो।

SIT को छह महीने में पूरी रिपोर्ट सौंपनी है, लेकिन शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर पहले भी कार्रवाई हो सकती है।

अमित के आखिरी पलों और संदिग्धों की जांच

14 दिसंबर की रात अमित ऑफिस से देर से निकले थे। उस दिन ऑफिस में उनकी टीम की तीखी मीटिंग हुई थी। रात 10 बजे उनकी आखिरी कॉल पत्नी को गई, जिसमें वे काफी परेशान लग रहे थे और “किसी डील के गलत हो जाने” की बात कह रहे थे।

SIT अब उनके आखिरी 48 घंटों की डिजिटल ट्रैकिंग करेगी—फोन रिकॉर्ड, ऐप डेटा और कॉल डिटेल्स के जरिए। सहकर्मियों के बयानों की दोबारा जांच होगी।

अहम सबूतों की दोबारा जांच

SIT जिन बिंदुओं पर फोकस कर रही है, उनमें शामिल हैं:

  • अमित का मोबाइल फोन, जो बाद में एक सहकर्मी की डेस्क से मिला

  • अपार्टमेंट की CCTV फुटेज, जिसमें रात को एक संदिग्ध परछाई दिखी

Techie death: UP government cracks whip, Noida CEO removed; SIT formed to probe drowning incident | India News - The Times of India

  • सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग जांच

  • मौत के समय को लेकर टाइमलाइन में अंतर

विशेषज्ञों का मानना है कि ये सबूत आत्महत्या के बजाय हत्या की ओर इशारा कर सकते हैं।

संभावित मकसदों पर नई नजर

अमित एक बड़े AI सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा और कोड चोरी जैसे आरोप सामने आए हैं। SIT उनके ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से जुड़े लोगों से पूछताछ कर सकती है।

निजी विवाद भी जांच के दायरे में हैं—पड़ोसी से झगड़ा, आर्थिक तनाव और पारिवारिक लेन-देन। परिवार को शक है कि कुछ करीबी लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

कानूनी असर और मिसाल

10 जनवरी 2026 को गृह विभाग ने SIT गठन का आदेश जारी किया। इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में परिवार की याचिका पर भी सुनवाई तेज हुई। अदालत ने निष्पक्ष और तेज जांच पर जोर दिया है।

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर पुलिस की लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई और मुकदमे हो सकते हैं।

न्यायपालिका की भूमिका

हाईकोर्ट SIT से नियमित प्रगति रिपोर्ट मांग सकता है। अगर हत्या के सबूत मिलते हैं, तो मामला फास्ट-ट्रैक कोर्ट में जा सकता है।
परिवार ने गवाहों की सुरक्षा के लिए भी याचिका दी है, जिस पर अदालत ने सकारात्मक रुख दिखाया है।

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Noida और NCR में पुलिस जवाबदेही पर असर

यह मामला Noida पुलिस के लिए चेतावनी की तरह है। अब संदिग्ध मौतों में साइबर और फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य किया जा सकता है।
एनसीआर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की विशेष जांच टीमों का मॉडल अपनाया जा सकता है।

जनता की प्रतिक्रिया और न्याय की उम्मीद

SIT की खबर आते ही सोशल मीडिया पर #JusticeForAmit ट्रेंड करने लगा। कई मशहूर हस्तियों और टेक प्रोफेशनल्स ने समर्थन दिया। अमित के सहकर्मियों ने कैंडल मार्च निकालकर परिवार के साथ एकजुटता दिखाई।

आगे क्या?

जनवरी के अंत तक SIT की पहली ब्रीफिंग आने की उम्मीद है। फरवरी तक अंतरिम रिपोर्ट डीजीपी को सौंपी जा सकती है। अगर गिरफ्तारी होती है, तो मामला और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

Noida टेकie मौत मामले में SIT का गठन एक निर्णायक कदम है। यह सिर्फ अमित शर्मा के लिए न्याय की लड़ाई नहीं, बल्कि शहरी भारत में कामकाजी युवाओं की सुरक्षा और सिस्टम की जवाबदेही का सवाल भी है।
योगी सरकार का यह कदम भरोसा बहाल करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें SIT की जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं।