PM नरेंद्र मोदी आरएसएस शताब्दी समारोह में पहुंचे: एक ऐतिहासिक क्षण
नागपुर के खुले आसमान के नीचे केसरिया झंडों का समुद्र लहराता है। हजारों लोग गर्व की भावना लिए इकट्ठा हैं। PM नरेंद्र मोदी इस दृश्य में कदम रखते हैं, जो भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन बन जाता है।
यह समारोह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। 1925 में स्थापित आरएसएस ने दशकों से राष्ट्रीय सोच को आकार दिया है। मोदी की उपस्थिति इस संगठन की एक मजबूत भारत के निर्माण में भूमिका को रेखांकित करती है।
यह उत्सव नेताओं और आम लोगों को एक साथ लाता है। इसका फोकस सेवा, एकता और भविष्य की दिशा पर है। जब मोदी बोलते हैं, तो जनसमूह उम्मीद से उनकी बातों को सुनता है। यह पल कई लोगों को इस विचारधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकता है।
आरएसएस शताब्दी वर्ष: पृष्ठभूमि और महत्व
आरएसएस की स्थापना और यात्रा
27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा आरएसएस की स्थापना की गई थी। उन्होंने भारतीयों में चरित्र निर्माण और एकता की आवश्यकता को महसूस किया। छोटे-छोटे दैनिक मिलनों से यह संगठन आज देशभर में फैला एक विशाल नेटवर्क बन गया है।
इन वर्षों में, आरएसएस ने आपातकाल जैसी चुनौतियों और प्रतिबंधों का सामना किया। फिर भी इसने शिक्षा, राहत कार्यों और सामाजिक सेवा में काम करना जारी रखा। आज यह संगठन हजारों शाखाओं के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन को छू रहा है।
इसकी यात्रा दिखाती है कि एक विचार भी बड़ा परिवर्तन ला सकता है। हेडगेवार की “अनुशासित स्वयंसेवकों” की सोच आज भी मार्गदर्शक बनी हुई है।
शताब्दी समारोह के मुख्य उद्देश्य
इस शताब्दी वर्ष का उद्देश्य है – अतीत को सम्मान देना और भविष्य की दिशा तय करना। आयोजकों ने संगोष्ठियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और युवा शिविरों की योजना बनाई है। विषयों में आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव प्रमुख हैं।
स्वयंसेवक बाढ़ और महामारी के समय की सेवा कहानियां साझा करते हैं। उद्देश्य है आरएसएस के मूल्यों के प्रति नई प्रतिबद्धता पैदा करना। यह 100 वर्षों की निरंतर सेवा यात्रा का उत्सव भी है।
मुख्य कार्यक्रम नागपुर में होंगे, जिससे इसकी स्थापना स्थली से जुड़ाव बना रहता है।

राष्ट्रीय महत्व
आरएसएस भारत के सामाजिक ताने-बाने का अहम हिस्सा है। इसके विचार राजनीति, शिक्षा और सामुदायिक सेवा को प्रभावित करते हैं। शताब्दी समारोह इन जड़ों की ओर ध्यान आकर्षित करता है।
यह भारत में “विविधता में एकता” के संदेश को प्रबल करता है। भारत वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है, और ऐसे अवसर साझा मूल्यों की याद दिलाते हैं। मोदी की उपस्थिति इसका संदेश देश के हर कोने तक पहुंचाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सांस्कृतिक एकता को मजबूत कर सकता है और अगले 100 वर्षों की दिशा तय कर सकता है।
PM मोदी का आगमन और स्वागत
आगमन और सुरक्षा व्यवस्था
PM का विमान सुबह के समय नागपुर पहुंचा। वे सीधे आरएसएस मुख्यालय की ओर रवाना हुए। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे – पुलिस बल और स्वयंसेवकों की कई परतें सुरक्षा में लगी थीं।
रास्ते में सड़कों के किनारे लोग हाथ हिलाकर उनका स्वागत करते दिखे। ऊपर से हेलीकॉप्टर निगरानी कर रहे थे। इस व्यवस्था से आयोजन की उच्च प्राथमिकता झलकती है।
फोटोज़ में मोदी का शांत और आत्मविश्वासी अंदाज दिखा। ऑनलाइन वीडियो में शुरुआत से ही गर्मजोशी साफ नजर आई।
प्रमुख नेताओं द्वारा स्वागत
सरसंघचालक मोहन भागवत सहित आरएसएस के शीर्ष नेताओं ने फूलों की माला पहनाकर PM का स्वागत किया। सहयोगी संगठनों के नेता भी मौजूद रहे। हस्तमिलन और मुस्कान का माहौल दिखा।
भागवत ने मोदी को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। PM ने सिर हिलाकर और कुछ शब्दों में जवाब दिया। यह संवाद आदर और सहयोग की भावना दिखाता है।
पूर्व प्रमुखों और राज्यों के नेताओं की उपस्थिति ने स्वागत को परिवारिक मिलन जैसा बना दिया।

स्थल का माहौल
समारोह स्थल पर जोश और उत्साह का माहौल था। केसरिया बैनर लहराते थे, जयघोष गूंज रहे थे। किताबों के स्टॉल, स्नैक्स और आरएसएस इतिहास पर आधारित सामग्री उपलब्ध थी।
परिवार दरी पर बैठे थे, बच्चे यूनिफॉर्म में नाटक देख रहे थे। पारंपरिक बैंड की धुनों ने खुशी बढ़ा दी। यह एक ऐसा उत्सव था जिसमें गंभीरता और उल्लास दोनों शामिल थे।
जैसे ही मोदी पहुंचे, तालियों की गूंज ने स्वागत किया। चमकता सूरज उस आशावादी माहौल को और दमक देता दिखा।
PM मोदी का भाषण: मुख्य बातें
राष्ट्र निर्माण पर जोर
PM मोदी ने शुरुआत में आरएसएस के 100 वर्षों की निःशब्द सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा, “सच्ची ताकत रोज़मर्रा की अनुशासन से आती है। भारत तब उभरता है जब हर नागरिक आगे बढ़ता है।“
उन्होंने विकसित भारत 2047 जैसे लक्ष्य से आरएसएस के प्रयासों को जोड़ा। उदाहरण दिए – आपदा राहत, गांवों में कार्य। यह दिखाता है कि संगठन जमीनी स्तर पर जीवन बदलता है।
आरएसएस की भूमिका पर बात
PM मोदी ने बताया कि कैसे आरएसएस ने नेताओं और मूल्यों को आकार दिया। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक, इसने एकता का संदेश दिया। उन्होंने इसे “सांस्कृतिक पुनर्जागरण की रीढ़” कहा।
एक निजी किस्सा भी साझा किया – कैसे वे अपने शुरुआती दिनों में आरएसएस से जुड़े। यह भाषण को व्यक्तिगत और सजीव बना गया। स्वयंसेवकों में गर्व की भावना जागी।
PM ने कहा कि आरएसएस गैर-राजनीतिक सेवा संगठन है जो चरित्र निर्माण पर केंद्रित है, सत्ता प्राप्ति पर नहीं।
युवाओं और समाज के लिए संदेश
युवाओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, “आपकी ऊर्जा भारत को बदल सकती है।” उन्होंने शिक्षा और कौशल को प्राथमिकता देने की बात की, शॉर्टकट से बचने की सलाह दी। उन्होंने शाखाओं में जुड़ने और नेतृत्व सीखने को कहा।
समाज के लिए उन्होंने समरसता का संदेश दिया – “विविधता को ताकत में बदलें। नफरत से दूर रहें, पुल बनाएं।”
उनकी बातें प्रेरणादायक रहीं। कई लोग भाषण के बाद कुछ नया करने के लिए प्रेरित हुए।

समारोह का व्यापक असर और प्रतिक्रियाएं
राजनीतिक हलकों की प्रतिक्रियाएं
बीजेपी नेताओं ने इसे एक ऐतिहासिक क्षण कहा। PM मोदी का भाषण पार्टी के मूल विचारों को बल देता दिखा। सहयोगियों ने भी एकता के संदेश को सराहा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। कुछ ने इतिहास के सम्मान की सराहना की, जबकि कुछ ने संगठन और सरकार के रिश्ते पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने आरएसएस की भूमिका को पहचाना, लेकिन व्यापक संवाद की बात भी की।
इस आयोजन ने विचारधारा और शासन के संबंधों पर नई बहस छेड़ दी।
मीडिया और जनमत
समाचार चैनलों ने इसे लाइव प्रसारित किया। पैनलों में विषयों पर चर्चा हुई। सोशल मीडिया पर #RSSCentenary जैसे हैशटैग ट्रेंड में रहे।
जनता की राय भी विविध रही। समर्थकों ने जोश महसूस किया, आलोचकों ने इसे राजनीतिक चश्मे से देखा। युवा वर्ग में रुचि और भागीदारी अधिक देखी गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्य दिन में करीब 50,000 लोग मौजूद थे।
राष्ट्रीय एकता पर प्रभाव
इस आयोजन ने साझा भारतीय मूल्यों को मजबूत किया। यह राज्यों की सीमाओं से परे जाकर विविध समूहों को जोड़ता है। PM मोदी के समावेशी संदेशों ने कई वैचारिक खाइयों को पाटने का प्रयास किया।
लंबे समय में यह सेवा कार्यों और स्वयंसेवा की भावना को बढ़ा सकता है। जब देश कठिनाइयों से गुजरेगा, ऐसे संदेश एकजुटता बढ़ा सकते हैं।
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