काशी में 72वीं राष्ट्रीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता का वर्चुअल उद्घाटन: भारतीय खेल जगत के लिए ऐतिहासिक क्षण
कल्पना कीजिए काशी की उस ऊर्जा की, जब देशभर से आए खिलाड़ी मुकाबले के लिए तैयार हों और PM नरेंद्र मोदी वर्चुअल माध्यम से इस बड़े आयोजन का उद्घाटन करें। यह कोई साधारण खेल आयोजन नहीं है, बल्कि 72वीं राष्ट्रीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता है, जो भारत की प्राचीन सांस्कृतिक नगरी वाराणसी (काशी) में आयोजित हो रही है। प्रधानमंत्री की भागीदारी ने इस टूर्नामेंट को केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि परंपरा और आधुनिक भारत के सपनों का संगम बना दिया है।
यह प्रतियोगिता न सिर्फ खिलाड़ियों के लिए, बल्कि भारतीय खेल संस्कृति के लिए भी एक मील का पत्थर मानी जा रही है।
PM मोदी की भागीदारी का महत्व
PM मोदी का वर्चुअल उद्घाटन इस टूर्नामेंट को राष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान देता है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार क्रिकेट से आगे बढ़कर अन्य खेलों को भी बराबर महत्व दे रही है।
PM की मौजूदगी से वॉलीबॉल जैसे खेलों को मीडिया, प्रायोजकों और दर्शकों का ज्यादा ध्यान मिलता है। खिलाड़ियों के लिए यह संदेश है कि उनकी मेहनत को देश के शीर्ष नेतृत्व द्वारा सराहा जा रहा है। इससे युवाओं में आत्मविश्वास और राष्ट्र गौरव की भावना मजबूत होती है।
काशी: परंपरा की नगरी, आधुनिक खेलों की मेजबान
काशी अपनी गंगा घाटों, मंदिरों और सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती है। अब वही काशी राष्ट्रीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता की मेजबानी कर आधुनिक खेल संस्कृति को भी अपनाती दिख रही है।
यह परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल है। खिलाड़ियों को जहां एक ओर ऐतिहासिक माहौल मिलता है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा का मंच। इससे उत्तर प्रदेश की खेल संभावनाओं को भी नई पहचान मिलती है और स्थानीय युवाओं को प्रेरणा मिलती है।
72वीं राष्ट्रीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता: एक नज़र
यह प्रतियोगिता लगभग 10 दिनों तक चलेगी और इसमें देश के 28 से अधिक राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में 16-16 टीमें हिस्सा ले रही हैं।
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प्रारंभिक चरण: लीग मुकाबले
आगे का चरण: सेमीफाइनल और फाइनल (नॉकआउट)
आयोजन स्थल: वाराणसी के प्रमुख खेल परिसर
हर मैच खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा मौका है।
दांव पर क्या है?
इस प्रतियोगिता का महत्व सिर्फ ट्रॉफी तक सीमित नहीं है। यहां अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को:
राष्ट्रीय रैंकिंग में फायदा
एशियन गेम्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चयन का मौका
सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रवेश
एक शानदार प्रदर्शन किसी युवा खिलाड़ी को सीधे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा सकता है।
भारत में वॉलीबॉल का बढ़ता कद
हाल के वर्षों में भारतीय वॉलीबॉल ने नई रफ्तार पकड़ी है। 2023 एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने के बाद इस खेल में रुचि और बढ़ी है। स्कूल और कॉलेज स्तर पर वॉलीबॉल खेलने वाले छात्रों की संख्या में बीते 5 वर्षों में करीब 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
72वीं राष्ट्रीय प्रतियोगिता इसी सकारात्मक बदलाव का हिस्सा है।
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वर्चुअल उद्घाटन: डिजिटल भारत की झलक
PM का वर्चुअल उद्घाटन डिजिटल इंडिया की सोच को भी दर्शाता है। इससे बिना यात्रा के लाखों लोग देशभर से लाइव जुड़ सके।
लाइव स्ट्रीमिंग: यूट्यूब और स्पोर्ट्स ऐप्स
रियल-टाइम स्कोर और अपडेट
दूर-दराज के गांवों तक पहुंच
यह मॉडल भविष्य के खेल आयोजनों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
खेल योजनाएं और सरकारी समर्थन
यह आयोजन खेलो इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) जैसी योजनाओं से भी जुड़ा है। इन योजनाओं के तहत:
युवा खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता
बेहतर कोचिंग और सुविधाएं
अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी
वॉलीबॉल को भी इन योजनाओं में लगातार समर्थन मिल रहा है।
जमीनी स्तर और युवाओं पर असर
इस तरह के बड़े आयोजन का असर सीधे जमीनी स्तर पर दिखता है। उत्तर प्रदेश, खासकर वाराणसी में:
स्कूलों में वॉलीबॉल के लिए नामांकन बढ़ना
स्थानीय अकादमियों में नई रुचि
लड़कियों की भागीदारी में इजाफा
बड़े मंच देखकर बच्चे खुद को वहां खड़ा देखने लगते हैं—यहीं से सपनों की शुरुआत होती है।

आगे की दिशा: खेल अवसंरचना का विकास
इस प्रतियोगिता से यह भी साफ होता है कि काशी और आसपास के इलाकों में:
नए इनडोर स्टेडियम
बेहतर कोर्ट और लाइटिंग
भविष्य में और राष्ट्रीय टूर्नामेंट
की संभावनाएं मजबूत होंगी। यह क्षेत्र पूर्वी भारत का एक बड़ा खेल केंद्र बन सकता है।
भारतीय वॉलीबॉल के लिए उज्ज्वल भविष्य
PM मोदी द्वारा 72वीं राष्ट्रीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता का वर्चुअल उद्घाटन इस आयोजन को विशेष बनाता है। यह सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि भारतीय खेलों के भविष्य की झलक है।
काशी की परंपरा और आधुनिक खेल भावना का यह संगम युवाओं को प्रेरित करता है, खेल संस्कृति को मजबूत करता है और वॉलीबॉल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है।
Mallikarjun खर्गे का कहना है कि मोदी सरकार न तो स्वच्छ पानी दे सकी और न ही स्वच्छ हवा, जिससे जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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