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Parliament के शीतकालीन सत्र के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आगमन: प्रमुख एजेंडा और रक्षा पर फोकस

दिसंबर 2025 में शुरू हुए Parliamentके शीतकालीन सत्र की शुरुआत काफी हलचल के साथ हुई। जैसे ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संसद परिसर पहुंचे, मीडिया और सांसदों की निगाहें उन पर टिक गईं। उनका आगमन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि इस सत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मुद्दे केंद्र में रहने वाले हैं, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक तनाव और सीमा संबंधी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

आप सोच सकते हैं कि एक मंत्री का पहुंचना इतना अहम क्यों है। असल में, यह इस सत्र की प्राथमिकताओं को दर्शाता है—जहाँ सीमा सुरक्षा, सैन्य आधुनिकीकरण और रणनीतिक तैयारियों पर गहन चर्चा होने वाली है।

शीतकालीन सत्र की पृष्ठभूमि

रक्षा मंत्री की मौजूदगी का महत्व

राजनाथ सिंह का समय पर संसद पहुंचना यह साफ करता है कि सरकार रक्षा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सीमा पर हालिया तनाव, तकनीकी उन्नयन और वैश्विक घटनाक्रमों के बीच उनका रोल बेहद अहम हो जाता है।

यह कोई औपचारिक उपस्थिति मात्र नहीं है। उनके संसद में कदम रखते ही यह संदेश गया कि सरकार सैन्य तैयारियों और जवानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। सांसदों को उम्मीद है कि वे पड़ोसी देशों से जुड़े खतरों, हथियारों की खरीद और सेना के आधुनिकीकरण पर स्पष्ट जवाब देंगे।

उच्च-स्तरीय बहसों की उम्मीद

इस सत्र में:

  • साइबर सुरक्षा

  • चीन और पाकिस्तान से जुड़े सीमा मुद्दे

  • वैश्विक संघर्षों का भारत की सुरक्षा पर असर

जैसे विषयों पर तीखी बहस संभव है।
विपक्ष रक्षा बजट बढ़ाने की मांग कर सकता है, जबकि सरकार विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की कोशिश करेगी।

लोकसभा और राज्यसभा—दोनों में जोरदार बहस तय मानी जा रही है, जिनके नतीजे बड़े रक्षा सौदों और नीतिगत फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।

In Photos | Defence Minister Rajnath Singh arrives at Parliament House on  the first day of the Winter Session in Delhi. 📸: Ranjan Dimri / UNI  #PoliticalDebate #ParliamentWinterSession | #WinterSession |  #ParliamentSession | #

आगमन के बाद रक्षा मंत्री के प्रमुख फोकस क्षेत्र

सैन्य आधुनिकीकरण परियोजनाओं की समीक्षा

राजनाथ सिंह का पहला ध्यान चल रही सैन्य परियोजनाओं पर होगा।

  • तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) कार्यक्रम को लेकर फंडिंग और समयसीमा पर चर्चा

  • इंजन तकनीक में देरी के कारण बनी चुनौतियाँ

  • नौसेना के लिए नए पनडुब्बी और युद्धपोतों की खरीद

इन परियोजनाओं पर त्वरित निर्णय जरूरी हैं, क्योंकि देरी से वायु और समुद्री सुरक्षा में खामियाँ आ सकती हैं।

सीमा स्थिति पर ब्रीफिंग

  • लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चीन के साथ स्थिति

  • लद्दाख में सैनिक तैनाती और बुनियादी ढांचे (सड़क, सुरंगें, पुल) का विकास

  • म्यांमार सीमा पर ड्रोन और आधुनिक निगरानी तकनीक का उपयोग

इन ब्रीफिंग्स का मकसद न सिर्फ संसद को जानकारी देना है, बल्कि जनता की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी दूर करना है।

मुख्य आंकड़े (संकेतात्मक):

  • उच्च जोखिम वाले इलाकों में 2 लाख से अधिक सैनिक तैनात

  • तेजी से आवाजाही के लिए नई सुरंगें

  • सैटेलाइट और ड्रोन से निगरानी

संसदीय प्रोटोकॉल और शुरुआती बयान

रक्षा मंत्री Parliament में औपचारिक प्रक्रिया के तहत प्रवेश करते हैं। मीडिया के सामने उनके शुरुआती बयान सत्र की दिशा तय करते हैं।
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में वे रक्षा सुधारों पर चर्चा के लिए समय तय कराने पर जोर देते हैं।

In Photos | Defence Minister Rajnath Singh arrives at Parliament House on  the first day of the Winter Session in Delhi. 📸: Ranjan Dimri / UNI  #PoliticalDebate #ParliamentWinterSession | #WinterSession |  #ParliamentSession | #

रक्षा से जुड़े मुख्य विधायी और नीतिगत एजेंडे

नए रक्षा विधेयक या संशोधन की संभावना

  • डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर में बदलाव, ताकि घरेलू कंपनियों को बढ़ावा मिले

  • साइबर सुरक्षा से जुड़े कानूनों को मजबूत करने के प्रस्ताव

  • समुद्री सीमाओं और क्षेत्रीय जल से संबंधित कानूनों में संशोधन

इनका उद्देश्य रक्षा खरीद को तेज और पारदर्शी बनाना है।

बजट आवंटन और वित्तीय प्रभाव

पिछले वर्ष रक्षा बजट GDP का लगभग 1.7% था।
अब मांग है कि:

  • पूंजीगत खर्च (नए हथियार, तकनीक) बढ़ाया जाए

  • रोजमर्रा के खर्च पर निर्भरता कम हो

रक्षा मंत्री को हर खर्च का औचित्य संसद में समझाना होगा।

जवाबदेही और निगरानी

  • संसदीय समितियाँ रक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर नजर रखती हैं

  • परियोजनाओं में देरी और खर्च बढ़ने पर सवाल

  • CAG रिपोर्ट और ऑडिट पर चर्चा

यह प्रक्रिया पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है।

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भू-राजनीतिक चुनौतियाँ और संसद

क्षेत्रीय सुरक्षा गठबंधनों पर भारत का रुख

  • QUAD (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) पर चर्चा

  • SCO और रूस के साथ संतुलित रिश्ते

  • फ्रांस जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय रक्षा समझौते

सरकार इन गठबंधनों को सुरक्षा के लिए जरूरी बताती है, जबकि विपक्ष लागत और निर्भरता पर सवाल उठा सकता है।

रक्षा कूटनीति

  • दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप के साथ रक्षा सहयोग

  • तकनीक ट्रांसफर और संयुक्त अभ्यास

  • हथियार आयात बिल घटाने का लक्ष्य (लगभग 20%)

आंतरिक सुरक्षा और रक्षा का तालमेल

  • सेना और CAPFs (CRPF आदि) के बीच समन्वय

  • आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए संयुक्त अभियान

  • साझा तकनीक और संसाधनों का इस्तेमाल

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Parliament में सवाल-जवाब और सदस्य सहभागिता

रक्षा मंत्री से पूछे जाने वाले सवाल

  • सीमा पर घटनाएँ

  • विमान दुर्घटनाएँ

  • स्वदेशी रक्षा उत्पादन की प्रगति

इन सवालों से सरकार की जवाबदेही तय होती है।

रक्षा परामर्शदात्री समिति की भूमिका

यह समिति बंद दरवाजों के पीछे रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करती है।
यहाँ सभी दलों के सांसद अपनी राय रखते हैं, जिससे नीतियाँ ज्यादा व्यावहारिक बनती हैं।

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रक्षा नीति की दिशा और आगे का रास्ता

प्रमुख निष्कर्ष

  • राजनाथ सिंह का आगमन इस सत्र में रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है

  • आधुनिकीकरण, सीमा सुरक्षा और कूटनीति मुख्य एजेंडा हैं

  • बजट और विधायी फैसले भारत की सैन्य क्षमता तय करेंगे

रक्षा विश्लेषकों और नागरिकों के लिए संकेत

  • संसदीय समितियों की रिपोर्ट पर नजर रखें

  • रक्षा बजट पर होने वाली वोटिंग अहम होगी

  • सवाल-जवाब सत्र से भविष्य की नीति की झलक मिलेगी

राजनाथ सिंह की अगुवाई में यह शीतकालीन सत्र रक्षा क्षेत्र में बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है।
सीमाओं से लेकर बजट तक—यह सत्र भारत की सुरक्षा तैयारियों को नई दिशा दे सकता है।
आगे होने वाले घटनाक्रमों पर नजर बनाए रखें, क्योंकि इनके प्रभाव दूरगामी होंगे।