मोहेन नक़वी का विवादास्पद बयान: “काश जंग हो जाती…” – Asia कप हार के बाद पाकिस्तान में खेल और राजनीति का भूचाल
कल्पना कीजिए एक खचाखच भरे स्टेडियम की।-Asia
चारों ओर जयकारें गूंज रही हैं क्योंकि भारत ने Asia कप 2023 का फाइनल जीत लिया है। इसी बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी का एक चौंकाने वाला बयान सोशल मीडिया पर बम की तरह फटता है:
“काश जंग हो जाती…”
ये बयान रातों-रात मीम्स और विवादों की वजह बन गया।
Asia कप 2023: मैच का विवरण और पाकिस्तान की हार
भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ ग्रुप स्टेज मुकाबला टूर्नामेंट का हाईलाइट था। पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 191 रन बनाए। भारत की ओर से विराट कोहली ने नाबाद 86 रन ठोककर मैच को आसानी से जीत लिया।
फाइनल में भारत और श्रीलंका आमने-सामने थे। बारिश ने रोमांच बढ़ाया, लेकिन रोहित शर्मा की तेज़ 50 और टीम की मजबूत गेंदबाज़ी ने 281 रनों का सफल बचाव किया। पाकिस्तान ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो चुका था और दर्शक बनकर सब देख रहा था।
पाकिस्तान की हार के कारण-Asia
गेंदबाज़ी में निरंतरता की कमी रही।
स्पिनर शादाब खान ने खासा रन लुटाया।
फील्डिंग में कैच छूटे।
बल्लेबाज़ों ने दबाव में विकेट गंवाए।
कप्तान बाबर आज़म की आक्रामक रणनीति गीले पिच पर उलटी पड़ी।
भारत की जीत के प्रमुख कारण
रोहित शर्मा की शानदार कप्तानी और 500 रन।
कुलदीप यादव की फिरकी में 10 विकेट।
बुमराह की धारदार गेंदबाज़ी।
टीम भावना और रणनीति ने खेल को साधा।
मोहसिन नक़वी का विवादास्पद बयान: क्या कहा और क्यों?
मैच के बाद लाइव टीवी पर नक़वी बोले:
“हम उनसे खेल में बार-बार हारते हैं… काश जंग होती…”
ये बयान लाहौर की एक रैली में आया, जब पाकिस्तान भारत से ग्रुप स्टेज में हार चुका था। सोशल मीडिया पर क्लिप वायरल हो गई। कुछ घंटों में ही लाखों व्यूज़ और प्रतिक्रियाएं आ गईं।

उनका राजनीतिक इतिहास
मोहसिन नक़वी, PML-N पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता और पाकिस्तान के गृह मंत्री हैं। पहले पंजाब में सूचना मंत्री भी रह चुके हैं। राजनीति में उनकी छवि कड़ाई पसंद और मीडिया-प्रेमी नेता की है।
उनका बयान उस वक्त आया जब राष्ट्रवादी भावनाएं उफान पर थीं। शायद यह बयान भीड़ को भड़काने और खुद की लोकप्रियता बढ़ाने की कोशिश थी, लेकिन इसने राजनयिक तनाव बढ़ा दिया।
सोशल मीडिया और मीडिया का असर-Asia
सोशल मीडिया पर तूफान
#NaqviStatement ट्रेंड करने लगा।
भारतीय यूज़र्स ने युद्ध वाले मीम्स बना डाले।
पाकिस्तान में प्रतिक्रियाएं मिली-जुली थीं — कुछ ने समर्थन किया, कुछ ने निंदा।
मीडिया कवरेज
Dawn ने इसे हेडलाइन बनाया।
India Today ने लाइव पैनल में चर्चा की।
वसीम अकरम बोले: “ऐसे शब्द खेल को नुकसान पहुँचाते हैं।”
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
BBC ने इसे भारत-पाक तनाव का संकेत बताया।
Al Jazeera ने लिखा, “जिस खेल को शांति का सेतु माना जाता था, वही अब तनाव का ज़रिया बन गया है।”
व्यापक असर: खेल, राजनीति और भारत-पाक रिश्ते-Asia
खेल और राजनीति का घातक मेल
2019 वर्ल्ड कप और 2007 T20 फाइनल याद दिलाते हैं कि खेल से राष्ट्रीय गर्व जुड़ा होता है।
लेकिन नेताओं के शब्द भड़काऊ हों, तो ये खेल नफरत का ज़रिया बन जाते हैं।
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भारत-पाक रिश्तों पर असर
बयान ने सीमा और कश्मीर मुद्दों की संवेदनशीलता को छेड़ा।
क्रिकेट दौरे और टूर्नामेंट फिर से संकट में आ गए।
राजनयिकों ने शांति बनाए रखने की अपील की।
पाकिस्तान के अंदर प्रतिक्रिया
विपक्ष (PTI) ने इसे “गैर-जिम्मेदाराना” बताया।
समर्थकों ने इसे “देशभक्ति” का नाम दिया।
मीडिया में माफी की मांग उठी।
आगे का रास्ता: सीख और समाधान
क्रिकेट बोर्ड्स के लिए सीख
PCB और BCCI को मिलकर तटस्थ मैदान चुनने चाहिए।
खिलाड़ियों के आपसी कैंप होने चाहिए।
खेल कार्यक्रमों में राजनीति से दूरी बनाए रखें।
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नेताओं के लिए सलाह
हार पर चुप रहना बेहतर।
मीडिया ट्रेनिंग अनिवार्य बनाएं।
खेल को संवाद का माध्यम बनाएं, टकराव का नहीं।
फैंस के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण
खेल को मनोरंजन की तरह लें, दुश्मनी की तरह नहीं।
विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों से प्रेरणा लें।
द्विपक्षीय सीरीज़ की मांग करें, बायकॉट नहीं।
मोहसिन नक़वी का “काश जंग हो जाती” वाला बयान एक चेतावनी है कि खेल और राजनीति के खतरनाक मेल से क्या नुकसान हो सकता है। Asia कप 2023 की हार ने पाकिस्तान में निराशा फैलाई, लेकिन नेताओं की ज़िम्मेदारी है कि वे आग में घी न डालें।
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