Police

छापे की पूरी कहानी: क्या हुआ उस सुबह?

सुबह करीब 5:30 बजे पटना Police की विशेष जांच टीम के 20 से अधिक अधिकारी अमिताभ दास के घर पहुंचे। बताया गया कि यह कार्रवाई एक स्थानीय अदालत से मिले वारंट के आधार पर की गई थी। छापा दोपहर तक चला।

क्या जब्त किया गया?

  • भूमि सौदों से जुड़े दस्तावेज

  • बैंक रिकॉर्ड

  • 15 से अधिक फाइलें

  • दो हार्ड ड्राइव

  • कुछ नकद लेजर

Police का कहना है कि उन्हें वित्तीय अनियमितताओं की सूचना मिली थी, जो दास के सेवानिवृत्ति के बाद की कंसल्टेंसी गतिविधियों से जुड़ी हो सकती हैं।

अमिताभ दास की प्रतिक्रिया-Police

अमिताभ दास ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित” बताया। उनके वकील राजेश कुमार ने कहा कि यह एक “विच हंट” है और अदालत में इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

दास का कहना है कि हाल ही में उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से राज्य में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई। उनके समर्थकों का मानना है कि यह पुराने मतभेदों का परिणाम हो सकता है।

Former IPS Amitabh Das Faces Police Action Over Letterhead Used In  Complaint To President Against PM – Patna Press

दास का करियर और पृष्ठभूमि

1988 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे अमिताभ दास ने तीन दशकों तक बिहार में सेवा दी। 1990 के दशक में उन्होंने संगठित अपराध के खिलाफ अभियान चलाया और बहादुरी पुरस्कार भी प्राप्त किया।

2010 में एक मंत्री के खिलाफ कथित घोटाले की जांच के बाद उनका तबादला हुआ था। 2020 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने Police सुधारों पर एक पुस्तक लिखी, जिसमें राज्य व्यवस्था की आलोचना की गई थी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं-Police

बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की पार्टी जेडीयू ने कहा कि “कानून सबके लिए बराबर है।” वहीं आरजेडी नेता Tejashwi Yadav ने ट्वीट कर इसे “सच बोलने वालों को डराने की कोशिश” बताया।

राजनीतिक हलकों में इस छापे को लेकर दो तरह की राय है—

  • एक पक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई मान रहा है।

  • दूसरा इसे सत्ता के दुरुपयोग के रूप में देख रहा है।

कानूनी और प्रशासनिक सवाल

कानूनी प्रक्रिया के तहत Police ने वारंट दिखाया और दो स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में तलाशी ली। हालांकि, सुबह-सुबह की गई कार्रवाई और बड़े पैमाने पर तलाशी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पिछले पांच वर्षों में बिहार में सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों पर बहुत कम छापे पड़े हैं। इसलिए यह मामला विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है।

जनता और मीडिया की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर #JusticeForDas जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कुछ लोग दास को ईमानदार अधिकारी और व्हिसलब्लोअर बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि जांच से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया में इस घटना को प्रमुखता से दिखाया गया है। कई विश्लेषक इसे लोकतंत्र में जवाबदेही और सत्ता संतुलन की कसौटी मान रहे हैं।

Raid at Amitabh Das residence in NEET student case sensation amitabh das ips  profile controversy

आगे क्या?

आने वाले हफ्तों में अदालत की सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी। यदि ठोस सबूत सामने आते हैं तो मामला गंभीर रूप ले सकता है। लेकिन यदि आरोप कमजोर साबित होते हैं, तो यह सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।

अमिताभ दास के घर पर पड़ा यह छापा सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति, प्रशासनिक पारदर्शिता और न्याय प्रणाली की परीक्षा भी है।

क्या यह निष्पक्ष जांच है या राजनीतिक प्रतिशोध? इसका जवाब आने वाला समय देगा।

Congress संकट: चुनावी हार के बीच राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं

Follow us on Facebook

India Savdhan News | Noida | Facebook

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.