इथियोपियाई संसद में PM मोदी का ऐतिहासिक संबोधन: ‘लैंड ऑफ लॉयन्स’ के साथ साझेदारी को नई ऊंचाई
कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे देश की संसद में खड़े हैं, जिसकी सभ्यता हजारों साल पुरानी है, और फिर भी आपको वहाँ अपने घर जैसा एहसास हो। यही भाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इथियोपियाई संसद को संबोधित करते हुए व्यक्त किया था, जब उन्होंने कहा—
“लैंड ऑफ लॉयन्स में मुझे घर जैसा महसूस होता है।”
यह वाक्य न सिर्फ संसद भवन में गूंजा, बल्कि भारत-इथियोपिया संबंधों में एक भावनात्मक और रणनीतिक अध्याय की शुरुआत भी बना।
यह दौरा भारत-इथियोपिया रिश्तों में एक अहम मील का पत्थर साबित हुआ। अपने भाषण में पीएम मोदी ने साझा इतिहास, वर्तमान सहयोग और उज्ज्वल भविष्य की बात की। यह सिर्फ शब्दों का खेल नहीं था, बल्कि व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक मंचों पर साझेदारी को मजबूत करने का स्पष्ट रोडमैप था।
“लैंड ऑफ लॉयन्स”: इथियोपिया से PM मोदी का भावनात्मक जुड़ाव
साझा सभ्यतागत रिश्तों की झलक
इथियोपिया को “लैंड ऑफ लॉयन्स” कहा जाता है, जो उसके ऐतिहासिक प्रतीक लायन ऑफ जूडाह से जुड़ा है। PM मोदी ने इस प्रतीक को भारत के शेर और अशोक स्तंभ से जोड़ते हुए सांस्कृतिक समानता को रेखांकित किया। इससे भाषण की शुरुआत में ही एक आत्मीय माहौल बन गया।
भारत और इथियोपिया के बीच व्यापारिक रिश्ते सदियों पुराने हैं। प्राचीन काल में मसाले, वस्त्र और विचार लाल सागर के रास्ते एक-दूसरे तक पहुंचते थे। पीएम मोदी ने इन ऐतिहासिक समुद्री संपर्कों का जिक्र कर यह दिखाया कि दोनों देशों का रिश्ता नया नहीं, बल्कि गहरी जड़ों वाला है।
उन्होंने 1950 के दशक की भी याद दिलाई, जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इथियोपिया का समर्थन किया था। यह उदाहरण बताता है कि दोनों देशों की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है।
संसद संबोधन के मुख्य संदेश
PM मोदी ने बराबरी और सम्मान पर आधारित साझेदारी की बात की। उनका संदेश साफ था—भारत और इथियोपिया सहयोगी हैं, न कि प्रतिस्पर्धी।
उन्होंने कहा,

“लैंड ऑफ लॉयन्स में हम शांति और प्रगति के लिए एक साथ दहाड़ते हैं।”
उन्होंने सवालिया अंदाज में पूछा, “अफ्रीका को वैश्विक फैसलों की मेज पर जगह पाने के लिए और कितनी देर इंतजार करना चाहिए?”
इससे संसद में मौजूद प्रतिनिधियों में साझा संघर्ष और साझा लक्ष्य की भावना मजबूत हुई।
आर्थिक सहयोग: व्यापार, निवेश और विकास
द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा
भारत-इथियोपिया व्यापार 2024 में लगभग 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। PM मोदी ने इसे अगले पांच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य रखा।
टेक्सटाइल, कृषि और चमड़ा उद्योग इस सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं।
भारत की कई कंपनियां इथियोपिया में चीनी मिलों, लेदर यूनिट्स और फैक्ट्रियों में निवेश कर चुकी हैं। इस दौरे के दौरान कॉफी निर्यात और टेक पार्क से जुड़े नए समझौते भी हुए।
पीएम मोदी ने “बिना शर्त, निष्पक्ष साझेदारी” पर जोर दिया, जो अफ्रीकी देशों में भारत की खास पहचान बन चुकी है।
बुनियादी ढांचा और डिजिटल सहयोग
भारत ने इथियोपिया में सड़कों और रेलवे परियोजनाओं के लिए 800 मिलियन डॉलर की ऋण सहायता दी है। अदीस अबाबा-जिबूती रेलवे जैसे प्रोजेक्ट्स में भारतीय सहयोग अहम रहा है।
डिजिटल क्षेत्र में भारत का UPI मॉडल इथियोपिया को प्रेरित कर रहा है। भारतीय संस्थान स्थानीय टेक टीमों को प्रशिक्षण दे रहे हैं, ताकि 2026 तक डिजिटल भुगतान प्रणाली मजबूत हो सके।
PM मोदी ने इसे “सिर्फ सड़कें नहीं, सपनों को जोड़ने वाला सहयोग” बताया।

वैश्विक शासन और बहुपक्षीय सहयोग
संयुक्त राष्ट्र सुधार पर साझा दृष्टिकोण
PM मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया को प्रतिबिंबित करने वाला UN ढांचा जरूरी है, जिसमें भारत और अफ्रीका की स्थायी भागीदारी हो।
इथियोपिया, जो अफ्रीकी संघ में अहम भूमिका निभाता है, इस सोच से सहमत है। दोनों देश जलवायु परिवर्तन, शांति और विकास जैसे मुद्दों पर अक्सर एक साथ खड़े दिखते हैं।
आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा
हॉर्न ऑफ अफ्रीका और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां साझा हैं। पीएम मोदी ने आतंकवाद, समुद्री डकैती और उग्रवाद से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की बात कही।
भारत ने इथियोपिया को सुरक्षा प्रशिक्षण और खुफिया सहयोग के लिए 50 मिलियन डॉलर की सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई। इसका मकसद व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता को सुरक्षित बनाना है।
आगे की राह: भारत-इथियोपिया संबंधों के अवसर
तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्र
नवीकरणीय ऊर्जा: इथियोपिया के पहाड़ी इलाकों में पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाएं
फार्मा सेक्टर: भारतीय जेनेरिक दवाओं से स्वास्थ्य लागत में कमी
कृषि तकनीक: बीज और सिंचाई तकनीक से उत्पादन में 20% तक बढ़ोतरी
छोटे लेकिन असरदार कदम—जैसे ग्रामीण सोलर किट और फार्मा ट्रेनिंग—जल्दी नतीजे दे सकते हैं।

लोगों से लोगों का जुड़ाव
PM मोदी ने सांस्कृतिक संबंधों को “सबसे मजबूत पुल” बताया।
बॉलीवुड फिल्मों की लोकप्रियता, छात्रवृत्तियां, IT और नर्सिंग ट्रेनिंग, और पर्यटन—ये सभी रिश्तों को जमीनी स्तर पर मजबूत कर रहे हैं।
200 से अधिक इथियोपियाई छात्र हर साल भारत में पढ़ाई कर रहे हैं। भविष्य में सीधी उड़ानों और आसान वीजा से पर्यटन भी दोगुना हो सकता है।
रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव
इथियोपियाई संसद में PM मोदी का संबोधन इतिहास और भविष्य को जोड़ने वाला क्षण था।
“लैंड ऑफ लॉयन्स” का भावनात्मक उल्लेख, आर्थिक साझेदारी, सुरक्षा सहयोग और लोगों के बीच संपर्क—सब मिलकर भारत-इथियोपिया रिश्तों को नई दिशा देते हैं।
यह सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि साझा मूल्यों—शांति, विकास और सम्मान—पर आधारित साझेदारी है।
“घर जैसा महसूस होना” वाला वाक्य इस रिश्ते की गहराई का प्रतीक बन गया है।
PM मोदी ने यमुना एक्सप्रेसवे दुर्घटना पीड़ितों के लिए 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की।
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