जयपुर, 05 सितंबर । राजस्थान से राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद
तिवारी ने केन्द्र की मोदी सरकार पर देश में महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक तनाव, ध्वस्त होती
संस्थाओं का एक भयानक अनुभव देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इस कारण इन समस्याओं
के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए सात सितंबर से भारत जोड़ों यात्रा निकालने की जरुरत
पड़ी हैं।
श्री तिवाड़ी ने पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस की भारत जोड़ों यात्रा के बारे में बताते हुए आज यहां
यह बात कही। उन्होंने कहा कि गत चार सितंबर को दिल्ली में महंगाई पर हल्ला बोल रैली के बाद
बुधवार को भारत जोड़ों यात्रा के साथ कांग्रेस इस दिशा में अगला कदम उठाने जा रही है। इस यात्रा
में देश के सामने मौजूद गंभीर विषयों पर देशवासियों के साथ सीधा संवाद किया जायेगा। उन्होंने
बताया कि यात्रा कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली जायेगी, जिसमें 150 दिनों में 3500
किलामीटर का रास्ता तय करके देश भर के लाखों लोगों के साथ बातचीत की जायेगी।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा तीन प्रमुख समस्याएं आर्थिक असमानताएं, सामाजिक भेदभाव और
राजनीतिक तौर पर जरुरत से अधिक केन्द्रीकरण पर केन्द्रित हैं और इन तीन प्रमुख समस्याओं के
खिलाफ सभी भारतीयों को एकजुट करने के लिए यह यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने मोदी सरकार
पर देश की संपत्ति एवं परसंपत्तियों को भारी नुकसान पर अरबपति पूंजीपतियों को बेचे जाने एवं
उद्योगपतियों का कर्जा माफी आदि का आरोप लगाते हुए कहा कि जो अडानी कर्जे में डूबे थे आज
एशिया में सबसे अमीर बन गये हैं।
उन्होंने कहा कि वह दिन भी दूर नहीं कि भारतीय रेल की जगह
अडानी रेल चलने लगे।
उन्होंने आरोप लगाया किया देश की संपत्ति दो लोगों को दी जा रही हैं
खासकर अडानी को।
श्री तिवारी ने कहा राजनीतिक रुप से देखा जाये तो आज लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है
और हमारे संवैधानिक अधिकार कुचले जा रहे हैं।
संसद और मीडिया जैसी संस्थाओं में अब हम
अपने जीवन की समस्याओं और जरुरतों पर भी चर्चा नहीं कर सकते। एक योजनाबद्ध तरीके से
हमारे संविधान को उलटने, हमारी संस्थाओं को ध्वस्त करने, हमारे लोकतंत्र को खोखला करने, एकता
और भाईचारे को समाप्ता करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विपक्षी दलों की राज्य सरकारें धन, बल
और एजेंसियों का दुरुपयोग कर गिराई जा रही है।
राज्यों की आवाज को दबाया जा रहा है, उन्हें
केन्द्र सरकार की ओर से राज्य के हिस्से पर राजस्व की बकाया रकम समय पर नहीं मिल रही है।
दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों को उनके मूल अधिकारों जल, जंगल और जमीन से वंचित रखा जा
रहा है।

