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मस्कट में Modi : खाड़ी और अफ्रीका कूटनीतिक पहल के निर्णायक चरण में भारत–ओमान संबंधों को मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र Modi आज मस्कट पहुँचे—तीन देशों की व्यस्त यात्रा का अंतिम पड़ाव। इससे पहले वे रवांडा और युगांडा गए, और यूएई में भी अहम बैठकें हुईं। ओमान का चयन यूँ ही नहीं है। खाड़ी क्षेत्र के केंद्र में स्थित ओमान तेल आपूर्ति, समुद्री मार्गों और व्यापार के लिहाज़ से बेहद रणनीतिक है। हवाईअड्डे पर ओमान के उप-प्रधानमंत्री का गर्मजोशी भरा स्वागत और भारतीय समुदाय की गूंजती तालियाँ दोनों देशों के गहरे भरोसे का संकेत देती हैं।

तीन देशों की यात्रा का संदर्भ

अफ्रीका चरण में Modi ने रवांडा और युगांडा के साथ तकनीक और कृषि सहयोग पर ज़ोर दिया। यूएई में निवेश, रोजगार और रणनीतिक साझेदारी पर फोकस रहा। मस्कट इस पूरी कड़ी को जोड़ता है—भारत की बहु-क्षेत्रीय मित्रता और वैश्विक भूमिका को मज़बूत करने की रणनीति का स्वाभाविक विस्तार।

ओमान में स्वागत का महत्व

ओमान के उप-प्रधानमंत्री ने पूर्ण सम्मान के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। झंडे लहराए, बैंड बजे, और लगभग 7–8 लाख भारतीयों वाले प्रवासी समुदाय ने जोश के साथ अभिनंदन किया। यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही साझेदारी और लोगों से लोगों के रिश्तों की पुष्टि है—आने वाली बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल।

रणनीतिक अनिवार्यताएँ: भारत के लिए ओमान क्यों अहम?

ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार गलियारे

भारत अपनी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा खाड़ी से लेता है। ओमान भारत की लगभग 5% तेल आपूर्ति करता है और एलएनजी समझौते भी हैं। द्विपक्षीय व्यापार करीब 12 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है, लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में इसे दोगुना करना है। तेल भंडारण, हरित ऊर्जा और बंदरगाह सहयोग जैसे प्रस्ताव चर्चा में हैं। ओमान के बंदरगाह भारत को यूरोप और अफ्रीका से तेज़ी से जोड़ते हैं—एक सुचारु “हाईवे” जैसा असर।

PM Modi arrives in Oman on final leg of three-nation tour

हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में सुरक्षा सहयोग

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20% तेल का आवागमन होता है—ओमान इसका एक अहम प्रहरी है। भारत–ओमान संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, समुद्री गश्त और खुफिया साझाकरण बढ़ा रहे हैं। डुक्म (Duqm) में बंदरगाह पहुंच भारतीय नौसेना की त्वरित तैनाती को आसान बनाती है। आतंकवाद-रोधी प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा दोनों के साझा हित हैं।

अरब दुनिया से भारत का सेतु

ओमान खाड़ी के अन्य देशों से संवाद में भारत का सेतु बनता है। जीसीसी स्तर पर रोजगार, तकनीक और शांति प्रयासों में यह भूमिका उपयोगी है। मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए ओमान की मध्यस्थता भारत के हितों से मेल खाती है।

द्विपक्षीय पहल: मस्कट में समझौते और घोषणाएँ

आर्थिक और निवेश समझौते

अगले तीन वर्षों में 5 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। बुनियादी ढांचा, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, खाद्य और फार्मा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। ओमान भारतीय चावल और दवाओं का आयात बढ़ाएगा, जबकि भारत स्मार्ट सिटी और तकनीकी सहयोग देगा—तेल-निर्भरता से आगे बढ़ने की दिशा में कदम।

रक्षा और समुद्री सहयोग

नया लॉजिस्टिक्स समझौता, डुक्म में बेहतर पोर्ट एक्सेस, और संयुक्त अभ्यासों का विस्तार तय हुआ। ड्रोन और रक्षा खरीद पर भी चर्चा हुई। खाड़ी में सुरक्षित समुद्री मार्ग दोनों की प्राथमिकता है।

लोगों से लोगों के रिश्ते

प्रधानमंत्री Modi ने प्रवासी भारतीयों से संवाद किया और उनके योगदान की सराहना की। वीज़ा प्रक्रियाओं में सुधार, स्वास्थ्य सहायता और कौशल प्रशिक्षण फंड जैसे कदम घोषित हुए—परिवारों और कामगारों के लिए राहत।

PM Modi arrives in Oman for final leg of three-nation tour - Telangana Today

प्रवासी भारतीय: दो देशों के बीच सेतु

आर्थिक योगदान

ओमान से भारत को सालाना 3 अरब डॉलर से अधिक की रेमिटेंस मिलती है। भारतीय इंजीनियर, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी और बैंकिंग पेशेवर ओमान की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं।

सांस्कृतिक आदान–प्रदान

योग, दीपावली और सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थानीय समुदाय को जोड़ते हैं। भाषा विद्यालय और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भारत की सॉफ्ट पावर को मज़बूत करती हैं—स्वाभाविक, टिकाऊ सद्भाव का निर्माण।

वैश्विक तालमेल और आगे की राह

दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों, आतंकवाद के खिलाफ़ रुख और क्षेत्रीय स्थिरता पर सहमत हैं। ओमान के सुल्तान की संभावित भारत यात्रा, त्रैमासिक कार्यसमूह बैठकों और 2030 तक 25 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य जैसे कदम भविष्य की दिशा तय करते हैं।

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रणनीतिक साझेदारी को ठोस रूप

मस्कट यात्रा भारत की व्यापक कूटनीति का निर्णायक अध्याय है। ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री रक्षा और प्रवासी संबंध—तीनों स्तंभ मज़बूत हुए। अफ्रीका से खाड़ी तक की यह यात्रा भारत को एक विश्वसनीय, सक्रिय वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित करती है।

मुख्य बातें

  • ऊर्जा और निवेश समझौतों से व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

  • रक्षा व समुद्री सहयोग से सुरक्षित मार्ग

  • प्रवासी कल्याण और सांस्कृतिक रिश्तों को नई गति

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