पीएम नरेंद्र मोदी ने 7 एलकेएम पर गायों को खिलाया: Makar संक्रांति की परंपराएँ और नेतृत्व का जीवंत उदाहरण
हर साल जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तो भारत उल्लास से भर उठता है। Makar संक्रांति परिवारों को दावतों, पतंगों और प्रकृति की कृपा के प्रति कृतज्ञता जताने वाले अनुष्ठानों के साथ जोड़ती है। जनवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास 7 लोक कल्याण मार्ग (7 LKM) पर गायों को चारा खिलाकर इस पर्व को एक भावपूर्ण स्पर्श दिया। यह सरल लेकिन अर्थपूर्ण कर्म परंपरा और नेतृत्व—दोनों का सुंदर संगम बन गया।
यह क्षण इसलिए खास है क्योंकि यह गौ सेवा जैसी परंपराओं के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का संदेश देता है। यह लेख इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करता है—पवित्र अनुष्ठानों से लेकर पशु कल्याण से जुड़ी सरकारी पहलों तक। अंत में, आप समझ पाएँगे कि ऐसे कदम भारत की खेती और भविष्य के लिए क्यों आवश्यक हैं।
पवित्र कर्म: 7 LKM पर पीएम मोदी का मकर संक्रांति अनुष्ठान
मकर संक्रांति पर गौ सेवा का महत्व
हिंदू परंपरा में गाय का विशेष स्थान है। उन्हें जीवन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। Makar संक्रांति के दिन गायों को भोजन कराने से शुभ फल की कामना और नकारात्मकता से मुक्ति का भाव जुड़ा है।
वेदों सहित प्राचीन ग्रंथों में गायों के महत्व का वर्णन मिलता है—दूध, ईंधन हेतु गोबर और उनके सौम्य स्वभाव के लिए। 7 LKM पर पीएम मोदी ने गायों को हरा चारा खिलाया। उनका शांत और आदरपूर्ण भाव इस परंपरा के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है।
इस दिन अनेक लोग गौ सेवा करते हैं। यह धरती की उपज के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। पीएम मोदी का सार्वजनिक रूप से यह करना दूसरों को भी प्रेरित करता है।
देशी नस्लों और कल्याण पर जोर
भारत की देशी नस्लें—जैसे गिर और साहीवाल—स्थानीय परिस्थितियों में बेहतर पनपती हैं और रोगों के प्रति अधिक सहनशील होती हैं। आयोजन में पीएम मोदी के साथ ऐसी ही देशी गायें देखी गईं, जो उनकी अहमियत को रेखांकित करता है।
उन्होंने गुड़ मिले अनाज और हरे चारे से गायों को खिलाया—मिठास Makar संक्रांति के पकवानों की याद दिलाती है। यह देखभाल इस बात का संकेत है कि हमारी विरासत को कमजोर करने वाले अंधाधुंध क्रॉसब्रीडिंग से देशी नस्लों की रक्षा जरूरी है।
देशी गायों से मिलने वाला A2 दूध स्वास्थ्य के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जाता है। पीएम मोदी का यह कर्म आधुनिक कृषि के बीच इस विरासत को बचाने का संदेश देता है।

Makar संक्रांति: फसल, परिवर्तन और एकता का पर्व
खगोलीय और कृषि संदर्भ
Makar संक्रांति सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश का संकेत देती है। यह ठंड के चरम का अंत और गर्म दिनों की शुरुआत है। किसान धान, गन्ना और गेहूँ की कटाई का उत्सव मनाते हैं।
उत्तर भारत में अलाव जलते हैं, दक्षिण में पोंगल पकता है। यह पर्व मौसमों से जुड़ा है—नए वर्ष के लिए आशा बोने का समय।
इसे प्रकृति का “रीसेट बटन” कहा जा सकता है। लंबे दिन फसलों के लिए अधिक धूप लाते हैं और समुदायों को एक साथ लाते हैं।
विविधता में एकता: राष्ट्रीय उत्सव
गुजरात में पतंगों से आसमान रंगीन होता है। असम में बिहू के साथ नृत्य और भोज होते हैं।
पंजाब में लोहड़ी की आग के चारों ओर लोकगीत गूंजते हैं। तमिलनाडु में चावल-दाल से पोंगल बनता है।
हर क्षेत्र की अपनी शैली है, पर सभी सूर्य और धरती का सम्मान करते हैं। 7 LKM पर पीएम मोदी का गौ सेवा कर्म इस साझा मूल्य को रेखांकित करता है—एक राष्ट्र, अनेक रंग।
उत्तर प्रदेश से केरल तक तिलगुल बाँटे जाते हैं—मिठास और सौहार्द का संदेश। यही एकता भारत को मजबूत बनाती है।
गौ सेवा की भावना से जुड़ी सरकारी पहलें
राष्ट्रीय पशुधन मिशन और योजनाएँ
सरकार ने पशु कल्याण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन (2014) देशी नस्लों को बढ़ावा देता है—बेहतर प्रजनन और स्वास्थ्य सेवाओं के केंद्र स्थापित किए गए हैं।
2025 तक इससे एक करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला, और लगभग ₹2,400 करोड़ का निवेश हुआ। उद्देश्य—परंपरा से समझौता किए बिना दुग्ध उत्पादन बढ़ाना। 7 LKM का यह अनुष्ठान गुणवत्ता पर जोर को दर्शाता है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन छोटे पशुपालकों को शेड, पशु चिकित्सकीय सेवाओं और प्रशिक्षण में सहायता देता है। पाँच लाख से अधिक लाभार्थी चारा प्रबंधन और रोग-निवारण से जुड़े प्रशिक्षण पा चुके हैं।

मुख्य विशेषताएँ:
देशी नस्लों के लिए निःशुल्क कृत्रिम गर्भाधान
चारे पर सब्सिडी
रोग-निवारण जागरूकता शिविर
ये पहलें गौ सेवा की भावना को व्यवहार में बदलती हैं—जैसे 7 LKM पर गुड़ और अनाज से पोषण।
टिकाऊ और प्राकृतिक खेती का प्रोत्साहन
गायें प्राकृतिक खेती की रीढ़ हैं। गोबर से उत्तम खाद और गौमूत्र से प्राकृतिक कीटनाशक बनते हैं—रसायनों पर निर्भरता घटती है।
सरकार शून्य बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF) को बढ़ावा दे रही है। गाय-आधारित जैव-इनपुट से मिट्टी की सेहत सुधरती है और लागत घटती है। कर्नाटक जैसे राज्यों में इससे 20% तक अधिक मुनाफा देखा गया है।
यह चक्र खेती और पशुपालन को जोड़ता है—चराई से खेत समृद्ध होते हैं। पीएम मोदी का संदेश इसी संतुलन को उजागर करता है।
ZBNF के लाभ:
कम पानी में बेहतर उत्पादन
पौधों की कीट-प्रतिरोधक क्षमता
ग्रामीण महिला समूहों को सशक्तिकरण

नेतृत्व में प्रतीकात्मकता: कर्म से संवाद
राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश
नेतृत्व शब्दों से नहीं, कर्मों से बोलता है। 7 LKM पर गौ सेवा पीएम मोदी को ग्रामीण भारत से जोड़ती है—जहाँ देश की बड़ी आबादी रहती है।
यह किसानों को भरोसा देती है कि उनकी चुनौतियाँ—मौसम, कीमतें—सुनी जा रही हैं। दिल्ली से खेतों तक का सेतु बनता है।
पिछले वर्षों में पतंग उड़ाना या मिठाइयाँ बाँटना—2026 में यह कर्म उसी परंपरा की अगली कड़ी है। यह उस नेतृत्व की तस्वीर है जो संस्कृति को जीता है।
नागरिकों को पशु कल्याण में भागीदारी के लिए प्रेरणा
आप भी जुड़ सकते हैं। पास की गौशाला में चारा दान करें या स्वयंसेवा दें।
गोकुल मिशन से जुड़े कार्यक्रमों में किसी देशी गाय को गोद लें।
छोटे कदम:
नज़दीकी पशु आश्रय खोजें
मकर संक्रांति जैसे पर्व पर गुड़-चारा दें
घर के आसपास चारा देने वाले पेड़ लगाएँ
ये प्रयास करुणा फैलाते हैं और बच्चों को जीवन के प्रति सम्मान सिखाते हैं। पीएम मोदी के उदाहरण से प्रेरित होकर, आपका योगदान भी मायने रखता है।
परंपरा, शासन और ग्रामीण भारत का भविष्य
Makar संक्रांति पर 7 LKM में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा गायों को खिलाना परंपरा और प्रगति का सुंदर मेल है। यह फसल उत्सव की खुशी के साथ पशु कल्याण और प्राकृतिक खेती को उजागर करता है। गोकुल मिशन जैसी योजनाएँ संस्कृति को विकास से जोड़ती हैं।
मुख्य संदेश स्पष्ट हैं—गौ सेवा से सौभाग्य और एकता, देशी नस्लों और प्राकृतिक खेती को सरकारी समर्थन, और नेतृत्व के कर्मों से समाज को प्रेरणा।
भारत की ग्रामीण आत्मा इन्हीं मूल्यों से सशक्त होती है। आगे बढ़ते हुए, गायों का संरक्षण धरती और लोगों—दोनों के लिए समृद्धि लाएगा। आज एक कदम बढ़ाएँ—गाय को चारा दें, किसान का साथ दें—और इस भावना को जीवित रखें। आज का आपका कदम, कल की खुशहाली रचेगा।
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