बजट 2026: प्रत्यक्ष कर में बड़ा बदलाव — कम TCS, आसान फाइलिंग और आपकी जेब पर असर
कल्पना कीजिए कि टैक्स से जुड़ी झंझट कम हो जाए और आपकी जेब में ज़्यादा पैसा बचे। बजट 2026 में प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में ऐसे ही बदलाव किए गए हैं। टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की दरों में कमी, आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग को आसान बनाना और टैक्स दरों में राहत—ये सब आम नागरिकों और व्यवसायों को सीधे फायदा देने के लिए हैं।
आइए विस्तार से समझते हैं कि ये बदलाव आपके वित्तीय जीवन को कैसे प्रभावित करेंगे।
व्यक्तिगत आयकर में बड़े बदलाव
संशोधित टैक्स स्लैब और दरें
नई कर व्यवस्था (New Regime) में:
₹3 लाख तक आय — कोई टैक्स नहीं
₹3 लाख से ₹7 लाख — 5%
₹7 लाख से ₹10 लाख — 10% (पहले 15%)
इससे मध्यम वर्ग को खास राहत मिलेगी। उदाहरण के लिए, ₹9 लाख सालाना कमाने वाले परिवार को लगभग ₹10–15 हजार सालाना अतिरिक्त बचत हो सकती है।
पुरानी व्यवस्था (Old Regime) में:
₹5 लाख तक की आय पर रिबेट को मजबूत किया गया है।
₹8 लाख आय पर लगभग ₹25,000 तक टैक्स बचत संभव।
इससे परिवारों की डिस्पोजेबल इनकम में 8–10% तक बढ़ोतरी हो सकती है।

कटौतियों (Deductions) में बदलाव
धारा 80C की सीमा ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख।
स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹60,000।
HRA नियमों में ढील—नॉन-मेट्रो शहरों में भी बेहतर छूट।
सुझाव:
PPF, ELSS और NPS में निवेश बढ़ाएं।
किराए के मकान पर HRA क्लेम सही तरीके से करें।
सैलरी स्लिप में स्टैंडर्ड डिडक्शन की पुष्टि करें।
कैपिटल गेन टैक्स में राहत
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर ₹1.25 लाख तक छूट।
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) 20% से घटाकर 15%।
प्रॉपर्टी पर 20% टैक्स (इंडेक्सेशन के साथ) जारी।
लंबी अवधि के निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और इक्विटी निवेशकों को फायदा होगा।

TCS (Tax Collected at Source) में बड़ी राहत
नई TCS दरें
| श्रेणी | पुरानी दर | नई दर |
|---|---|---|
| LRS के तहत विदेश रेमिटेंस | 20% | 5–10% |
| विदेशी टूर पैकेज | 20% | 5% |
| विदेश में सामान खरीद | 2% | 1% |
नई सीमा ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख की गई है।
उदाहरण:
अगर आप ₹10 लाख विदेश में पढ़ाई के लिए भेजते हैं—
पहले ₹2 लाख TCS लगता था, अब केवल ₹50,000।
यानी ₹1.5 लाख तुरंत बचत!
इससे परिवारों और व्यवसायों की नकदी स्थिति (cash flow) बेहतर होगी।
अनुपालन (Compliance) में आसानी
TCS जमा करने की प्रक्रिया सरल।
New डिजिटल पोर्टल।
देरी पर 1% मासिक ब्याज लागू रहेगा।
बैंक स्टेटमेंट में TCS क्रेडिट ट्रैक करें और ITR में क्लेम करना न भूलें।

आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग अब आसान
प्री-फिल्ड ITR फॉर्म
ITR-1 और ITR-2 को सरल बनाया गया।
AIS और TIS से 90% डेटा ऑटो-फिल।
फाइलिंग समय में भारी कमी।
कैसे फाइल करें:
ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें।
प्री-फिल्ड डेटा चेक करें।
डिडक्शन जोड़ें।
OTP से ई-वेरिफाई करें।
New डिजिटल टूल्स
मोबाइल ऐप से रिफंड ट्रैकिंग।
AI चैट सपोर्ट।
फेसलेस असेसमेंट में वीडियो कॉल सुविधा।
टैक्स विवादों का समाधान 6 महीने के भीतर।
कॉरपोरेट टैक्स और व्यवसायों के लिए राहत
मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए 15% दर जारी।
स्टार्टअप्स के लिए 22% टैक्स।
MAT घटाकर 13%।
ट्रांसफर प्राइसिंग नियम आसान।
लेट फाइलिंग पेनल्टी घटाकर 0.5% प्रति माह।
ग्रीन टेक्नोलॉजी निवेश पर अतिरिक्त प्रोत्साहन।

आपके लिए क्या मायने?
✔ ज्यादा टेक-होम सैलरी
✔ कम TCS से बेहतर कैश फ्लो
✔ आसान और तेज ITR फाइलिंग
✔ निवेश पर बेहतर रिटर्न
अब आपको क्या करना चाहिए?
80C निवेश बढ़ाने की योजना बनाएं।
विदेशी खर्च पर TCS दरें जांचें।
प्री-फिल्ड ITR टूल का इस्तेमाल करें।
व्यवसाय हैं तो ट्रांसफर प्राइसिंग रिकॉर्ड अपडेट रखें।
बजट 2026 का प्रत्यक्ष कर ढांचा आम नागरिक और व्यवसाय दोनों के लिए राहत लेकर आया है। कम TCS, सरल फाइलिंग और टैक्स दरों में कमी से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और आपकी वित्तीय योजना मजबूत होगी।
अब समय है समझदारी से टैक्स प्लानिंग करने का—ताकि हर बचाया हुआ रुपया आपके भविष्य को सुरक्षित बनाए।

