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नई दिल्ली,। लोकसभा में विभिन्न स्वायत्त निकायों की वार्षिक रिपोर्ट और लेखा परीक्षित खातों को प्रस्तुत करने में ‘‘बिना वजह’’ देरी के बारे में अवगत कराने के लिए एक संसदीय समिति ने कैग अधिकारियों को बुलाया है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।

लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रितेश पांडे की अध्यक्षता में लोकसभा के पटल पर प्रस्तुत दस्तावेजों के संबंध में बनाई गई संसदीय समिति सोमवार को नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने वाली है।

समिति के सूत्रों ने कहा कि यह शायद पहली बार है कि लोक लेखा समिति (पीएसी) के अलावा सदन की कोई समिति कैग अधिकारियों के साथ औपचारिक चर्चा करेगी।

सूत्रों ने कहा कि समिति ने समय पर कागजात नहीं प्रस्तुत करने वाले विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधियों को बुलाया है। जांच के दौरान कई संस्थाओं ने आवेदन दिए हैं कि कैग द्वारा ऑडिट में कभी-कभी निर्धारित समय से अधिक समय लगने से देरी होती है।

उन्होंने कहा कि समिति ने कैग के कार्यालय के साथ औपचारिक चर्चा करना उचित समझा है ताकि देरी के कारणों से परिचित हो सकें और सलाह ले सकें कि क्या रास्ता होना चाहिए ताकि कागजात को निर्धारित अवधि के भीतर प्रस्तुत करने की वैधानिक जरूरतें को पूरा किया जा सके।

केंद्र सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत विभिन्न स्वायत्त निकायों, सार्वजनिक उपक्रमों, आयोगों, संगठनों और मंत्रालयों, विभागों और अन्य की वार्षिक रिपोर्ट और लेखा परीक्षित खातों को प्रस्तुत करने में अनुचित देरी के कारणों की जांच करने के लिए हर साल इस संसदीय समिति का गठन किया जाता है।

इन विभागों को वित्तीय वर्ष बंद होने के नौ महीने के भीतर यानी हर साल 31 दिसंबर तक अपने लेखा परीक्षित खातों और रिपोर्टों को सदन के पटल पर रखना होता है।