नई दिल्ली, 17 अप्रैल पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू क्षेत्रों (फील्ड) से शहरी गैस वितरकों (सीजीडी) के
लिए प्राकृतिक गैस का नया आवंटन बंद कर दिया है
जिससे सीएनजी और पीएनजी (पाइप के जरिये घरों में
आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस) के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
हालांकि, मंत्रालय ने कहा है कि आवंटन
रोका नहीं गया है
और क्षेत्र को अधिक गैस देने से बिजली और उर्वरक जैसे क्षेत्रों के लिए आपूर्ति में कटौती करनी
पड़ेगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय के इस कदम से क्षेत्र में दो लाख करोड़ रुपये की निवेश योजना की व्यवहार्यता को लेकर
;अंदेशा पैदा हो गया है।
इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के शहरी गैस वितरण क्षेत्र को ;बिना
कटौती; के प्राथमिकता के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति के निर्णय के बावजूद क्षेत्र को आपूर्ति मार्च, 2021
की मांग के स्तर के आधार पर की जा रही है। इसके चलते शहरी गैस वितरण कंपनियों को ऊंची कीमत पर
आयातित एलएनजी की खरीद करनी पड़ रही है
जिससे गैस की कमी हो गई है और कीमतों में उछाल आया है।
मंत्रालय ने कहा कि उसे सीजीडी इकाइयों से अक्टूबर, 2021 से मार्च, 2022 के लिए अद्यतन आंकड़े मिलने का
इंतजार है,
जिसके आधार पर अप्रैल, 2022 में आवंटन किया जा सके। अभी तक इन इकाइयों से ये आंकड़े नहीं
मिले हैं।
इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय ने ऐसा नहीं किया है और पिछले एक साल से
अधिक से गैस का कोई नया आवंटन नहीं किया है।
आवंटन में कमी के अलावा सीएनजी और पीएनजी के लिए
एपीएम गैस के दाम 2.90 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (प्रति इकाई) से बढ़ाकर 6.10 डॉलर प्रति
इकाई कर दिए गए हैं। इस तरह एपीएम गैस के दामों में 110 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय को हर साल प्रत्येक छह माह में यानी अप्रैल और अक्टूबर में पिछले छह महीनों की
सत्यापित मांग के आधार पर घरेलू गैस का आवंटन करना होता है।
लेकिन मार्च, 2021 से इस तरह कोई आवंटन
नहीं किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि अक्टूबर, 2020 और मार्च, 2021 की खपत के आंकड़ों के आधार पर
अप्रैल-अक्टूबर, 2021 के आवंटन को पिछले साल अप्रैल में संशोधित किया गया था।
शहरी गैस वितरण इकाइयों ने मंत्रालय से क्षेत्र को गैस की आपूर्ति 'नो कट' श्रेणी में पिछले दो माह के औसत के
आधार पर देने का आग्रह किया है। इससे उन्हें सीएनजी और पीएनजी की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
नए क्षेत्रों में सीएनजी नेटवर्क और आपूर्ति के विस्तार से मौजूदा शहरों में सीएनजी की मांग काफी तेजी से बढ़ी है।
घरेलू क्षेत्रों से आवंटन की कमी का मतलब है कि ऑपरेटरों को आयातित तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी)
खरीदनी होगी जिसकी कीमती घरेलू दरों से कम-से-कम छह गुना अधिक हैं।
इसी का नतीजा है कि पिछले एक
साल से कुछ अधिक में सीएनजी का दाम 60 प्रतिशत या 28 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गए हैं।
वहीं पीएनजी की
कीमतों में एक-तिहाई यानी करीब 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

