नई दिल्ली, 01 अप्रैल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पवित्र रमजान माह के दौरान इबादत के लिए
निजामुद्दीन स्थित मरकज मस्जिद को पूरी तरह से खोलने की इजाजत दे दी है।
न्यायालय ने भूतल और अन्य
चार मंजिलों को इबादत के लिए खोलने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही जस्टिस जसमीत सिंह ने मरकज
प्रबंधन को यह सनिश्चित करने का आदेश दिया है
कि मस्जिद के सभी मंजिलों के प्रवेश, निकास और सीढ़ियों के
आसपास सीसीटीवी पूरी तरह से काम करे।
न्यायालय ने साफ कहा कि मस्जिद में सिर्फ नमाज और धार्मिक
प्रार्थना की अनुमति होगी।
मस्जिद में किसी भी तरह की तब्लीगी गतिविधियां और व्याख्यान की इजाजत नहीं हो
सकती। न्यायालय ने कहा कि रमजान माह और ईद उल फितर के लिए मस्जिद में नमाज की अनुमति दी जा रही
है।
यहां कोई व्याख्यान नहीं होगा। उच्च न्यायालय ने दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल याचिका पर यह आदेश
दिया है।
पिछले महीने याचिका दाखिल की थी : पिछले माह दाखिल याचिका में बोर्ड ने शब-ए-बारात और रमजान के
मद्देनजर इबादत के लिए मरकज मस्जिद को पूरी तरह से खोलने की मांग की थी।
इस मामले में उच्च न्यायालय
ने 16 मार्च को आदेश पारित करते हुए शब-ए बारात के लिए पुलिस को पूरी तरह से मस्जिद को खोलने की
अनुमति देने का आदेश दिया था।
इसी आदेश में न्यायालय ने बोर्ड को रमजान के लिए मस्जिद को पूरी तरह से
खोलने की मांग को लेकर निजामुद्दीन थाने के प्रभारी को आवेदन देने को कहा था।
इस मामले में गुरुवार को
दिल्ली पुलिस ने न्यायालय को बताया था कि रमजान के दौरान भी इबादत के लिए मरकज मस्जिद को उन शर्तों
के साथ खोलने की अनुमति दे दी गई है
जो शर्तें अदालत ने शब-ए-बारात के दौरान लगाई थी।
कोरोना संक्रमण से
बचाव के लिए जारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर मस्जिद में तब्लीगी जमात का कार्यक्रम किए जाने पर मार्च,
2020 में दिल्ली पुलिस ने मस्जिद को सील कर दिया था। इस कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर विदेशों से आए लोग
शामिल हुए थे।

