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भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी का विकास-Netanyahu

भारत और इज़राइल के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए, लेकिन सहयोग की शुरुआत इससे पहले ही हो चुकी थी। समय के साथ यह रिश्ता रक्षा, कृषि, प्रौद्योगिकी और व्यापार तक फैल गया।

रक्षा और तकनीक से शुरू हुई मजबूती

  • इज़राइल ने अतीत में भारत को रक्षा उपकरणों में सहयोग दिया।

  • कृषि क्षेत्र में ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीक ने भारत के शुष्क क्षेत्रों में क्रांति लाई।

  • आज रक्षा व्यापार दोनों देशों के संबंधों की रीढ़ है।

प्रमुख रक्षा सहयोग:

  • स्पाइक एंटी-टैंक मिसाइलें

  • हेरॉन ड्रोन

  • बराक-8 मिसाइल रक्षा प्रणाली

इन सौदों में केवल खरीद ही नहीं, बल्कि संयुक्त उत्पादन और तकनीकी हस्तांतरण भी शामिल है, जिससे “मेक इन इंडिया” को बल मिलता है।

रक्षा से आगे: नवाचार और तकनीकी साझेदारी

भारत और इज़राइल साइबर सुरक्षा, फिनटेक और स्टार्टअप सहयोग में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

  • बेंगलुरु में संयुक्त साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण पहल

  • भारत-इज़राइल इनोवेशन ब्रिज के तहत सैकड़ों स्टार्टअप सहयोग

  • IIT और तेल अवीव विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान

यह सहयोग दोनों देशों को वैश्विक टेक इकोसिस्टम में मजबूत बनाता है।

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Netanyahu द्वारा भारत को “वैश्विक शक्ति” बताने का रणनीतिक अर्थ

इज़राइल द्वारा भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में मान्यता देना कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

  1. भारत अब विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

  2. G20 और अन्य मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका बढ़ी है।

  3. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण है।

नेतन्याहू का यह बयान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।

इज़राइल की रणनीतिक गणना

मध्य-पूर्व की जटिल परिस्थितियों के बीच इज़राइल एशिया में मजबूत साझेदार चाहता है।

भारत:

  • एक बड़ा रक्षा बाज़ार है

  • स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था रखता है

  • इंडो-पैसिफिक में प्रभावशाली शक्ति है

चीन के साथ संतुलन और पश्चिम एशिया की अनिश्चितता के बीच भारत इज़राइल के लिए विश्वसनीय भागीदार बनकर उभरा है।

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साझा लोकतांत्रिक मूल्यों की कथा

दोनों नेता आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर देते हैं।

  • कानून का शासन

  • स्वतंत्र चुनाव

  • तकनीकी नवाचार

यह साझा नैरेटिव दोनों देशों के घरेलू समर्थन को मजबूत करता है और वैश्विक मंचों पर सहयोग को वैधता देता है।

व्यक्तिगत मित्रता का नीतिगत प्रभाव

जब शीर्ष नेता व्यक्तिगत स्तर पर भरोसा साझा करते हैं, तो:

  • समझौते तेजी से आगे बढ़ते हैं

  • उच्च स्तरीय वार्ता सरल होती है

  • नौकरशाही अड़चनें कम होती हैं

उदाहरण के तौर पर, व्यापार और तकनीकी समझौतों को गति मिली है। उच्च स्तरीय यात्राओं के दौरान महत्वपूर्ण घोषणाएं हुई हैं, जिससे नीति क्रियान्वयन तेज हुआ।

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भविष्य की संभावनाएं

आने वाले वर्षों में सहयोग के नए क्षेत्र हो सकते हैं:

  • अंतरिक्ष अनुसंधान में संयुक्त परियोजनाएं

  • हरित ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन

  • उन्नत साइबर और AI आधारित सुरक्षा

यदि वर्तमान गति बनी रही, तो द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक साझेदारी और गहराई पकड़ सकती है।

व्यक्तिगत रिश्ता, वैश्विक असर

Netanyahu -मोदी की मित्रता केवल दो नेताओं की निजी समझ नहीं, बल्कि भारत-इज़राइल संबंधों की दिशा तय करने वाला कारक है।

रक्षा, तकनीक, व्यापार और वैश्विक राजनीति—हर क्षेत्र में यह व्यक्तिगत भरोसा रणनीतिक सहयोग को मजबूती देता है।

बदलती वैश्विक व्यवस्था में ऐसे व्यक्तिगत समीकरण बड़ी भूमिका निभाते हैं। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी न केवल दोनों देशों, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।

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