Pollution

‘Pollution की गंदगी केजरीवाल की विरासत है’: बीजेपी ने रेखा गुप्ता के 10 महीने के ‘टर्नअराउंड’ की सराहना की

हर सर्दियों में दिल्ली की हवा भारी और धूसर हो जाती है। सांस लेना मुश्किल हो जाता है। लोग इस हालात के लिए नेताओं को दोष देते हैं। बीजेपी सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लेती है। उनका कहना है कि दिल्ली का Pollution केजरीवाल की “विरासत” है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी नगर निगम दिल्ली (MCD) की प्रमुख रेखा गुप्ता के पिछले 10 महीनों के काम की तारीफ कर रही है और इसे तेज़ सुधार का उदाहरण बता रही है।

यह लेख इसी टकराव को समझने की कोशिश करता है—एक तरफ केजरीवाल सरकार पर नाकामी के आरोप, दूसरी तरफ रेखा गुप्ता के स्थानीय स्तर पर किए गए कदम। सवाल यह है: क्या यह वाकई बड़ी सफलता है, या फिर एक बड़े संकट में सिर्फ़ एक छोटा-सा उजला बिंदु?

बीजेपी का सीधा आरोप: Pollution को केजरीवाल की ‘विरासत’ बताना

बीजेपी अपने हमलों में कोई नरमी नहीं दिखा रही। पार्टी नेताओं का कहना है कि दिल्ली हर साल स्मॉग से जूझती है और इसके लिए AAP सरकार की नीतियां ज़िम्मेदार हैं। उनका आरोप है कि योजना की कमी, कमज़ोर अमल और दीर्घकालिक समाधान न होने के कारण प्रदूषण बढ़ता गया।

बीजेपी का तर्क है कि:

  • निर्माण स्थलों की धूल पर ठीक से नियंत्रण नहीं हुआ

  • पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से आने वाले धुएं पर प्रभावी तालमेल नहीं बना

  • पुराने वाहनों और डीज़ल बसों से निकलने वाले धुएं पर देरी से कार्रवाई हुई

2024 में दिल्ली का औसत AQI 350 तक पहुंच गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। उस दौरान लोगों को बाहर निकलने के लिए मास्क पहनने पड़े।

AAP chief Arvind Kejriwal on Delhi CM Rekha Gupta's 'AQI is temperature' remark

प्रशासनिक विफलता के आरोप: बीजेपी की दलीलें

बीजेपी नेताओं का कहना है कि निगरानी तो हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं। सेंसर लगे, डेटा आया, पर उस पर सख्ती से अमल नहीं हुआ। निर्माण स्थलों पर जुर्माने कम वसूले गए। हरित पट्टियों (ग्रीन बेल्ट) और स्वच्छ ऊर्जा पर बड़ा कदम नहीं उठाया गया।

पराली जलाने का मुद्दा भी बड़ा रहा। अक्टूबर 2024 में आसपास के राज्यों में करीब 15,000 आग की घटनाएं दर्ज हुईं, जिससे AQI 450 तक पहुंच गया। बीजेपी के मुताबिक, ये सब मिलकर केजरीवाल सरकार की नाकामी को दिखाता है।

आंकड़ों की तुलना: रेखा गुप्ता से पहले और बाद की स्थिति

रेखा गुप्ता के कार्यभार संभालने से पहले (शुरुआत 2025) दिल्ली का औसत AQI करीब 320 था। PM2.5 का स्तर सुरक्षित सीमा से कई गुना ज़्यादा था।
10 महीनों बाद, MCD क्षेत्रों में औसत AQI घटकर करीब 250 तक आ गया—करीब 22% की कमी। PM10 और PM2.5 में भी गिरावट दर्ज की गई।

बीजेपी इन आंकड़ों को दिखाकर कहती है कि “जो केजरीवाल नहीं कर पाए, वह रेखा गुप्ता ने कर दिखाया।” हालांकि यह सुधार ज़्यादातर स्थानीय इलाकों तक सीमित है।

रेखा गुप्ता का 10 महीने का कार्यकाल: नगर निगम स्तर की सफलता?

फरवरी 2025 में MCD प्रमुख बनने के बाद रेखा गुप्ता ने तेज़ी से काम शुरू किया। उनके प्रमुख कदमों में शामिल रहे:

  • रोज़ाना सड़क सफाई और पानी का छिड़काव

  • निर्माण स्थलों पर एंटी-डस्ट नेट अनिवार्य

  • नियम तोड़ने वालों पर सख्त जुर्माने

  • कचरे से बायोगैस और कम्पोस्टिंग की व्यवस्था

पूर्वी दिल्ली और शाहदरा जैसे इलाकों में “क्लीन एयर ड्राइव” चलाए गए। हज़ारों पेड़ लगाए गए और खुले में कचरा जलाने पर रोक लगी।

AQI is temperature'? Kejriwal takes dig at Rekha Gupta over Delhi's pollution row

स्थानीय स्तर पर असर: क्या बदला?

MCD के अनुसार, रेखा गुप्ता के कार्यक्षेत्र में:

  • PM2.5 में करीब 25% की कमी

  • PM10 में करीब 18% की गिरावट

  • नवंबर 2025 में औसत AQI लगभग 220 रहा

कुछ स्थानीय लोग भी फर्क महसूस कर रहे हैं। दुकानदार और अभिभावक कहते हैं कि हवा पहले से थोड़ी बेहतर लगती है। पर्यावरण संगठनों ने भी माना है कि शिकायतों में कमी आई है।

स्थानीय शासन की सीमाएं: पूरी दिल्ली में Pollution क्यों बना हुआ है?

दिल्ली का Pollution सीमाओं से परे है। हरियाणा, यूपी और पंजाब से आने वाला धुआं, राष्ट्रीय राजमार्गों का ट्रैफिक और औद्योगिक उत्सर्जन—ये सब MCD के नियंत्रण से बाहर हैं।

नगर निगम धूल और कचरे पर काम कर सकता है, लेकिन:

  • उद्योगों पर DPCC का अधिकार है

  • हाइवे और ट्रांज़िट पर केंद्र की भूमिका है

  • पराली रोकने के लिए राज्यों का सहयोग ज़रूरी है

यही वजह है कि स्थानीय सुधारों के बावजूद पूरे शहर की हवा अभी भी गंभीर समस्या बनी हुई है।

विशेषज्ञों की राय: ‘टर्नअराउंड’ कितना बड़ा?

पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि रेखा गुप्ता के कदमों से स्थानीय स्तर पर सुधार हुआ है।
IIT दिल्ली की विशेषज्ञों के मुताबिक, धूल नियंत्रण से कुछ इलाकों में PM स्तर 15–20% तक घट सकता है। लेकिन कुल प्रदूषण का बड़ा हिस्सा पराली और वाहनों से आता है, जिस पर नगर निगम की सीधी पकड़ नहीं है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम स्तर के प्रयास कुल प्रदूषण में अधिकतम 10–15% तक ही कमी ला सकते हैं।

AQI is temperature'? Kejriwal takes dig at Rekha Gupta over Delhi's pollution row

राजनीतिक रणनीति: बीजेपी कैसे इस मुद्दे को भुना रही है?

बीजेपी रेखा गुप्ता की उपलब्धियों को सामने रखकर AAP और केजरीवाल पर हमला तेज़ कर रही है। यह एक चुनावी रणनीति भी है—स्थानीय सफलता दिखाकर बड़े नेतृत्व को घेरना।

हालांकि Pollution जैसी समस्या में ज़िम्मेदारी साझा होती है, लेकिन राजनीति में अक्सर पूरा दोष एक पक्ष पर डाला जाता है।

विरासत बड़े फैसलों से बनती है या छोटे सुधारों से?

बीजेपी के अनुसार, Pollution केजरीवाल की विरासत है और रेखा गुप्ता बदलाव का चेहरा। सच्चाई शायद बीच में है।
रेखा गुप्ता के स्थानीय प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए राज्य, केंद्र और पड़ोसी राज्यों के साझा और दीर्घकालिक कदम ज़रूरी हैं।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर, दिल्ली को सांस लेने लायक हवा चाहिए। इसके लिए सभी स्तरों पर ठोस और समन्वित कार्रवाई जरूरी है।

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