National हेराल्ड मामला: Delhi High Court में 9 मार्च को सुनवाई, Enforcement Directorate की याचिका पर नजर
भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित मामलों में से एक National हेराल्ड केस अब एक अहम मोड़ पर है। 9 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उसने निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है। इस आदेश में Sonia Gandhi और Rahul Gandhi को जारी समन रद्द कर दिए गए थे।
यह सुनवाई तय करेगी कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आगे बढ़ेगी या नहीं।
मामला क्या है?
National हेराल्ड अखबार का प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) द्वारा किया जाता था। 2010 में कांग्रेस पार्टी ने AJL को लगभग 90 करोड़ रुपये का ऋण दिया। बाद में यह ऋण यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को स्थानांतरित किया गया, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी निदेशक हैं।
ED का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए AJL की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल किया गया और यह धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” की श्रेणी में आता है।
कांग्रेस का कहना है कि यह एक वैध वित्तीय लेन-देन था और इसमें कोई गैरकानूनी लाभ नहीं लिया गया।
ED की याचिका: 9 मार्च की सुनवाई क्यों अहम?
निचली अदालत ने पहले ED द्वारा जारी समन को रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ ED ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की है।

ED का तर्क है कि:
उसे PMLA के तहत पूछताछ और संपत्ति जब्त करने का अधिकार है।
जांच में बाधा डालना कानून की प्रक्रिया में हस्तक्षेप है।
यदि हाई कोर्ट ED के पक्ष में फैसला देता है, तो एजेंसी की जांच को नई गति मिल सकती है। यदि याचिका खारिज होती है, तो जांच की दिशा बदल सकती है।
सोनिया और राहुल गांधी की भूमिका
सोनिया गांधी और राहुल गांधी यंग इंडियन के निदेशक हैं। ED का दावा है कि इस कंपनी के जरिए AJL की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल किया गया।
दोनों नेताओं ने पहले ED के समक्ष पेश होकर पूछताछ का सामना किया है। उन्होंने अदालत में यह दलील दी है कि मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और PMLA का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
कानूनी और राजनीतिक असर
यह मामला सिर्फ कानूनी विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील है।
भाजपा इसे कांग्रेस में कथित भ्रष्टाचार का उदाहरण बता रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग विपक्ष को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
इससे पहले भी कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ ED की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। इसलिए 9 मार्च की सुनवाई को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

PMLA के तहत क्या है दांव पर?
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत:
यदि “अपराध से अर्जित आय” साबित होती है, तो संपत्ति जब्त की जा सकती है।
आरोपी को अपनी बेगुनाही साबित करनी होती है।
National हेराल्ड केस इस बात की परीक्षा बन गया है कि राजनीतिक और कॉरपोरेट लेन-देन के मामलों में PMLA की व्याख्या कितनी व्यापक हो सकती है।
आगे क्या?
9 मार्च की सुनवाई यह तय करेगी कि:
ED की जांच पूरी ताकत से आगे बढ़ेगी या
अदालत जांच पर रोक को बरकरार रखेगी।
यह फैसला केवल एक मामले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में राजनीतिक दलों और उनसे जुड़ी कंपनियों के वित्तीय मामलों पर भी असर डाल सकता है।
National हेराल्ड मामला भारतीय राजनीति, कानून और सत्ता संतुलन का प्रतीक बन चुका है। दिल्ली हाई कोर्ट की 9 मार्च की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि जांच एजेंसियों की शक्ति और राजनीतिक जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे तय होगा।
अब सबकी नजर अदालत के फैसले पर है—क्या यह जांच को नई दिशा देगा या मौजूदा स्थिति को कायम रखेगा?

