Japan दौरे पर सीएम योगी के लिए ‘नो ऑनियन-गार्लिक’ विशेष शाकाहारी मेन्यू
जब Yogi Adityanath टोक्यो की धरती पर उतरेंगे, तो यह दौरा केवल निवेश और कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा। उनके सख्त “नो ऑनियन, नो गार्लिक” नियम ने इस यात्रा को अलग पहचान दे दी है। Japan जैसे देश में, जहां व्यंजनों में प्याज और लहसुन का व्यापक उपयोग होता है, वहां उनके लिए विशेष सात्विक मेन्यू तैयार किया जा रहा है।
यह केवल खान-पान की पसंद नहीं, बल्कि उनकी आध्यात्मिक जीवनशैली और अनुशासन का हिस्सा है।
सात्विक आहार का महत्व
सात्विक भोजन क्या है?
हिंदू दर्शन और आयुर्वेद के अनुसार सात्विक भोजन मन और शरीर को शुद्ध, शांत और संतुलित रखता है। इसमें ताजे फल, हरी सब्जियां, दालें और हल्के मसाले शामिल होते हैं।
सीएम योगी, जो एक सन्यासी परंपरा से जुड़े हैं, अपने दैनिक जीवन में भी इसी आहार का पालन करते हैं। विदेश यात्रा के दौरान भी वे इस अनुशासन से समझौता नहीं करते।
प्याज और लहसुन क्यों वर्जित?
आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार प्याज और लहसुन को तामसिक या राजसिक माना जाता है।
इनसे मन में उत्तेजना या भारीपन बढ़ सकता है, जिससे ध्यान और मानसिक स्पष्टता प्रभावित होती है।
Japan व्यंजनों—जैसे मिसो सूप, रेमन या कई स्टर-फ्राई डिश—में आमतौर पर इनका प्रयोग होता है। इसलिए मेन्यू तैयार करना एक विशेष चुनौती है।
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टोक्यो में विशेष मेन्यू की तैयारी
भारतीय दूतावास और स्थानीय शेफ की समन्वय बैठक
टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास ने पहले से ही स्थानीय कैटरिंग टीम के साथ समन्वय शुरू कर दिया है।
“नो-अलियम” (प्याज-लहसुन रहित) भोजन की स्पष्ट सूची दी गई।
रसोई निरीक्षण और क्रॉस-कंटैमिनेशन से बचाव की व्यवस्था की गई।
सामग्री की शुद्धता और स्रोत की पुष्टि की गई।
विशेष शाकाहारी मेन्यू में क्या शामिल होगा?
मुख्य व्यंजन
मूंग दाल खिचड़ी (हल्के मसालों और घी के साथ)
सादा उबला चावल
हल्की सब्जियां (पालक, गाजर, तोरी आदि)
सादा ग्रिल्ड टोफू
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सलाद और साइड डिश
खीरा-नींबू सलाद
अदरक युक्त हल्की स्टर-फ्राई सब्जियां
सूप (कोंबू आधारित शाकाहारी शोरबा)
स्वाद कैसे बनाए रखा जाएगा?
प्याज और लहसुन की अनुपस्थिति में स्वाद बढ़ाने के लिए:
हींग (असाफोटिडा) – लहसुन जैसा फ्लेवर
जीरा – तड़के में उपयोग
हल्दी – रंग और स्वास्थ्य लाभ
अदरक – ताजगी और तीखापन
Japan की पारंपरिक बौद्ध “शोजिन रयोरी” शैली भी शाकाहारी होती है, जिससे सात्विक मेन्यू को स्थानीय स्पर्श देना आसान हो जाता है।
उच्च स्तरीय राजनीति में आहार अनुशासन
भारतीय राजनीति में कई नेताओं ने विदेश यात्राओं के दौरान विशेष आहार नियमों का पालन किया है। यह व्यक्तिगत अनुशासन के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाता है।
सीएम योगी का यह निर्णय न केवल स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता से जुड़ा है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक संदेश भी देता है—कि वैश्विक मंच पर भी अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखा जा सकता है।
कूटनीति में भोजन की भूमिका
भोजन केवल पोषण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद का माध्यम है।
Japan में विशेष सात्विक मेन्यू तैयार करना दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और समझ को दर्शाता है।
यह दर्शाता है कि छोटी-सी लगने वाली बात—जैसे प्याज और लहसुन से परहेज—भी कूटनीति में महत्वपूर्ण हो सकती है।
Yogi Adityanath के Japan दौरे का यह विशेष मेन्यू अनुशासन, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
“नो ऑनियन, नो गार्लिक” केवल एक आहार नियम नहीं, बल्कि एक संदेश है—कि वैश्विक मंच पर भी अपनी परंपराओं के साथ संतुलन संभव है।
यह दिखाता है कि कूटनीति केवल समझौतों से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सम्मान से भी मजबूत होती है।
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