Narendra Modi
कल्पना कीजिए एक ऐसी फैक्ट्री की, जो आपकी जेब में रखे मोबाइल फोन और सड़कों पर दौड़ती कारों को शक्ति दे सके। यही वादा करती है Gujarat में बनने वाली माइक्रोन की नई यूनिट। फरवरी 2026 में अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi इस सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन करेंगे। यह भारत के लिए चिप निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।
अमेरिका की अग्रणी मेमोरी चिप कंपनी Micron Technology इस परियोजना का नेतृत्व कर रही है। कंपनी यहां लगभग 2.75 अरब डॉलर का निवेश करेगी। गुजरात के Dholera में स्थित यह प्लांट मुख्य रूप से असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग (ATP) पर केंद्रित होगा। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगी।
माइक्रोन Gujarat प्लांट का रणनीतिक महत्व
निवेश और उत्पादन क्षमता
पहले चरण में लगभग 800 मिलियन डॉलर का निवेश किया जाएगा, जबकि पूर्ण परियोजना 2.75 अरब डॉलर तक पहुंचेगी। यहां DRAM और NAND जैसी मेमोरी चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग होगी।
अनुमान है कि शुरुआती वर्षों में लगभग 5,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से 15,000 से अधिक रोजगार अवसर बन सकते हैं। इंजीनियर, तकनीशियन, पैकेजिंग विशेषज्ञ और सप्लाई चेन प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। यह प्लांट Gujarat को वैश्विक टेक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएगा।

वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति
वर्तमान में अधिकांश चिप्स ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से आयात होते हैं। भारत 90% से अधिक चिप्स आयात करता है। डोलेरा में यह यूनिट असेंबली और टेस्टिंग को भारत में लाकर जोखिम कम करेगी।
‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के तहत कंपनियां वैकल्पिक निर्माण केंद्र खोज रही हैं। भारत कुशल श्रम, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी प्रोत्साहनों के कारण एक मजबूत विकल्प बन रहा है।
पीएम मोदी की भूमिका और सरकारी नीतियां
प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना
भारत सरकार की PLI योजना के तहत सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को 50% तक वित्तीय सहायता दी जाती है। सरकार ने इस क्षेत्र के लिए 10 अरब डॉलर का विशेष पैकेज घोषित किया है।
तेज मंजूरी, भूमि आवंटन और बुनियादी ढांचे की तैयारी ने माइक्रोन को तेजी से काम शुरू करने में मदद की। यह नीति-समर्थन भारत में विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है।
विदेशी निवेश को बढ़ावा
इस उद्घाटन से वैश्विक कंपनियों को संदेश जाएगा कि भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए तैयार है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और बढ़ने की संभावना है।
तकनीकी पहलू: असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग (ATP)
डोलेरा प्लांट में OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) मॉडल अपनाया जाएगा।
असेंबली: चिप के सूक्ष्म घटकों को जोड़ना
टेस्टिंग: गुणवत्ता और प्रदर्शन की जांच
पैकेजिंग: सुरक्षित और उपयोग के लिए तैयार करना
फ्लिप-चिप जैसी उन्नत तकनीक से छोटे और तेज चिप्स तैयार किए जाएंगे, जो स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोगी होंगे।

डोलेरा में इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोसिस्टम विकास
डोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन में 24×7 बिजली, जल पुनर्चक्रण प्रणाली और बेहतर लॉजिस्टिक्स की सुविधा होगी। निकटवर्ती बंदरगाह और हवाई अड्डे से निर्यात आसान होगा।
आने वाले वर्षों में रसायन, मशीन टूल्स और सपोर्ट सर्विसेज से जुड़ी कई सहायक कंपनियां भी यहां स्थापित हो सकती हैं।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
कौशल विकास
माइक्रोन IITs और स्थानीय कॉलेजों के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगी। युवाओं को सेमीकंडक्टर तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और उन्नत मशीनरी संचालन की ट्रेनिंग मिलेगी।
यह पहल Gujarat और देशभर के युवाओं के लिए उच्च वेतन वाले तकनीकी रोजगार के अवसर खोलेगी।

Gujarat की औद्योगिक तस्वीर में बदलाव
ऑटोमोबाइल और पेट्रोकेमिकल्स के बाद अब सेमीकंडक्टर उद्योग Gujarat की नई पहचान बन सकता है। यह परियोजना राज्य की GDP में उल्लेखनीय योगदान दे सकती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगी।
भारत का सेमीकंडक्टर भविष्य
माइक्रोन का Gujarat प्लांट केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता के सपने की मजबूत नींव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका उद्घाटन देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक नई पहचान देगा।
आने वाले वर्षों में भारत मेमोरी चिप असेंबली और टेस्टिंग में प्रमुख भूमिका निभा सकता है। यह पहल न केवल आयात निर्भरता कम करेगी, बल्कि लाखों युवाओं के लिए भविष्य के अवसर भी खोलेगी।
यह सिर्फ शुरुआत है—भारत का सेमीकंडक्टर सफर अब तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

